एलपीजी सिलेंडर की एक बुकिंग ने खत्म किया चार साल का वनवास: पंजाब पुलिस ने मध्य प्रदेश से दबोचा भगोड़ा पूर्व आर्मी कैप्टन।

पंजाब पुलिस की अपराध शाखा ने एक बेहद जटिल और लंबे समय से लंबित मामले को सुलझाते हुए भारतीय सेना के पूर्व कैप्टन संदीप तोमर को गिरफ्तार

Apr 1, 2026 - 13:42
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एलपीजी सिलेंडर की एक बुकिंग ने खत्म किया चार साल का वनवास: पंजाब पुलिस ने मध्य प्रदेश से दबोचा भगोड़ा पूर्व आर्मी कैप्टन।
एलपीजी सिलेंडर की एक बुकिंग ने खत्म किया चार साल का वनवास: पंजाब पुलिस ने मध्य प्रदेश से दबोचा भगोड़ा पूर्व आर्मी कैप्टन।
  • पत्नी की हत्या के आरोपी संदीप तोमर की फरारी का हुआ अंत: सेना की ट्रेनिंग और पहचान बदलने का पैंतरा भी नहीं आया काम
  • डिजिटल फुटप्रिंट बना काल: मध्य प्रदेश के रीवा में छिपकर रह रहे पूर्व कैप्टन को पंजाब पुलिस की विशेष टीम ने किया गिरफ्तार

पंजाब पुलिस की अपराध शाखा ने एक बेहद जटिल और लंबे समय से लंबित मामले को सुलझाते हुए भारतीय सेना के पूर्व कैप्टन संदीप तोमर को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। आरोपी संदीप तोमर पिछले चार वर्षों से कानून की नजरों से बचकर फरार चल रहा था और उस पर अपनी ही पत्नी की नृशंस हत्या करने का गंभीर आरोप है। यह गिरफ्तारी मध्य प्रदेश के रीवा जिले से हुई है, जहाँ वह अपनी पहचान छिपाकर एक सामान्य नागरिक की तरह जीवन व्यतीत कर रहा था। पुलिस की टीमें उसे पंजाब के विभिन्न जिलों सहित देश के कई राज्यों में तलाश रही थीं, लेकिन सेना की विशेष ट्रेनिंग और छिपने की कला में माहिर होने के कारण वह हर बार बच निकलता था। अंततः आधुनिक तकनीक और एक छोटी सी मानवीय चूक ने उसे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है, जिससे चार साल पुराने इस सनसनीखेज हत्याकांड की गुत्थी सुलझ गई है।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि साल 2022 की है, जब संदीप तोमर की पत्नी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। प्रारंभिक जांच और साक्ष्यों के आधार पर संदीप को मुख्य संदिग्ध माना गया, लेकिन इससे पहले कि पुलिस उसे हिरासत में ले पाती, वह गायब हो गया। सेना में कैप्टन के पद पर तैनात रहने के कारण संदीप को सुरक्षा घेरों को तोड़ने और छिपने के गुप्त ठिकानों की गहरी समझ थी। उसने अपनी फरारी के दौरान कभी भी अपने पुराने मोबाइल नंबर, बैंक खातों या सोशल मीडिया प्रोफाइल का उपयोग नहीं किया, जिससे पुलिस के लिए उसे ट्रैक करना लगभग नामुमकिन हो गया था। पंजाब पुलिस ने उस पर इनाम भी घोषित किया था और उसकी तलाश के लिए कई बार पड़ोसी राज्यों में छापेमारी की थी, परंतु वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा और पहचान बदलकर अलग-अलग शहरों में ठिकाने बनाता रहा।

संदीप तोमर की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है, जहाँ एक साधारण एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग ने उसकी पूरी योजना को ध्वस्त कर दिया। दरअसल, फरारी के दौरान उसने अपनी पहचान बदलकर एक नया आधार कार्ड और दस्तावेज बनवा लिए थे, जिसके जरिए उसने मध्य प्रदेश में एक किराए का मकान लिया था। हालांकि, वह डिजिटल दुनिया से पूरी तरह कट चुका था, लेकिन रसोई गैस की आवश्यकता के कारण उसने अपने नए पते पर एक गैस कनेक्शन लिया। पुलिस की साइबर सेल और इंटेलिजेंस विंग लगातार उन डेटाबेस की निगरानी कर रही थी, जहाँ नए कनेक्शन या पहचान पत्रों का मिलान संदीप के पुराने रिकॉर्ड से किया जा सके। जब उसने अपने मोबाइल से गैस रिफिल की बुकिंग की, तो उसके स्थान की जानकारी डिजिटल रडार पर आ गई, जिससे पुलिस को उसकी सटीक लोकेशन का सुराग मिल गया।

डिजिटल सर्विलांस का बढ़ता जाल

आधुनिक समय में अपराधियों के लिए पूरी तरह से अदृश्य होना असंभव होता जा रहा है। 'डिजिटल फुटप्रिंट' यानी तकनीक के उपयोग से छोड़े गए निशान अक्सर भगोड़ों की गिरफ्तारी का कारण बनते हैं। इस मामले में भी, आधार डेटाबेस और गैस एजेंसी के रिकॉर्ड के बीच हुए मिलान ने पुलिस को यह संकेत दिया कि रीवा में रह रहा व्यक्ति वही भगोड़ा कैप्टन हो सकता है। पुलिस ने इस ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा ताकि आरोपी को भनक न लगे और वह फिर से भागने में सफल न हो जाए।

जैसे ही पंजाब पुलिस को संदीप तोमर के मध्य प्रदेश में होने की पुष्टि हुई, एक विशेष टीम को तुरंत रवाना किया गया। पुलिस ने स्थानीय प्रशासन की मदद ली और उस इलाके की रेकी की जहाँ वह रह रहा था। आरोपी ने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली थी और वह स्थानीय बोली बोलने लगा था ताकि कोई उसे पहचान न सके। गिरफ्तारी के समय वह दंग रह गया क्योंकि उसे भरोसा था कि उसने अपनी पिछली पहचान के सारे निशान मिटा दिए हैं। पुलिस ने उसे हिरासत में लेने के बाद ट्रांजिट रिमांड पर लिया और उसे वापस पंजाब लाया गया है। शुरुआती पूछताछ में यह पता चला है कि वह अपनी फरारी के दौरान छोटे-मोटे काम करके अपना गुजारा कर रहा था और उसने कभी भी अपने परिवार या दोस्तों से संपर्क करने की कोशिश नहीं की थी ताकि पुलिस उसे ट्रेस न कर पाए।

पत्नी की हत्या के पीछे के कारणों को लेकर पुलिस अब संदीप से गहन पूछताछ कर रही है। सूत्रों के अनुसार, दंपत्ति के बीच लंबे समय से अनबन चल रही थी और विवाद इतना बढ़ गया कि उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। सेना से जुड़े होने के कारण उसके पास हथियारों और कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी थी, जिसका फायदा उठाकर उसने चार साल तक पुलिस को छकाए रखा। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या उसकी फरारी में किसी अन्य व्यक्ति या संगठन ने उसकी आर्थिक या रणनीतिक मदद की थी। इस मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कानून के हाथ लंबे होते हैं और देर-सबेर अपराधी को अपने कृत्यों का फल भुगतना ही पड़ता है।

इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस ने अपनी तकनीक-आधारित जांच प्रक्रिया की सराहना की है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के मामलों में मैन्युअल इंटेलिजेंस के साथ-साथ डिजिटल डेटा का विश्लेषण करना बहुत जरूरी हो गया है। संदीप तोमर को अब कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहाँ पुलिस उसकी रिमांड की मांग करेगी ताकि हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों और अन्य साक्ष्यों को बरामद किया जा सके। समाज में इस गिरफ्तारी को लेकर काफी चर्चा है, क्योंकि एक शिक्षित और सम्मानित पद पर रहे व्यक्ति द्वारा ऐसा अपराध करना और फिर कानून से भागना व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती थी। अब मृतका के परिजनों को न्याय की उम्मीद जगी है, जो पिछले चार वर्षों से अपनी बेटी के हत्यारे की गिरफ्तारी का इंतजार कर रहे थे।

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