दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: तुर्की के हैंडलर 'UKasa' से उमर नबी से निकला Strong कनेक्शन, सेशन ऐप पर साजिश की गहन जांच। 

दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार ब्लास्ट की जांच में एक नया मोड़ आ गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और खुफिया एजेंसियों

Nov 13, 2025 - 12:29
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दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: तुर्की के हैंडलर 'UKasa' से उमर नबी से निकला Strong कनेक्शन, सेशन ऐप पर साजिश की गहन जांच। 
दिल्ली रेड फोर्ट ब्लास्ट: तुर्की के हैंडलर 'UKasa' से उमर नबी से निकला Strong कनेक्शन, सेशन ऐप पर साजिश की गहन जांच। 

दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार ब्लास्ट की जांच में एक नया मोड़ आ गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया है कि मुख्य आरोपी डॉक्टर उमर उन नबी और फरीदाबाद के आतंकी मॉड्यूल के अन्य सदस्य एक रहस्यमयी हैंडलर के संपर्क में थे। इस हैंडलर का कोडनेम 'UKasa' बताया जा रहा है, जो तुर्की की राजधानी अंकारा से संचालित हो रहा था। संदिग्धों ने सेशन ऐप नामक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए हैंडलर से बातचीत की। यह ऐप अपनी उच्च गोपनीयता के लिए जाना जाता है, जो आतंकियों के लिए संचार का सुरक्षित माध्यम बन जाता है। जांच एजेंसियां अब इस ऐप पर हुई बातचीत की डिकोडिंग में जुटी हैं, ताकि साजिश की पूरी परतें खुल सकें।

ब्लास्ट की घटना को याद करें तो 10 नवंबर की शाम करीब 6 बजकर 50 मिनट पर चांदनी चौक के पास रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के निकट एक सफेद ह्यूंडई आई20 कार में जोरदार धमाका हुआ। इस विस्फोट में 12 लोगों की मौत हो गई और 20 से अधिक घायल हुए। धमाके की तीव्रता इतनी थी कि आसपास की कई गाड़ियां जल गईं और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जांच में कार में अमोनियम नाइट्रेट और आरडीएक्स के मिश्रण से बने लगभग तीन किलोग्राम विस्फोटक होने का पता चला। दिल्ली पुलिस, एनएसजी और एनआईए की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। घायलों को लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों में स्थानीय दुकानदार, राहगीर और एक बस कंडक्टर शामिल थे। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि कार चालक ने धमाके से तीन घंटे पहले पास के पार्किंग में इंतजार किया था।

जांच आगे बढ़ने पर डॉक्टर उमर उन नबी पर शक गहरा गया। 36 वर्षीय उमर पुलवामा के कोइल गांव के रहने वाले थे। उन्होंने श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमडी की डिग्री ली थी और हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल साइंस एंड रिसर्च सेंटर में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर थे। 29 अक्टूबर को उन्होंने यह कार खरीदी थी, जिसका रजिस्ट्रेशन फर्जी पते पर था। डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई कि धमाके के समय कार में मौजूद शव उमर का ही था। उनके मां और भाई के सैंपल से 100 प्रतिशत मैच मिला। एम्स की फॉरेंसिक लैब में ऑटोसोमल शॉर्ट टेंडर रीपीट्स विधि से यह जांच की गई। उमर के फोन और डायरी से पता चला कि वे कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित थे। वे दिल्ली के पुराने मस्जिदों में जाते और परिवार को 'जरूरी काम' बताते।

अब जांच का फोकस 'UKasa' पर है। सूत्रों के अनुसार, यह कोडनेम हैंडलर की असली पहचान छिपाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। खुफिया इनपुट्स से लोकेशन अंकारा की पुष्टि हुई। हैंडलर ने उमर और मॉड्यूल को निर्देश दिए, जिसमें लक्ष्यों का चयन, फंडिंग और रेडिकलाइजेशन शामिल था। सेशन ऐप पर हुई चैट्स से संकेत मिले कि हैंडलर ने भारत में फैलने का आदेश दिया था। यह ऐप ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है, जो यूजर्स को बिना फोन नंबर के मैसेजिंग की सुविधा देता है। एजेंसियां अब साइबर फॉरेंसिक टूल्स से डेटा रिकवर कर रही हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया कि 'UKasa' ने उमर को तुर्की यात्रा के बाद लक्ष्य चुनने में मदद की। मार्च 2022 में उमर और अन्य संदिग्ध अंकारा गए थे, जहां जैश हैंडलर्स ने उनका ब्रेनवॉश किया। वहां वे रेडिकल मीटिंग्स में शामिल हुए और साजिश की रूपरेखा बनी।

फरीदाबाद मॉड्यूल 'व्हाइट कॉलर' टेरर का उदाहरण था। इसमें पढ़े-लिखे डॉक्टर शामिल थे। उमर के अलावा डॉक्टर मुजम्मिल शकील गनाई और डॉक्टर आदिल राथर गिरफ्तार हुए। मुजम्मिल अल-फलाह से ही थे और मुख्य लिंक माने जाते हैं। डॉक्टर शाहीना शाहीद को जैश की महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' का भारत प्रमुख बनाया गया था। वे रिक्रूटमेंट और फंडिंग संभालती थीं। दक्षिण कश्मीर के मौलवी इरफान अहमद वागाह ने इन डॉक्टरों को कट्टर बनाया। जांच में टेलीग्राम ग्रुप्स 'उमर बिन खत्ताब' और 'फरजंदान-ए-दारुल उलूम' सामने आए, जो पाकिस्तान के जैश ऑपरेटिव चला रहा था। इन ग्रुप्स से रेडिकलाइजेशन शुरू हुआ। उमर बिन खत्ताब पाकिस्तान से फंडिंग भेजता था।

साजिश बड़ी थी। मूल प्लान अगस्त 2025 में था, लेकिन देरी से 25 नवंबर को अयोध्या राम मंदिर पर भगवा ध्वज फहराने के दिन हमला तय हुआ। 6 दिसंबर को बाबरी विध्वंस की बरसी पर दिल्ली-मुंबई में सीरियल ब्लास्ट प्लान थे। 26/11 मुंबई स्टाइल में वाहन-जनित आईईडी और राइफल अटैक की तैयारी थी। मॉड्यूल ने 200 आईईडी तैयार किए थे, दिल्ली, फरीदाबाद, गुरुग्राम, अयोध्या जैसे स्थानों पर। 9 नवंबर को फरीदाबाद में 3000 किलोग्राम विस्फोटक बरामद होने से घबराहट हुई। उमर ने पैनिक में रेड फोर्ट पर हमला कर दिया। अन्य वाहन जैसे फोर्ड ईकोस्पोर्ट (डीएल 10 सीके 0458) बरामद हो चुका है, जबकि मारुति ब्रेजा की तलाश जारी है। कानपुर के मेडिकल छात्र को भी हिरासत में लिया गया। लखनऊ से मोहम्मद आरिफ मीर को डॉक्टर शाहीना से मिलने के संदेह में पकड़ा गया।

परिवार और स्थानीय प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। पुलवामा में उमर के चाचा ने कहा कि वे शांत थे, लेकिन हाल में बदलाव नजर आया। मां शमीमा बेगम सदमे में हैं। अल-फलाह यूनिवर्सिटी से डायरी बरामद हुईं, जो दो साल की प्लानिंग दिखाती हैं। जांच में जर्मनी और तुर्की से फंडिंग का पता चला, जो मदरसों के नाम पर आया। यूपी एटीएस ने ग्रेटर नोएडा से फरहान नबी सिद्दीकी को पकड़ा, जो हेट लिटरेचर फैला रहा था।

सरकार सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूटान से होम मिनिस्टर अमित शाह को फोन कर अपडेट लिया। कैबिनेट ने इसे आतंकी हमला घोषित किया। एनआईए को केस सौंपा गया। शाह ने एजेंसियों को सभी अपराधियों को पकड़ने का निर्देश दिया। तुर्की दूतावास ने इनकार किया, लेकिन भारत ने डिप्लोमेटिक चैनलों से सहयोग मांगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने समर्थन जताया। सुरक्षा बढ़ाई गई, खासकर धार्मिक स्थलों पर। सिंगापुर के विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन ने एकजुटता दिखाई।

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