बिहार चुनाव 2025: जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार चंद्रशेखर सिंह की हार्ट अटैक से दर्दनाक मौत, तरारी सीट पर 2271 वोटों के साथ रहे थे पीछे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के दिन जन सुराज पार्टी को एक ऐसी त्रासदी का सामना करना पड़ा, जिसने पूरे राजनीतिक हलकों को स्तब्ध
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के दिन जन सुराज पार्टी को एक ऐसी त्रासदी का सामना करना पड़ा, जिसने पूरे राजनीतिक हलकों को स्तब्ध कर दिया। तरारी विधानसभा सीट से पार्टी के प्रत्याशी चंद्रशेखर सिंह की शुक्रवार 14 नवंबर 2025 को हार्ट अटैक से मौत हो गई। यह घटना चुनाव परिणाम घोषित होने के ठीक बाद हुई, जब सिंह परिवार के साथ घर लौटे थे। 70 वर्षीय सिंह को तरारी सीट पर 2271 वोट मिले थे, लेकिन वे भाजपा के विशाल प्रशांत से हार गए। विशाल को 68,456 वोट प्राप्त हुए, जबकि राष्ट्रीय जनता दल के मनोज पासवान को 42,789 वोट मिले। सिंह की मौत ने न केवल उनकी पार्टी को झकझोर दिया, बल्कि उनके गांव कुरमुरी और पूरे भोजपुर जिले में शोक की लहर दौड़ा दी। एक रिटायर्ड हेडमास्टर और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाना जाने वाले सिंह ने चुनाव प्रचार के दौरान स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया, लेकिन हार मानने की बजाय वे अंतिम सांस तक संघर्ष करते रहे। उनकी मौत पर प्राशांत किशोर ने गहरा शोक व्यक्त किया और कहा कि सिंह जैसे समर्पित कार्यकर्ता पार्टी का आधार स्तंभ थे।
चंद्रशेखर सिंह का जन्म भोजपुर जिले के कुरमुरी गांव में हुआ था। वे एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे और शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय तक सेवा दी। रिटायरमेंट के बाद वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय हो गए। बेरोजगारी, पलायन और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर वे हमेशा मुखर रहे। जन सुराज पार्टी के गठन के बाद प्राशांत किशोर की पदयात्रा से प्रभावित होकर उन्होंने पार्टी जॉइन की। किशोर की तीन साल लंबी पदयात्रा ने बिहार के गांव-गांव में जाकर लोगों की समस्याएं सुनीं और एक नई राजनीति का वादा किया। सिंह ने तरारी सीट से टिकट मिलने पर उत्साह दिखाया। उन्होंने कहा था कि वे युवाओं के लिए रोजगार और किसानों के लिए बेहतर सुविधाओं की लड़ाई लड़ेंगे। प्रचार के दौरान वे गांव-गांव घूमे, सभाएं कीं और लोगों से वादा किया कि जन सुराज बिहार को नई दिशा देगी। लेकिन 31 अक्टूबर को एक सभा के दौरान उन्हें पहला हार्ट अटैक आ गया। तुरंत पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें 10 दिनों तक निगरानी में रखा। सिंह ने अस्पताल से ही प्रचार जारी रखा। उन्होंने वीडियो मैसेज जारी कर समर्थकों से अपील की कि वे वोट डालें।
चुनाव 11 नवंबर को दूसरे चरण में हुए। तरारी सीट भोजपुर जिले में आती है, जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहां कुल 18 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा, आरजेडी और जन सुराज के बीच रहा। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से हुआ, जिसमें 65 प्रतिशत से अधिक वोट पड़े। परिणाम 14 नवंबर को सुबह आठ बजे शुरू हुए। शुरुआती रुझानों में भाजपा आगे दिखी। दोपहर तक साफ हो गया कि विशाल प्रशांत विजयी होंगे। चंद्रशेखर सिंह को तीसरा स्थान मिला। वे घर लौटे, जहां परिवार और समर्थक इंतजार कर रहे थे। लेकिन शाम चार बजे अचानक उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ। परिवार ने तुरंत एम्बुलेंस बुलाई और पटना के अस्पताल ले जाया, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांसें थम गईं। डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दूसरा हार्ट अटैक कारण बताया गया। सिंह की पत्नी और दो बेटों ने शव प्राप्त करते हुए रो-रोकर बिलख पड़े। गांव में शोक सभा हुई, जहां सैकड़ों लोग पहुंचे।
जन सुराज पार्टी के लिए यह चुनाव डेब्यू वाला था। प्राशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2024 को पार्टी की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने दावा किया कि एक करोड़ सदस्य हैं। पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी नहीं जीती। वोट शेयर करीब 9.6 प्रतिशत रहा, जो अन्य पार्टियों के साथ मिलाकर 13.5 प्रतिशत था। किशोर ने पहले कहा था कि पार्टी या तो शिखर पर होगी या फर्श पर। परिणाम फर्श पर साबित हुए। कई प्रमुख उम्मीदवारों ने बीच में टिकट छोड़ दिया। जैसे गोपालगंज से डॉ. शशि शेखर सिन्हा, बक्सर से डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी और दानापुर से अखिलेश कुमार। कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व पर आरोप लगाए कि स्थानीय लोगों को नजरअंदाज कर बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिए। तरारी में सिंह का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर था। पार्टी ने कहा कि उनके 2271 वोटों ने एनडीए को कड़ी टक्कर दी। किशोर ने सिंह की मौत पर कहा कि वे पार्टी के लिए प्रेरणा स्रोत थे। उन्होंने परिवार को सांत्वना दी और कहा कि सिंह का सपना पूरा होगा।
बिहार चुनाव 2025 दो चरणों में हुए। पहला चरण 6 नवंबर को 85 सीटों पर और दूसरा 11 नवंबर को 158 पर। कुल 243 सीटें हैं, जिसमें 38 एससी और 2 एसटी के लिए आरक्षित। 7.4 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लिया। मतदान प्रतिशत 67.13 रहा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 202 सीटें जीतीं। भाजपा को 89, जनता दल यूनाइटेड को 85, लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास को 19, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा को 5 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4। महागठबंधन को 35 सीटें मिलीं। राष्ट्रीय जनता दल को 25, कांग्रेस को 6, वाम दलों को 3 और अन्य को 1। जन सुराज की हार ने विपक्ष को और कमजोर किया। किशोर ने कहा कि यह शुरुआत है। पार्टी अब संगठन मजबूत करेगी। तरारी में भाजपा की जीत ने एनडीए की लहर को मजबूत किया। विशाल प्रशांत ने कहा कि सिंह एक सम्मानित व्यक्ति थे। उनकी मौत पर दुख व्यक्त किया।
चंद्रशेखर सिंह की मौत ने राजनीति के काले पहलू को उजागर किया। चुनाव प्रचार की थकान और तनाव स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। कई उम्मीदवारों को प्रचार के दौरान बीमारियां घेर लेती हैं। सिंह ने अस्पताल से प्रचार किया, जो उनकी निष्ठा दिखाता है। उनके गांव कुरमुरी में अंतिम संस्कार हुआ। हजारों लोग शामिल हुए। प्राशांत किशोर पटना से वीडियो कॉन्फ्रेंस में श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि सिंह जैसे कार्यकर्ता बिना स्वार्थ के लड़े। पार्टी ने उनके नाम पर एक फंड घोषित किया, जो परिवार की मदद करेगा। भोजपुर जिले के अन्य नेता भी शोक प्रकट कर चुके हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सिंह एक समर्पित शिक्षक थे। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने भी संवेदना जताई।
यह घटना बिहार की राजनीति में एक खालीपन पैदा कर गई। जन सुराज जैसी नई पार्टी को संगठन की कमी महसूस हुई। किशोर ने पदयात्रा से लाखों लोगों को जोड़ा, लेकिन बूथ स्तर पर कमजोरी रही। तरारी जैसे ग्रामीण इलाकों में स्थानीय मुद्दे जैसे बाढ़, बेरोजगारी और सड़कें प्रमुख थे। सिंह ने इन्हें उठाया, लेकिन वोट नहीं बने। उनकी मौत ने पार्टी कार्यकर्ताओं को झकझोर दिया। कई ने कहा कि सिंह जीवित होते तो पार्टी का चेहरा चमकता। अब पार्टी अगले चुनावों पर नजर लगाएगी। किशोर ने कहा कि फर्श से ही शिखर पर चढ़ना होता है। सिंह की यादें पार्टी को प्रेरित करेंगी।
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