रोहिणी आचार्य का भावुक पोस्ट: पिता लालू प्रसाद को दी गई किडनी का जिक्र कर परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान, बिहार चुनाव हार के बाद बढ़ा विवाद
बिहार चुनाव से पहले रोहिणी का असंतोष साफ दिख रहा था। सितंबर 2025 में तेजस्वी की 'बिहार अधिकार यात्रा' के दौरान संजय यादव को वैनिटी वैन की अगली सीट प
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की हार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को झकझोर दिया है। पार्टी को महागठबंधन में महज 25 सीटें मिलीं, जबकि पिछले चुनाव में 75 थीं। इस करारी हार के एक दिन बाद, 15 नवंबर 2025 को लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर राजनीति छोड़ने और परिवार को त्यागने का ऐलान किया। इस पोस्ट में उन्होंने अपने पिता को दान की गई किडनी का जिक्र किया और अपनी आपबीती सुनाई। रोहिणी ने कहा कि परिवार में सम्मान की कमी और साजिशों ने उन्हें मजबूर कर दिया। यह पोस्ट परिवार के आंतरिक कलह को साफ उजागर करती है, जहां पहले ही बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को पार्टी से निकाल दिया गया था। रोहिणी का यह कदम बिहार की राजनीति में सनसनी फैला रहा है।
रोहिणी आचार्य लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की दूसरी बेटी हैं। उनका जन्म 1 जून 1979 को पटना में हुआ था। नामकरण संस्कार के समय रोहिणी नक्षत्र में जन्म होने से उनका नाम रोहिणी पड़ा। बचपन से ही वे मेडिकल की पढ़ाई में रुचि रखती थीं। उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की डिग्री ली। शादी के बाद उन्होंने घर-परिवार को प्राथमिकता दी और सिंगापुर में बस गईं। उनका पति समरेश सिंह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं, जो लालू के पुराने दोस्त राय रणविजय सिंह के बेटे हैं। दंपति के दो बेटे हैं और वे सिंगापुर व अमेरिका में रह चुके हैं। रोहिणी की नेट वर्थ करीब 10-15 करोड़ रुपये बताई जाती है, जो पति की कमाई और परिवार के संपर्कों से आती है। वे राजनीति में सक्रिय नहीं थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण सीट से आरजेडी की टिकट पर लड़ीं। वहां भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से हार गईं। फिर भी, वे परिवार और पार्टी के लिए प्रचार करती रहीं।
रोहिणी का सबसे बड़ा योगदान 2022 में आया, जब उन्होंने पिता लालू प्रसाद को किडनी दान की। लालू को लंबे समय से किडनी की समस्या थी। डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी। सिंगापुर के एक अस्पताल में ऑपरेशन हुआ। रोहिणी ने अपनी किडनी दान कर पिता का जीवन बचाया। इस त्याग ने उन्हें 'बिहार की बेटी नंबर वन' का खिताब दिलाया। पूरे देश में उनकी तारीफ हुई। लालू ने कहा था कि बेटी ने परिवार का फर्ज निभाया। रोहिणी ने तब एक्स पर पोस्ट किया था, "मैंने बेटी और बहन के रूप में अपना कर्तव्य निभाया है और आगे भी निभाती रहूंगी। मुझे कोई पद या राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। मेरे लिए स्वाभिमान सबसे ऊपर है।" ऑपरेशन के बाद लालू की तबीयत सुधरी और वे फरवरी 2023 में भारत लौटे। रोहिणी ने लिखा था, "मैं पापा को स्वस्थ करके आपके हवाले कर रही हूं। उनका ख्याल रखना।"
लेकिन किडनी दान के बाद भी रोहिणी को सवालों का सामना करना पड़ा। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि यह दान राजनीतिक लाभ के लिए था। सितंबर 2025 में रोहिणी ने एक्स पर एक पोस्ट कर इन अफवाहों का खंडन किया। उन्होंने कहा, "गंदे दिमाग वाले लोग कहते हैं कि किडनी दान झूठा था। अगर कोई साबित कर दे कि मैंने पापा को किडनी दान करने के बदले खुद या किसी और के लिए कुछ मांगा, तो मैं राजनीति और सार्वजनिक जीवन से स्वेच्छा से संन्यास ले लूंगी।" उन्होंने माफी मांगने की मांग की। यह पोस्ट परिवार के अंदरूनी मतभेदों की ओर इशारा करती थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सवाल तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकारों से जुड़े थे। रोहिणी ने संजय यादव और रमीज का नाम लिए बिना निशाना साधा। संजय यादव आरजेडी के राज्यसभा सांसद हैं और तेजस्वी के विश्वासपात्र। रमीज तेजस्वी के पुराने दोस्त हैं, जो उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिवार से हैं।
बिहार चुनाव से पहले रोहिणी का असंतोष साफ दिख रहा था। सितंबर 2025 में तेजस्वी की 'बिहार अधिकार यात्रा' के दौरान संजय यादव को वैनिटी वैन की अगली सीट पर बैठे देख रोहिणी ने आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा, "अगली सीट नेता की होती है।" फिर उन्होंने लालू, तेजस्वी, तेज प्रताप और मीसा भारती समेत परिवार व पार्टी के हैंडल्स को अनफॉलो कर दिया। क्रिप्टिक पोस्ट्स में परिवार में सम्मान की कमी और साजिशों का जिक्र किया। चुनाव प्रचार में वे तेजस्वी के लिए रहीं, लेकिन अंदर ही अंदर नाराजगी बढ़ती गई। 14 नवंबर को नतीजे आए। आरजेडी की हार ने सबको हिला दिया। एनडीए को 200 से ज्यादा सीटें मिलीं।
15 नवंबर को रोहिणी ने पहला पोस्ट किया: "मैं राजनीति छोड़ रही हूं और परिवार को त्याग रही हूं। यह संजय यादव और रमीज ने मुझे करने को कहा था। मैं सारी जिम्मेदारी खुद ले रही हूं।" उन्होंने कहा, "अगर मैं सवाल उठाती हूं तो गालियां दी जाती हैं, जूते मारे जाते हैं।" इसके तुरंत बाद एक और पोस्ट आई, जिसमें किडनी दान का जिक्र था। रोहिणी ने पुरानी पोस्ट शेयर की, जो ऑपरेशन थिएटर जाते समय लिखी थी। उन्होंने लिखा, "मैंने पापा को किडनी देकर अपना फर्ज निभाया। लेकिन आज परिवार में वही सम्मान नहीं मिला। जो बेटी जीवन दान कर सकती है, वही आज परिवार से बाहर हो रही है। सवाल उठाने पर अपमानित किया जाता है।" यह पोस्ट भावुक थी। रोहिणी ने कहा कि किडनी दान के बाद भी अफवाहें फैलाई गईं। "मेरा कोई परिवार नहीं बचा।" पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "तेजस्वी और रमीज से पूछो।" यह बयान परिवार के फूट को गहरा कर गया।
तेज प्रताप यादव ने बहन का समर्थन किया। उन्होंने एक्स पर लिखा, "हमारी बहन का अपमान करने वाला कृष्ण का सुदर्शन चक्र चलेगा। रोहिणी ने जो किया, वह कोई बेटी या मां कर सकती है। इतिहास में उनका नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।" तेज प्रताप को मई 2025 में सोशल मीडिया पोस्ट के कारण पार्टी से निकाला गया था। उन्होंने अपनी दोस्त अनुष्का से रिश्ते का ऐलान किया था। निष्कासन के बाद उन्होंने जनशक्ति जनता दल बनाई और महुआ से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। रोहिणी के पोस्ट को हजारों लाइक्स मिले। समर्थक उन्हें प्रेरणा मान रहे हैं।
राजनीतिक हलकों में यह विवाद आरजेडी के लिए खतरे की घंटी है। भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा, "रोहिणी ने किडनी दान कर लालू का जीवन बचाया, लेकिन परिवार ने अपमानित किया। यह दुखद है।" जेडीयू नेता अशोक चौधरी ने कहा, "परिवार में एकता नहीं तो पार्टी कैसे चलेगी।" लालू प्रसाद, जो स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय नहीं, चुप हैं। तेजस्वी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। संजय और रमीज ने मौन साधा। विश्लेषकों का कहना है कि संजय पर टिकट वितरण में हस्तक्षेप के आरोप हैं। यह कलह पार्टी को कमजोर कर रहा है। रोहिणी का किडनी दान याद दिलाता है कि परिवार पहले आता है। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या यह फूट ठीक होगा?
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