तेज प्रताप यादव का बयान- हमारी बहन का जो अपमान करेगा, कृष्ण का सुदर्शन चक्र चलेगा।
रोहिणी आचार्य का फैसला अचानक नहीं था। सिंगापुर में डॉक्टर के रूप में रहने वाली रोहिणी ने 2022 में अपने पिता लालू प्रसाद को किडनी दान देकर देशभर में सम्मान कमाया
बिहार विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) की करारी हार ने न केवल पार्टी को हिला दिया है, बल्कि लालू प्रसाद यादव के परिवार में भी गहरी दरार पैदा कर दी है। 15 नवंबर 2025 को चुनाव परिणाम आने के एक दिन बाद लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने और परिवार से नाता तोड़ने का ऐलान कर दिया। इस फैसले ने पूरे राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। रोहिणी ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के करीबी सलाहकार संजय यादव और रमीज नामक व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराया। इसी बीच, लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने अपनी बहन का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखी, जिसमें रोहिणी को मां, बहन और महिला के रूप में सराहा। साथ ही, अपमान करने वालों को भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र की चेतावनी दी। यह बयान परिवार के मतभेदों को और साफ कर रहा है, जहां तेज प्रताप पहले ही पार्टी से निष्कासित हो चुके हैं।
रोहिणी आचार्य का फैसला अचानक नहीं था। सिंगापुर में डॉक्टर के रूप में रहने वाली रोहिणी ने 2022 में अपने पिता लालू प्रसाद को किडनी दान देकर देशभर में सम्मान कमाया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सारण सीट से आरजेडी की ओर से चुनाव लड़ा, लेकिन भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से हार गईं। उसके बाद से उनकी पार्टी और परिवार के साथ नाराजगी बढ़ती गई। चुनावों से ठीक पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर लालू, तेजस्वी और पार्टी के हैंडल्स को अनफॉलो कर लिया था। रह-रहकर क्रिप्टिक पोस्ट्स डालती रहीं, जिनमें परिवार में सम्मान की कमी और साजिशों का जिक्र था। चुनाव प्रचार के दौरान वे तेजस्वी के लिए प्रचार करती नजर आईं, लेकिन अंदर ही अंदर असंतोष पनप रहा था।
15 नवंबर को रोहिणी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, "मैं राजनीति छोड़ रही हूं और परिवार को त्याग रही हूं। यह संजय यादव और रमीज ने मुझे करने को कहा था। मैं सारी जिम्मेदारी खुद ले रही हूं।" उन्होंने आगे कहा कि अगर वे सवाल उठाती हैं तो गालियां दी जाती हैं और जूते मारे जाते हैं। संजय यादव आरजेडी के राज्यसभा सांसद हैं और तेजस्वी के विश्वासपात्र माने जाते हैं। रमीज तेजस्वी के करीबी दोस्त हैं। रोहिणी ने इन्हें अपनी किडनी दान पर उठाए सवालों का जिम्मेदार बताया। इन आरोपों से परिवार में तनाव और बढ़ गया। रोहिणी ने कहा कि वे अब "मेरा कोई परिवार नहीं" है। यह बयान बिहार की राजनीति में सनसनी फैला गया, क्योंकि आरजेडी को महागठबंधन में महज 25-30 सीटें मिलीं, जबकि पिछली बार 75 थीं।
तेज प्रताप यादव का समर्थन रोहिणी के फैसले के तुरंत बाद आया। लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप को मई 2025 में एक सोशल मीडिया पोस्ट के कारण पार्टी से निकाल दिया गया था। उन्होंने अपनी दोस्त अनुष्का यादव के साथ रिश्ते का ऐलान किया था, जिसे परिवार ने स्वीकार नहीं किया। निष्कासन के बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल नामक नई पार्टी बना ली। चुनावों में उन्होंने महुआ सीट से खुद लड़ाई, लेकिन हार गए। उनकी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली। उन्होंने राघोपुर से तेजस्वी के खिलाफ उम्मीदवार भी उतारा। अब रोहिणी के बयान पर तेज प्रताप ने एक्स पर पोस्ट किया, "हमारी बहन का जो अपमान करेगा, कृष्ण का सुदर्शन चक्र चलेगा। अपनी जगह पर वो (रोहिणी आचार्य) बिल्कुल सही हैं। एक महिला, मां, बहन होने के नाते जो काम उन्होंने किया वो शायद ही कोई बेटी या मां कर सकती है। सदैव इनकी चर्चा की जाएगी, इतिहास के पन्नों में सुनहरे शब्दों में हमारी बहन का नाम लिखा जाएगा।"
यह बयान तेज प्रताप की बहन के प्रति गहरी वफादारी दिखाता है। वे कहते हैं कि रोहिणी ने जो साहस दिखाया है, वह किसी भी महिला के लिए प्रेरणा है। किडनी दान से लेकर राजनीतिक फैसले तक, रोहिणी का हर कदम इतिहास में दर्ज होगा। तेज प्रताप ने संजय यादव को "जयचंद" कहकर निशाना साधा है। जयचंद ऐतिहासिक रूप से विश्वासघाती व्यक्ति का प्रतीक है। वे मानते हैं कि संजय ने परिवार और पार्टी में फूट डाली है। इससे पहले सितंबर 2025 में तेजस्वी की बिहार अधिकार यात्रा के दौरान संजय को वैनिटी वैन की अगली सीट पर बैठे देख रोहिणी ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था, "अगली सीट नेता की होती है।" तेज प्रताप ने तब भी बहन का साथ दिया था।
लालू परिवार का यह झगड़ा नया नहीं है। लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के नौ बच्चे हैं। तेज प्रताप सबसे बड़े हैं, फिर तेजस्वी, उसके बाद रोहिणी। तेज प्रताप हमेशा से भावुक और आध्यात्मिक रहे हैं। वे रामायण-महाभारत के उदाहरण देते हैं। रोहिणी डॉक्टर हैं, सिंगापुर में परिवार के साथ रहती हैं। तेजस्वी आरजेडी के युवा चेहरा हैं, लेकिन अब उनकी नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। परिवार के इस फूट ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। चुनावों में वोट बंट गए। एनडीए ने 200 से ज्यादा सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया। विपक्षी नेता इसे "यादव परिवार का श्राप" बता रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कलह आरजेडी के लिए खतरे की घंटी है। संजय यादव पर टिकट वितरण में हस्तक्षेप के आरोप लगे। वे हरियाणा से हैं, लेकिन बिहार में प्रभावशाली हैं। रमीज उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिवार से हैं। रोहिणी के बयान के बाद संजय और रमीज ने चुप्पी साध रखी है। तेजस्वी ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लालू प्रसाद, जो स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय नहीं हैं, इस सबको चुपचाप देख रहे हैं। परिवार के एक सदस्य ने बताया कि लालू ने रोहिणी से बात की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। तेज प्रताप की पोस्ट को हजारों लाइक्स मिले। समर्थक उन्हें "भाई तेज प्रताप" कहकर प्रोत्साहित कर रहे हैं।
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