इस देश में हैं विश्व के सबसे उम्रदराज राष्ट्रपति, उम्र 92 वर्ष और कार्यकाल 43 साल, अब भी हैं सत्ता में काबिज
हालांकि, उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले साल 42 दिन तक सार्वजनिक रूप से न दिखने के कारण उनकी सेहत और मृत्यु की अफवाहें फैली थीं। सरका
कैमरून के राष्ट्रपति पॉल बिया, जो 92 साल की उम्र में दुनिया के सबसे बुजुर्ग राष्ट्राध्यक्ष हैं, ने 12 अक्टूबर 2025 को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में आठवीं बार उम्मीदवारी की घोषणा की है। 1982 से सत्ता में काबिज बिया ने 43 साल तक देश का नेतृत्व किया है और अब वह 99 साल की उम्र तक शासन करने की योजना बना रहे हैं। उनकी इस घोषणा ने कैमरून की राजनीति में हलचल मचा दी है। जहां कुछ लोग उनकी स्थिरता की तारीफ करते हैं, वहीं कई लोग उनकी लंबी सत्ता, भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की आलोचना करते हैं।
13 जुलाई 2025 को पॉल बिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी उम्मीदवारी की घोषणा की। उन्होंने लिखा, "मैं 12 अक्टूबर 2025 के राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार हूं। मेरा विश्वास है कि हम मिलकर हर चुनौती का सामना कर सकते हैं। सबसे अच्छा अभी बाकी है।" उनकी पार्टी, कैमरून पीपल्स डेमोक्रेटिक मूवमेंट (सीपीडीएम), ने पिछले साल से ही उनके फिर से चुनाव की मांग शुरू कर दी थी। बिया ने 17 जुलाई को अपनी पार्टी के महासचिव जीन नकुएटे के जरिए उम्मीदवारी दर्ज की।
हालांकि, उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पिछले साल 42 दिन तक सार्वजनिक रूप से न दिखने के कारण उनकी सेहत और मृत्यु की अफवाहें फैली थीं। सरकार ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए स्वास्थ्य चर्चा को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया और मीडिया में इस पर बात करने पर रोक लगा दी।
पॉल बिया का जन्म 13 फरवरी 1933 को कैमरून के दक्षिणी हिस्से में हुआ था। उन्होंने फ्रांस में राजनीति विज्ञान और कानून की पढ़ाई की और 1960 में स्वतंत्र कैमरून में वापस लौटे। 1960 के दशक में वह तेजी से ऊंचे सरकारी पदों पर पहुंचे। 1975 में वह तत्कालीन राष्ट्रपति अहमदौ अहिदजो के अधीन प्रधानमंत्री बने। 1982 में अहिदजो के अचानक इस्तीफे के बाद बिया राष्ट्रपति बने और 1983-84 में एक असफल तख्तापलट को दबाकर अपनी सत्ता मजबूत की।
बिया ने 1990 में विपक्षी दलों को वैध किया और बहुदलीय व्यवस्था शुरू की। 1992 में हुए पहले बहुदलीय चुनाव में उन्होंने 40% वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि विपक्षी नेता जॉन फ्रू नदी को 36% वोट मिले। विपक्ष ने धांधली का आरोप लगाया। 2008 में बिया ने संवैधानिक संशोधन कर कार्यकाल की सीमा हटा दी, जिससे वह अनिश्चितकाल तक चुनाव लड़ सकते हैं। 2018 के चुनाव में उन्हें 71% वोट मिले, लेकिन विपक्ष ने फिर धांधली का दावा किया।
बिया के 43 साल के शासन में कैमरून ने आर्थिक स्थिरता और विदेशी निवेश हासिल किया, खासकर फ्रांस और चीन से। देश कोको और तेल का बड़ा निर्यातक है। 2024 में विश्व बैंक के अनुसार, कैमरून की जीडीपी 3.5% बढ़ी। लेकिन देश कई समस्याओं से जूझ रहा है। करीब 40% आबादी गरीबी रेखा से नीचे रहती है। बुनियादी सुविधाओं, जैसे साफ पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है। बेरोजगारी, खासकर युवाओं में, एक बड़ी समस्या है।
कैमरून में 2016 से अंग्रेजी भाषी क्षेत्रों में अलगाववादी आंदोलन चल रहा है, जिसके कारण हजारों लोग मारे गए और 10 लाख से ज्यादा विस्थापित हुए। उत्तर में बोको हराम की हिंसा भी चुनौती बनी हुई है। बिया की सैन्य नीति ने इन समस्याओं को हल करने में ज्यादा सफलता नहीं दिखाई। भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी उनकी सरकार पर लगते रहे हैं। 2018 में विपक्षी नेता मौरिस काम्टो को नौ महीने जेल में रखा गया, जिसे मानवाधिकार संगठनों ने दमन बताया।
2025 के चुनाव में बिया को कई विपक्षी नेताओं से चुनौती मिल रही है, जिनमें मौरिस काम्टो (कैमरून रेनेसां मूवमेंट), जोशुआ ओसिह (सोशल डेमोक्रेटिक फ्रंट), अकेरे मूना (यूनिवर्स पार्टी) और कैब्राल लिबी (कैमरून पार्टी फॉर नेशनल रिकॉन्सिलिएशन) शामिल हैं। लेकिन विपक्ष के 300 से ज्यादा दलों में एकता की कमी है। जर्मनी के राजनीतिक विश्लेषक कॉलिन्स मोलुआ इकोमे के अनुसार, विपक्ष का बिखराव बिया की जीत को आसान बनाता है।
बिया के दो पुराने सहयोगी, इस्सा चिरोमा बकारी और बेलो बौबा मैगारी, ने उनकी गठबंधन सरकार छोड़कर अपनी उम्मीदवारी घोषित की है। लेकिन उनकी पार्टियों का प्रभाव सीमित है, जिससे बिया को ज्यादा खतरा नहीं दिखता।
बिया की उम्मीदवारी की घोषणा ने कैमरून में मिश्रित प्रतिक्रिया पैदा की। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनके अनुभव की तारीफ की, जबकि कई ने उनकी उम्र और लंबे शासन की आलोचना की। एक यूजर ने लिखा, "कैमरून को सड़कें चाहिए, न कि हैशटैग।" 27 वर्षीय उद्यमी चे अर्नोल्ड ने कहा, "ट्वीट और फेसबुक पोस्ट से ज्यादा हमें सुधार और सामाजिक समस्याओं का हल चाहिए।" कैमरून में 60% से ज्यादा आबादी 25 साल से कम उम्र की है, और युवा रोजगार और बेहतर भविष्य की मांग कर रहे हैं।
कैथोलिक बिशप बार्थेलेमी याउदा होर्गो ने जनवरी 2025 में बिया से इस्तीफे की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इसे खारिज कर दिया। याउदा ने कहा, "कैमरून को नई नेतृत्व की जरूरत है।"
बिया की उम्र के कारण उत्तराधिकार का मुद्दा चर्चा में है। उनके बेटे फ्रांक बिया को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है, जो राजनीति और व्यवसाय में सक्रिय हैं। संविधान के अनुसार, अगर बिया का कार्यकाल अधूरा रहता है, तो सीनेट के अध्यक्ष मार्सेल नियात नजिफेंजी अंतरिम राष्ट्रपति बनेंगे। लेकिन बिया की पार्टी और सेना की वफादारी उनके पक्ष में है।
पॉल बिया की आठवीं बार उम्मीदवारी ने कैमरून की राजनीति को गरमा दिया है। 43 साल के शासन में उन्होंने देश को आर्थिक स्थिरता दी, लेकिन भ्रष्टाचार, गरीबी और हिंसा की समस्याएं बनी हुई हैं। विपक्ष के बिखराव और बिया की मजबूत सत्ता के कारण उनकी जीत की संभावना अधिक है। लेकिन उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जो देश में उत्तराधिकार और बदलाव की चर्चा को तेज कर रहे हैं। कैमरून के युवा और विपक्ष नई दिशा की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन बिया का दबदबा अभी भी बना हुआ है।
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