'Mashooqua' गाने पर मचे घमासान के बीच संगीतकार प्रीतम का फूटा गुस्सा, ट्रोलर्स को दिया करारा जवाब
भारतीय संगीत जगत के मशहूर और बेहद लोकप्रिय संगीतकार प्रीतम चक्रवर्ती एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह
- विवादों को कड़ाके की धूप में सुखाने उतरे प्रीतम, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस के बीच कहा- 'तुम लोग तो मेरे मुफ्त के पीआर हो'
- संगीत की मौलिकता और चोरी के आरोपों पर खुलकर बोले प्रीतम चक्रवर्ती, रचनात्मक स्वतंत्रता और डिजिटल ट्रोलिंग पर कही बड़ी बात
भारतीय संगीत जगत के मशहूर और बेहद लोकप्रिय संगीतकार प्रीतम चक्रवर्ती एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई नया ब्लॉकबस्टर गाना नहीं, बल्कि उनके एक हालिया ट्रैक 'Mashooqua' को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ा एक बहुत बड़ा विवाद है। इस गाने के रिलीज होने के तुरंत बाद ही इंटरनेट पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं और देखते ही देखते यह गाना विवादों के केंद्र में आ गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर संगीत प्रेमियों और कई आलोचकों ने इस गाने की धुन को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाने शुरू कर दिए, जिसके बाद इस पूरे मामले ने एक बड़ा तूल पकड़ लिया। आमतौर पर शांत रहने वाले और विवादों से दूरी बनाकर रखने वाले प्रीतम इस बार चुप नहीं बैठे और उन्होंने इन तमाम आरोपों पर बेहद तीखी और बेबाक प्रतिक्रिया दी है। संगीतकार ने अपने खिलाफ हो रही इस लगातार आलोचना और ट्रोलिंग को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे एक नया मोड़ दे दिया है, जिसने अब संगीत उद्योग के भीतर और बाहर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब 'Mashooqua' गाना डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज हुआ और कुछ ही घंटों के भीतर लोगों ने इसकी धुन की तुलना कुछ पुराने अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय गानों से करनी शुरू कर दी। देखते ही देखते डिजिटल स्पेस में इस बात को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गई कि क्या प्रीतम ने एक बार फिर किसी पुराने गाने की धुन को कॉपी किया है या यह महज एक इत्तेफाक है। इन आरोपों ने धीरे-धीरे एक बड़े विवाद का रूप ले लिया, जिससे गाने की लोकप्रियता पर तो कोई खास असर नहीं पड़ा, लेकिन संगीतकार की साख पर सवाल जरूर खड़े होने लगे। इस तरह की लगातार हो रही आलोचनाओं और नकारात्मक टिप्पणियों से तंग आकर प्रीतम ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल का सहारा लिया और ट्रोल करने वालों को सीधे आड़े हाथों लिया। उन्होंने बहुत ही कड़े और थोड़े मजाकिया लहजे में आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि यह तमाम लोग जो दिन-रात उनके काम की कमियां निकालने में लगे हैं, असल में उनके मुफ्त के पीआर (पब्लिक रिलेशंस) एजेंट की तरह काम कर रहे हैं।
डिजिटल ट्रोलिंग
डिजिटल युग में किसी भी रचनात्मक काम की समीक्षा करना बेहद आसान हो गया है, लेकिन कभी-कभी यह समीक्षा रचनात्मक आलोचना की सीमा को पार करके व्यक्तिगत हमले और बेवजह की ट्रोलिंग में बदल जाती है। प्रीतम का यह हालिया गुस्सा इसी डिजिटल संस्कृति के खिलाफ एक कड़ा विरोध है।
प्रीतम ने अपने बयान को और विस्तार देते हुए यह समझाने का प्रयास किया कि सोशल मीडिया पर जो लोग किसी भी गाने के रिलीज होते ही उस पर चोरी का ठप्पा लगाने के लिए तैयार बैठे रहते हैं, वे असल में अनजाने में ही सही, लेकिन उस गाने को और ज्यादा बढ़ावा दे रहे होते हैं। संगीतकार का मानना है कि इस तरह के विवादों और नकारात्मक चर्चाओं की वजह से उन लोगों में भी गाने को सुनने की उत्सुकता जाग जाती है, जिन्होंने शायद सामान्य परिस्थितियों में उस गाने पर ध्यान भी न दिया होता। इस तरह यह पूरा नकारात्मक अभियान अंततः गाने के व्यूज और उसकी रीच को बढ़ाने में ही मदद करता है, जिससे गाने को बनाने वाली टीम और संगीतकार को ही फायदा होता है। प्रीतम ने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें इस तरह की ट्रोलिंग से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वे जानते हैं कि उनका संगीत सच्चा है और वे पिछले कई दशकों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं, जो बिना किसी ठोस वजह के मुमकिन नहीं है।
संगीत उद्योग में धुनें मैच होने या किसी पुराने संगीत से प्रेरित होने की घटनाएं कोई नई नहीं हैं, और प्रीतम का करियर भी समय-समय पर इस तरह के विवादों से घिरा रहा है। हालांकि, इस बार संगीतकार ने जिस तरह से पलटवार किया है, उसने यह साफ कर दिया है कि वे अब इस तरह के बिना सिर-पैर के आरोपों को चुपचाप सहन करने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि संगीत की दुनिया में केवल सात सुर होते हैं और करोड़ों गानों के इस दौर में कभी-कभी दो गानों की कुछ धुनें या नोट्स आपस में मिल जाना एक बेहद स्वाभाविक और तकनीकी प्रक्रिया है। हर बार किसी समानता को चोरी का नाम दे देना न केवल एक संगीतकार की कड़ी मेहनत का अपमान है, बल्कि यह संगीत की समझ न होने का भी प्रमाण है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे हमेशा से ही नए प्रयोगों और प्रेरणाओं का स्वागत करते हैं, लेकिन बिना किसी तकनीकी समझ के सीधे तौर पर उन पर कीचड़ उछालना पूरी तरह से गलत है।
इस विवाद ने संगीत उद्योग के भीतर रचनात्मक स्वतंत्रता और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मिलने वाली तत्काल प्रतिक्रिया के प्रभाव को लेकर एक बेहद गंभीर चर्चा को जन्म दे दिया है। आज के समय में जब कोई भी गाना रिलीज होता है, तो उसे दुनिया भर के करोड़ों गानों के डेटाबेस से मिलाकर देखने वाले सॉफ्टवेयर और उत्साही लोग तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। संगीतकारों का एक बड़ा वर्ग इस बात से चिंतित रहता है कि इस तरह की तुरंत मिलने वाली नकारात्मक प्रतिक्रियाएं उनके काम की मौलिकता और उनकी मानसिक शांति को प्रभावित करती हैं। प्रीतम ने इस पूरी व्यवस्था पर तंज कसते हुए यह समझाने की कोशिश की है कि रचनात्मकता को इस तरह के संकीर्ण दायरों में नहीं बांधा जा सकता और न ही हर गाने को एक ही तराजू पर तोला जा सकता है। उनके इस बेबाक बयान ने उन तमाम रचनात्मक लोगों को एक नई हिम्मत दी है जो अक्सर इंटरनेट पर होने वाली इस तरह की अनियंत्रित और बेवजह की ट्रोलिंग का शिकार बनते रहते हैं।
यदि प्रीतम के संगीत सफर पर नजर डाली जाए, तो उन्होंने भारतीय फिल्म जगत को पिछले बीस से अधिक वर्षों में एक से बढ़कर एक सुपरहिट और कालजयी गाने दिए हैं, जो आज भी लोगों की जुबान पर चढ़े हुए हैं। उनके गानों में एक खास तरह की ऊर्जा, मेलोडी और भावनाओं का ऐसा मिश्रण होता है जो सीधे सुनने वाले के दिल को छू जाता है। 'Mashooqua' गाने को लेकर हुआ यह ताजा विवाद भी उनकी इसी बड़ी लोकप्रियता का एक हिस्सा माना जा सकता है, क्योंकि जब कोई बड़ा कलाकार कुछ नया पेश करता है, तो उम्मीदें और नजरें दोनों ही बहुत ऊंची होती हैं। प्रीतम के प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर संगीतकार का खुलकर समर्थन किया है और उनका कहना है कि चाहे कोई कितनी भी आलोचना कर ले, प्रीतम के संगीत का जादू कभी कम नहीं हो सकता। इस समर्थन ने संगीतकार को और अधिक मजबूती दी है, जिससे वे भविष्य में भी बिना किसी डर और संकोच के अपना काम जारी रखने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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