निफ्टी50 का ट्रेडिंग सेटअप: भारी गिरावट के साथ खुला बाजार, क्या निचले स्तरों से आएगी रिकवरी?

भारतीय शेयर बाजार के लिए 2 अप्रैल 2026 की सुबह भारी उतार-चढ़ाव भरी रही। बुधवार की शानदार तेजी के बाद, आज बाजार ने एक बार फिर

Apr 2, 2026 - 11:41
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निफ्टी50 का ट्रेडिंग सेटअप: भारी गिरावट के साथ खुला बाजार, क्या निचले स्तरों से आएगी रिकवरी?
निफ्टी50 का ट्रेडिंग सेटअप: भारी गिरावट के साथ खुला बाजार, क्या निचले स्तरों से आएगी रिकवरी?
  • ग्लोबल मार्केट में मची खलबली: 2 अप्रैल को निफ्टी में 400 अंकों का गैप-डाउन, जानें आज के सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल्स
  • ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की तपिश: दलाल स्ट्रीट पर हावी हुए 'बियर्स', निवेशकों के लिए क्या है आज की रणनीति?

भारतीय शेयर बाजार के लिए 2 अप्रैल 2026 की सुबह भारी उतार-चढ़ाव भरी रही। बुधवार की शानदार तेजी के बाद, आज बाजार ने एक बार फिर निवेशकों को चौंकाते हुए बड़ी गिरावट के साथ शुरुआत की। गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) से मिलने वाले संकेतों के अनुसार, निफ्टी 50 ने लगभग 400 अंकों के बड़े गैप-डाउन के साथ कारोबार शुरू किया। इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव को माना जा रहा है, जिसने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के हालिया बयानों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite) में भारी कमी आई है। बाजार खुलने के साथ ही बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि बेंचमार्क इंडेक्स अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल्स को भी पार कर गए।

इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा वैश्विक कारक कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी है। ईरान के साथ बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई बाजारों में निक्केई और कोस्पी में 1.5% से 3% तक की गिरावट दर्ज की गई, जिसका सीधा असर घरेलू सेंटिमेंट पर पड़ा। हालांकि अमेरिकी बाजार पिछले सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन डाओ फ्यूचर्स में आई भारी गिरावट ने आज सुबह भारतीय बाजार के खुलने से पहले ही नकारात्मक माहौल तैयार कर दिया था। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा की जा रही लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए सिरदर्द बनी हुई है।

तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो निफ्टी50 के लिए आज का दिन काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। 22,679 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले बाजार 22,400 के नीचे खुला है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, 22,300 का स्तर अब निफ्टी के लिए एक 'मेक और ब्रेक' जोन की तरह काम कर रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर को बनाए रखने में विफल रहता है, तो बिकवाली और गहरा सकती है जो निफ्टी को 22,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक धकेल सकती है। वहीं, ऊपर की ओर 22,650 और 22,800 अब मजबूत रेजिस्टेंस (रुकावट) के रूप में कार्य करेंगे। आरएसआई (RSI) और अन्य मोमेंटम इंडिकेटर्स फिलहाल ओवरसोल्ड जोन की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे निचले स्तरों पर थोड़ी रिकवरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

विशेष इनसेट: बाजार में मौजूदा अस्थिरता को देखते हुए ट्रेडर्स को 'सेल ऑन राइज' (उछाल पर बिकवाली) की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। जब तक निफ्टी निर्णायक रूप से 22,750 के पार बंद नहीं होता, तब तक बाजार में बुल्स की वापसी मुश्किल नजर आती है। ऐसे में कैश सेगमेंट में निवेश करने वाले निवेशकों को चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी करनी चाहिए।

डेरिवेटिव डेटा के अनुसार, आज की साप्ताहिक एक्सपायरी के कारण बाजार में भारी उठापटक देखने को मिल रही है। कॉल राइटर्स 23,000 और 22,800 के स्ट्राइक प्राइस पर काफी सक्रिय हैं, जो यह दर्शाता है कि बाजार को ऊपर जाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। दूसरी ओर, पुट साइड में 22,200 और 22,000 के स्तर पर ओपन इंटरेस्ट अधिक है, जो गिरावट को रोकने के लिए अंतिम रक्षा पंक्ति का काम करेंगे। पुट-कॉल रेशियो (PCR) फिलहाल 0.80 के करीब है, जो बाजार के अत्यधिक मंदी की स्थिति (Extremely Oversold) में होने का संकेत देता है। आमतौर पर ऐसे स्तरों से एक 'शॉर्ट कवरिंग' रैली की उम्मीद की जाती है, लेकिन इसके लिए वैश्विक समाचारों में सुधार होना अनिवार्य है।

सेक्टर-वार प्रदर्शन की बात करें तो बैंकिंग और आईटी शेयरों पर आज सबसे ज्यादा दबाव देखा जा रहा है। निफ्टी बैंक, जो बुधवार को 51,400 के पार बंद हुआ था, आज 51,000 के नीचे फिसल गया है। एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी ने बैंक निफ्टी को काफी नुकसान पहुंचाया है। आईटी सेक्टर भी वैश्विक मंदी की आशंकाओं के चलते लाल निशान में कारोबार कर रहा है। हालांकि, डिफेंसिव सेक्टर जैसे कि एफएमसीजी और फार्मा में कुछ हद तक स्थिरता देखी जा सकती है। इसके अलावा, तेल एवं गैस क्षेत्र की कंपनियों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है, जहाँ ओएनजीसी जैसे उत्पादकों को लाभ मिल रहा है, वहीं रिफाइनिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भूमिका इस बाजार में काफी महत्वपूर्ण हो गई है। मार्च के महीने में एफपीआई ने भारतीय बाजारों से रिकॉर्ड निकासी की है, जिसका असर रुपये की कमजोरी पर भी पड़ा है। डॉलर इंडेक्स की मजबूती और घरेलू मुद्रा का सर्वकालिक निचले स्तर के करीब पहुंचना, बाजार के लिए 'दोहरी मार' जैसा साबित हो रहा है। इसके बावजूद, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को संभालने की कोशिश की है और वे लगातार खरीदारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक एफआईआई की बिकवाली नहीं रुकती, तब तक बाजार में कोई भी टिकाऊ तेजी आना मुश्किल है। खुदरा निवेशकों को इस समय आक्रामक होने के बजाय 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनानी चाहिए।

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