मध्य प्रदेश: 12 दिन बाद लखीमपुर खीरी में मिली लापता अर्चना तिवारी, पुलिस जांच में कई सवालों के जवाब का इंतजार। 

MP News: मध्य प्रदेश के कटनी जिले की रहने वाली 29 वर्षीय अर्चना तिवारी, जो इंदौर में रहकर सिविल जज की तैयारी कर रही थीं, 12 दिन पहले नर्मदा एक्सप्रेस...

Aug 20, 2025 - 12:04
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मध्य प्रदेश: 12 दिन बाद लखीमपुर खीरी में मिली लापता अर्चना तिवारी, पुलिस जांच में कई सवालों के जवाब का इंतजार। 
मध्य प्रदेश: 12 दिन बाद लखीमपुर खीरी में मिली लापता अर्चना तिवारी, पुलिस जांच में कई सवालों के जवाब का इंतजार। 

मध्य प्रदेश के कटनी जिले की रहने वाली 29 वर्षीय अर्चना तिवारी, जो इंदौर में रहकर सिविल जज की तैयारी कर रही थीं, 12 दिन पहले नर्मदा एक्सप्रेस ट्रेन से रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थीं। इस घटना ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। अब 19 अगस्त 2025 को भोपाल की रानी कमलापति रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने उन्हें उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में नेपाल सीमा के पास सुरक्षित बरामद कर लिया है। यह खबर उनके परिवार और शुभचिंतकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। हालांकि, अर्चना के लापता होने के कारण और इस दौरान की घटनाओं के बारे में अभी कई सवाल अनसुलझे हैं, जिनके जवाब पुलिस की पूछताछ और अर्चना के बयानों से सामने आने की उम्मीद है।

अर्चना तिवारी 7 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन के अवसर पर अपने घर कटनी जाने के लिए इंदौर से नर्मदा एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 18233) में सवार हुई थीं। वह तृतीय श्रेणी वातानुकूलित (थर्ड एसी) कोच बी-3 की सीट नंबर 3 पर यात्रा कर रही थीं। उनके परिवार के अनुसार, उन्होंने रात 10:15 बजे भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद अपनी मां से आखिरी बार फोन पर बात की थी। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। जब वह कटनी स्टेशन पर नहीं पहुंचीं, तो परिजनों ने तुरंत कटनी जीआरपी थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

इस मामले को बाद में भोपाल जीआरपी को स्थानांतरित कर दिया गया, क्योंकि अर्चना की आखिरी लोकेशन रानी कमलापति स्टेशन के पास थी।पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तलाशी अभियान शुरू किया। भोपाल, इंदौर, कटनी, इटारसी और नर्मदापुरम जैसे इलाकों में जीआरपी और स्थानीय पुलिस ने व्यापक स्तर पर जांच की। पुलिस ने रानी कमलापति, इटारसी और कटनी स्टेशनों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज की जांच की। इसके अलावा, साइबर टीम ने अर्चना के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सोशल मीडिया हैंडल्स की भी पड़ताल की। मिडघाट, बघतावा के जंगलों और नर्मदा नदी के किनारे सर्च ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें ड्रोन, डॉग स्क्वायड और गोताखोरों की मदद ली गई। इस दौरान उमरिया स्टेशन पर अर्चना का बैग मिला, जिसमें राखी, बच्चों के लिए उपहार, कुछ कपड़े, कंघी और हाई कोर्ट के विजिटिंग कार्ड थे। लेकिन अर्चना का कोई सुराग नहीं मिला, जिससे मामला और रहस्यमय हो गया।

पुलिस जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग सामने आए। अर्चना की आखिरी लोकेशन भोपाल और नर्मदापुरम के बीच नर्मदा ब्रिज के पास मिली थी। कुछ सह-यात्रियों ने दावा किया कि अर्चना नर्मदापुरम स्टेशन तक ट्रेन में थीं, लेकिन इसके बाद वह अपनी सीट पर नहीं दिखीं। इटारसी स्टेशन पर उनके मोबाइल से इंटरनेट कनेक्शन जुड़ा था, जिससे संदेह हुआ कि शायद कोई इंटरनेट कॉल की गई हो। इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण खुलासा हुआ कि अर्चना ग्वालियर में तैनात एक पुलिस कांस्टेबल राम तोमर के संपर्क में थीं।

पुलिस ने राम तोमर को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने अर्चना के लिए इंदौर से ग्वालियर तक का टिकट बुक किया था। हालांकि, राम तोमर ने दावा किया कि अर्चना ने उस टिकट पर यात्रा नहीं की थी। इस कनेक्शन ने मामले को और जटिल बना दिया, और पुलिस ने इस दिशा में भी जांच तेज कर दी। 12 दिन की गहन तलाशी के बाद, 19 अगस्त 2025 को पुलिस को सूचना मिली कि अर्चना उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में नेपाल सीमा के पास हो सकती हैं। इस सूचना के आधार पर भोपाल जीआरपी की एक टीम तुरंत रवाना हुई और अर्चना को सुरक्षित बरामद कर लिया। खबरों के अनुसार, अर्चना ने अपनी मां को फोन करके अपनी लोकेशन की जानकारी दी थी, जिसके बाद पुलिस ने उनकी लोकेशन ट्रेस की। कुछ सूत्रों का दावा है कि अर्चना नेपाल की राजधानी काठमांडू में थीं, और पुलिस ने उन्हें फोन पर संपर्क करके भारत-नेपाल सीमा पर बुलवाया, जहां से उन्हें लखीमपुर खीरी में बरामद किया गया। अर्चना ने अपने परिजनों से फोन पर बात कर अपनी सुरक्षा की पुष्टि भी की।

रानी कमलापति जीआरपी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राहुल कुमार लोढ़ा ने इस सफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि उनकी टीम ने दिन-रात मेहनत करके अर्चना को खोज निकाला। उन्होंने कहा कि अर्चना को भोपाल लाया जा रहा है, जहां उनके बयान दर्ज किए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि अर्चना के बयानों के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वह इन 12 दिनों में कहां थीं, कैसे नेपाल सीमा तक पहुंचीं और उनकी गुमशुदगी के पीछे का कारण क्या था। पुलिस ने अभी तक यह नहीं बताया कि अर्चना किन परिस्थितियों में नेपाल सीमा पर मिलीं या वह वहां कैसे पहुंचीं। अर्चना के परिवार ने उनकी बरामदगी की खबर सुनकर राहत की सांस ली है। उनके परिजनों ने पहले मानव तस्करी की आशंका जताई थी और सीबीआई जांच की मांग की थी।

अर्चना के ताऊ बाबू प्रकाश तिवारी ने कहा था कि अर्चना एक पढ़ी-लिखी और समझदार युवती हैं, और उनका अचानक गायब होना संदिग्ध है। परिवार ने दिल्ली, मुंबई और नागपुर जैसे शहरों में भी तलाश की मांग की थी। कटनी के स्थानीय लोग और नेताओं ने भी अर्चना की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थनाएं की थीं। कटनी के यूथ कांग्रेस नेता दिव्यांशु ने अर्चना की सूचना देने वाले के लिए 51 हजार रुपये के इनाम की घोषणा की थी। इस मामले ने मध्य प्रदेश में रेलवे सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। एक युवती का चलती ट्रेन से रहस्यमय तरीके से गायब होना और फिर 12 दिन बाद नेपाल सीमा पर मिलना कई सवाल खड़े करता है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या अर्चना ने स्वेच्छा से यह कदम उठाया था या इसके पीछे कोई और कहानी है। अर्चना के ग्वालियर कनेक्शन और कांस्टेबल राम तोमर से उनके संबंधों की भी गहन जांच की जा रही है।

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