कौशांबी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग करने पर 97 छात्रों को किया गया सस्पेंड, सभी पर 5-5 हजार का जुर्माना भी लगाया। 

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने मेडिकल

Dec 11, 2025 - 11:47
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कौशांबी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग करने पर 97 छात्रों को किया गया सस्पेंड, सभी पर 5-5 हजार का जुर्माना भी लगाया। 
कौशांबी मेडिकल कॉलेज में रैगिंग करने पर 97 छात्रों को किया गया सस्पेंड, सभी पर 5-5 हजार का जुर्माना भी लगाया। 

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने मेडिकल शिक्षा संस्थान की अनुशासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रथम वर्ष के एमबीबीएस छात्रों की शिकायत पर कॉलेज प्रशासन ने त्वरित जांच शुरू की, और एंटी रैगिंग कमेटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर द्वितीय वर्ष के सभी 97 छात्रों को एक माह के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही प्रत्येक छात्र पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह कार्रवाई 30 नवंबर 2025 को एंटी रैगिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद हुई, जिसमें जूनियर छात्रों द्वारा सीनियर छात्रों के खिलाफ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे। कॉलेज प्रशासन ने इस कदम को अनुशासन कायम रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उठाया है, जो सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों और राज्य सरकार के आदेशों के अनुरूप है। निलंबित छात्रों के माता-पिता को समूह नोटिस के माध्यम से सूचित कर दिया गया है, और विस्तृत जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी, जिसमें वास्तविक रूप से शामिल छात्रों की पहचान की जाएगी।

रैगिंग की शिकायत एंटी रैगिंग पोर्टल पर 30 नवंबर 2025 को दर्ज की गई थी, जिसमें प्रथम वर्ष के छात्रों ने द्वितीय वर्ष के सीनियर छात्रों द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाया। शिकायत में बताया गया कि सीनियर छात्र जूनियरों को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर रहे थे, जिसमें क्लास में प्रॉक्सी अटेंडेंस, अपमानजनक कार्य और दबाव डालना शामिल था। कॉलेज प्रशासन ने शिकायत प्राप्त होते ही एंटी रैगिंग टीम का गठन किया, जो प्रारंभिक जांच के लिए जिम्मेदार थी। टीम ने दोनों पक्षों के छात्रों के बयान दर्ज किए, और घटना के साक्ष्यों का संग्रह किया। प्रारंभिक जांच में रैगिंग के आरोपों की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हरिओम ने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए। द्वितीय वर्ष के पूरे बैच के 97 छात्रों को निलंबित करने का निर्णय लिया गया, क्योंकि प्रारंभिक स्तर पर सभी को संभावित आरोपी माना गया। यह कदम कॉलेज परिसर में अनुशासन बनाए रखने के लिए उठाया गया, ताकि जूनियर छात्र सुरक्षित महसूस करें। निलंबन की अवधि एक माह की है, और इस दौरान छात्र कक्षाओं, हॉस्टल और अन्य कॉलेज गतिविधियों से वंचित रहेंगे। जुर्माना राशि कॉलेज के एंटी रैगिंग फंड में जमा की जाएगी, जो भविष्य की रोकथाम गतिविधियों के लिए उपयोग होगी। विस्तृत जांच के लिए एक अलग समिति का गठन किया गया है, जिसकी रिपोर्ट एक से दो दिनों में प्रस्तुत होने की उम्मीद है। यह समिति घटना के प्रत्यक्षदर्शियों, प्रभावित छात्रों और संभावित साक्ष्यों की गहन पड़ताल करेगी, ताकि वास्तविक रूप से शामिल छात्रों की पहचान हो सके। प्रारंभिक कार्रवाई पूरे बैच पर इसलिए की गई, क्योंकि रैगिंग के मामले अक्सर समूहिक होते हैं, और सभी सीनियर छात्रों की भूमिका की जांच प्रारंभिक चरण में कठिन थी। समिति के सदस्यों में कॉलेज के वरिष्ठ फैकल्टी, छात्र प्रतिनिधि और बाहरी विशेषज्ञ शामिल हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के रैगिंग रोकथाम दिशानिर्देशों का पालन करेंगे। जांच में यह भी देखा जाएगा कि रैगिंग की घटना कब और कहां हुई, जैसे हॉस्टल, क्लासरूम या परिसर के अन्य हिस्सों में। प्रथम वर्ष के छात्रों ने शिकायत में बताया कि सीनियर छात्रों ने उन्हें क्लास में प्रॉक्सी के रूप में उपस्थित होने के लिए मजबूर किया, जो मेडिकल शिक्षा की नियमावली का उल्लंघन है। इस तरह की प्रथाएं न केवल जूनियर छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि उनकी पढ़ाई को भी बाधित करती हैं। कॉलेज ने प्रभावित छात्रों को काउंसलिंग सत्र प्रदान करने का भी प्रावधान किया है, ताकि वे मानसिक तनाव से उबर सकें।

कॉलेज प्रशासन ने माता-पिता को सूचित करने के लिए एक समूह नोटिस जारी किया, जिसमें निलंबन और जुर्माने का विवरण दिया गया। नोटिस में स्पष्ट किया गया कि यह कार्रवाई अनुशासन बनाए रखने के लिए है, और अंतिम रिपोर्ट के बाद यदि कोई छात्र निर्दोष पाया जाता है, तो उसे बहाल किया जा सकता है। द्वितीय वर्ष के छात्रों के लिए कक्षाएं अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई हैं, लेकिन गैर-शामिल छात्रों को जल्द ही पुनः शुरू करने की अनुमति दी जाएगी। यह निर्णय कॉलेज की एंटी रैगिंग पॉलिसी का हिस्सा है, जो राज्य सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशानिर्देशों पर आधारित है। रैगिंग रोकथाम अधिनियम 2009 के तहत ऐसी घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें निलंबन, जुर्माना, प्रवेश रद्दीकरण या आपराधिक मुकदमा शामिल है। कॉलेज ने परिसर में सीसीटीवी फुटेज की जांच भी शुरू कर दी है, जो घटना के समय के रिकॉर्ड प्रदान कर सकती है। प्राचार्य डॉ. हरिओम ने कहा कि कॉलेज रैगिंग मुक्त परिसर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, और भविष्य में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह घटना मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की व्यापक समस्या को दर्शाती है, जहां सीनियर छात्र जूनियरों को अपनी श्रेष्ठता दिखाने के लिए उत्पीड़न करते हैं। कौशांबी मेडिकल कॉलेज, जो उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन एक स्वशासी संस्थान है, में एमबीबीएस कोर्स के अलावा अन्य मेडिकल कोर्स भी संचालित होते हैं। कॉलेज का परिसर हॉस्टल, लेक्चर हॉल और लाइब्रेरी से सुसज्जित है, लेकिन रैगिंग की घटनाएं यहां भी आम हो गई हैं। प्रथम वर्ष के छात्रों ने शिकायत में उल्लेख किया कि सीनियर छात्रों ने उन्हें अपमानजनक नामों से पुकारा, शारीरिक व्यायाम करवाया और क्लास वर्क में सहायता के नाम पर दबाव डाला। इन कार्यों से जूनियर छात्रों में डर का माहौल बन गया, जो उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा था। एंटी रैगिंग टीम ने जांच के दौरान 50 से अधिक बयान दर्ज किए, जिसमें जूनियर छात्रों ने एकजुट होकर आरोप दोहराए। टीम ने पाया कि रैगिंग हॉस्टल और क्लासरूम दोनों स्थानों पर हो रही थी, जो कॉलेज की निगरानी व्यवस्था में खामी दर्शाता है।

कार्रवाई के बाद कॉलेज परिसर में तनाव कम हुआ है, और जूनियर छात्रों को राहत मिली है। प्रशासन ने सभी छात्रों के लिए एक विशेष बैठक आयोजित की, जिसमें रैगिंग के खतरों और कानूनी परिणामों पर चर्चा की गई। बैठक में सुप्रीम कोर्ट के रैगिंग रोकथाम मामले का जिक्र किया गया, जहां कहा गया है कि रैगिंग एक अपराध है और संस्थानों को जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनानी चाहिए। कॉलेज ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जहां छात्र शिकायत दर्ज करा सकते हैं। निलंबित छात्रों को कॉलेज से बाहर रहने का निर्देश दिया गया है, और उनके प्रवेश प्रमाणपत्रों पर नोटिस चिपकाया जाएगा। जुर्माना राशि एकत्र करने के लिए बैंक डिटेल्स प्रदान की गई हैं, और भुगतान न करने पर अतिरिक्त कार्रवाई का प्रावधान है। विस्तृत समिति की रिपोर्ट में यदि अधिक गंभीर आरोप पाए जाते हैं, तो छात्रों के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज की जा सकती है। कौशांबी जिले में स्थित यह मेडिकल कॉलेज 2016 में स्थापित हुआ था, और इसमें 100 एमबीबीएस सीटें हैं। रैगिंग की यह घटना कॉलेज के इतिहास में पहली बड़ी कार्रवाई है, जो प्रशासन की संवेदनशीलता दर्शाती है। प्रथम वर्ष के छात्रों की संख्या लगभग 100 है, और वे विभिन्न जिलों से आते हैं। शिकायत दर्ज करने के बाद कॉलेज ने तुरंत कार्रवाई की, जो राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मानकों के अनुरूप है। आयोग ने सभी मेडिकल कॉलेजों को रैगिंग मुक्त बनाने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें एंटी रैगिंग सेल का अनिवार्य गठन शामिल है। इस घटना से कॉलेज को अपनी निगरानी प्रणाली मजबूत करने की आवश्यकता है, जैसे अधिक वार्डन नियुक्ति और नियमित चेक। निलंबन अवधि के दौरान छात्रों को ऑनलाइन लेक्चर्स की अनुमति नहीं दी गई है, ताकि अनुशासन कायम रहे। माता-पिता ने नोटिस प्राप्त करने के बाद कॉलेज से संपर्क किया, और स्पष्टीकरण मांगा। प्रशासन ने उन्हें जांच प्रक्रिया की जानकारी दी, और आश्वासन दिया कि निर्दोष छात्रों को राहत मिलेगी।

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