उत्तराखंड- केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी लौट रहा गौरीकुंड के पास हेलीकॉप्टर दुर्घटना में सात लोगों की दुखद मृत्यु, बचाव कार्य जारी।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में रविवार सुबह एक दुखद हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी लौट रहा....
रुद्रप्रयाग : उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में रविवार सुबह एक दुखद हादसे ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। केदारनाथ धाम से गुप्तकाशी लौट रहा आर्यन एविएशन कंपनी का एक हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट सहित सात लोगों की मृत्यु हो गई। मृतकों में एक 23 महीने की बच्ची भी शामिल है। प्रारंभिक जांच में खराब मौसम और कम दृश्यता को इस हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर ने रविवार सुबह करीब 5:20 बजे केदारनाथ हेलीपैड से छह यात्रियों को लेकर गुप्तकाशी के लिए उड़ान भरी थी। ये यात्री केदारनाथ धाम के दर्शन कर वापस लौट रहे थे। हेलीकॉप्टर आर्यन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का था और इसे पायलट कैप्टन राजबीर सिंह चौहान संचालित कर रहे थे। गौरीकुंड और त्रिजुगीनारायण के बीच, गौरी माई खर्क नामक स्थान के पास, घने जंगलों में हेलीकॉप्टर अचानक क्रैश हो गया। हादसे की सूचना सबसे पहले स्थानीय महिलाओं ने दी, जो उस क्षेत्र में घास काटने गई थीं।
रुद्रप्रयाग के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि हादसा सुबह लगभग 5:30 बजे हुआ। उन्होंने कहा, "खराब मौसम और घने कोहरे के कारण दृश्यता लगभग शून्य थी, जिसके चलते पायलट ने हेलीकॉप्टर को घाटी से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रहा।" हेलीकॉप्टर के क्रैश होने के बाद उसमें आग लग गई, जिससे बचाव कार्य और जटिल हो गया। घटनास्थल एक दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र है, जो गौरीकुंड से लगभग 5 किलोमीटर ऊपर पैदल मार्ग पर स्थित है।
मृतकों की पहचान
हादसे में मारे गए सात लोगों की पहचान निम्नलिखित है:
कैप्टन राजबीर सिंह चौहान - पायलट, निवासी जयपुर, राजस्थान।
विक्रम रावत - बीकेटीसी कर्मचारी, निवासी रासी, ऊखीमठ, उत्तराखंड।
विनोद देवी - उम्र 66 वर्ष, निवासी उत्तर प्रदेश।
तृष्टि सिंह - उम्र 19 वर्ष, निवासी उत्तर प्रदेश।
राजकुमार - निवासी महाराष्ट्र।
श्रद्धा - निवासी गुजरात।
23 महीने की बच्ची - नाम और निवास स्थान की जानकारी प्रारंभिक जांच में स्पष्ट नहीं।
मृतकों में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के यात्री शामिल थे। इस हादसे ने विभिन्न राज्यों के परिवारों को गहरा आघात पहुंचाया है।
- बचाव और राहत कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही उत्तराखंड पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो गईं। गढ़वाल के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राजीव स्वरूप ने बताया कि घटनास्थल अत्यंत दुर्गम है, जिसके कारण बचाव कार्य में चुनौतियां आ रही हैं। "हमारी टीमें स्थानीय लोगों के सहयोग से राहत कार्य में जुटी हैं। खराब मौसम और घने जंगल इस कार्य को और कठिन बना रहे हैं," उन्होंने कहा।
उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूकाडा) की सीईओ सोनिका ने बताया कि हादसे की सूचना सुबह 5:30 बजे मिली थी, जब हेलीकॉप्टर का संपर्क टूट गया। इसके बाद तत्काल खोजबीन शुरू की गई, और कुछ समय बाद गौरीकुंड के जंगलों में हेलीकॉप्टर का मलबा मिला। यूकाडा ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, "हेलीकॉप्टर में पायलट सहित छह यात्री (पांच वयस्क और एक बच्चा) सवार थे। राहत और बचाव के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।"
- मुख्यमंत्री और नेताओं की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "जनपद रुद्रप्रयाग में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने का अत्यंत दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और अन्य रेस्क्यू दल राहत और बचाव कार्यों में जुटे हैं। बाबा केदार से सभी यात्रियों के सकुशल होने की कामना करता हूं।" हालांकि, बाद में हादसे में सभी सात लोगों की मृत्यु की पुष्टि हो गई। पौड़ी गढ़वाल के लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, "यह हादसा अत्यंत दुखद है। मैं मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि ईश्वर उनकी आत्माओं को शांति प्रदान करे।" यह हादसा उत्तराखंड में हाल के महीनों में हेलीकॉप्टर से जुड़ी कई घटनाओं में से एक है। चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए एक सुगम और लोकप्रिय विकल्प हैं, लेकिन खराब मौसम और तकनीकी खामियों के कारण ये हादसे बार-बार सामने आ रहे हैं। कुछ उल्लेखनीय घटनाएं निम्नलिखित हैं:
8 मई 2025: उत्तरकाशी के गंगनानी में एक हेलीकॉप्टर क्रैश में पायलट सहित छह लोगों की मृत्यु।
7 जून 2025: केदारनाथ मार्ग पर क्रिस्टल एविएशन के हेलीकॉप्टर की आपातकालीन लैंडिंग, जिसमें सभी यात्री सुरक्षित रहे।
18 अक्टूबर 2022: केदारनाथ से गुप्तकाशी लौट रहे आर्यन एविएशन के हेलीकॉप्टर क्रैश में सात लोगों की मृत्यु।
25 जून 2013: केदारनाथ आपदा के दौरान वायुसेना का एमआई-17 हेलीकॉप्टर क्रैश, जिसमें 20 लोगों की जान गई।
पिछले 12 वर्षों में केदारनाथ मार्ग पर 14 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 33 लोगों की जान जा चुकी है। ये घटनाएं हेलीकॉप्टर सेवाओं की सुरक्षा और संचालन पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
हादसे के बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने जांच शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब मौसम के अलावा, हेलीकॉप्टर की तकनीकी स्थिति और पायलट प्रशिक्षण की भी जांच की जाएगी। उत्तराखंड में बार-बार हो रहे हेलीकॉप्टर हादसों को देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ मार्ग पर हेलीकॉप्टर उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। यूकाडा ने बताया कि रोजाना 200-250 उड़ानें कम की गई हैं ताकि सुरक्षा मानकों को और सख्त किया जा सके। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर सेवाएं श्रद्धालुओं के लिए समय और श्रम बचाने का एक महत्वपूर्ण साधन हैं। हालांकि, हिमालयी क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियां, अचानक बदलने वाला मौसम और तकनीकी चुनौतियां इन सेवाओं को जोखिम भरा बनाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हेलीकॉप्टर संचालन के लिए सख्त नियम, बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली और पायलटों के लिए विशेष प्रशिक्षण आवश्यक है। इस हादसे ने एक बार फिर एविएशन कंपनियों की जवाबदेही और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोग और तीर्थयात्री अब हेलीकॉप्टर सेवाओं के बजाय पैदल यात्रा को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहे हैं। गौरीकुंड हेलीकॉप्टर हादसा उत्तराखंड के लिए एक गहरी त्रासदी है, जिसने सात अनमोल जिंदगियों को छीन लिया।
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