अमेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) को लेकर मचा
अमेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) को लेकर मचा
- अहमदाबाद में साइबर क्राइम की बड़ी कार्रवाई, री-नीट परीक्षा के नाम पर चल रहे फर्जी टेलीग्राम चैनल का भंडाफोड़
'राघव सर' के नाम से बनाया वर्चुअल जाल, फूलप्रूफ सिस्टम का दावा कर परीक्षार्थियों से वसूले 5.74 करोड़ रुपये
अमेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) को लेकर मचा देशव्यापी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले ही मुख्य परीक्षा में कथित पेपर लीक और विसंगतियों के चलते इसे दोबारा आयोजित करने (री-नीट) का फैसला लिया जा चुका है, जिससे लाखों छात्र और उनके अभिभावक मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। इस अनिश्चितता के माहौल का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों और जालसाजों ने अपना नया गोरखधंधा शुरू कर दिया है। गुजरात की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां री-नीट परीक्षा के फर्जी प्रश्नपत्र बेचने के नाम पर करोड़ों रुपये की ऑनलाइन धोखाधड़ी की गई है। अज्ञात साइबर ठगों द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम का सहारा लेकर परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने का दावा किया जा रहा है और डरे हुए तथा उत्सुक छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। अहमदाबाद साइबर क्राइम सेल में इस धोखाधड़ी को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। हमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच को मिली शिकायत के अनुसार, इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए टेलीग्राम पर एक विशेष चैनल सक्रिय किया गया था। इस चैनल का संचालन करने वाले मुख्य सरगना ने खुद को 'राघव सर' के रूप में पेश किया था, ताकि छात्रों के बीच एक शिक्षक की छवि बनाकर उनका विश्वास आसानी से जीता जा सके। इस चैनल पर लगातार यह भ्रामक दावे किए जा रहे थे कि उनके पास आगामी री-नीट परीक्षा का शत-प्रतिशत असली और सटीक प्रश्नपत्र उपलब्ध है। जो भी छात्र परीक्षा में निश्चित सफलता और मनचाहा मेडिकल कॉलेज चाहते हैं, वे उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं। इस झांसे में आकर देश के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में मेडिकल एस्पिरेंट्स और उनके चिंतित माता-पिता इस चैनल से जुड़ते चले गए और ठगों के बुने जाल में फंस गए।
साइबर ठगों की कार्यप्रणाली बेहद शातिर और संगठित प्रकार की थी, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी हैरत में डाल दिया है। चैनल के एडमिन 'राघव सर' और उसके साथियों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बाकायदा यह प्रचारित किया कि उनके पास जो प्रश्नपत्र मौजूद है, उसे परीक्षा कराने वाली एजेंसी के बेहद सुरक्षित कोर सिस्टम से सीधे निकाला गया है। इस तथाकथित 'फूल प्रूफ' सिस्टम से लीक हुए पेपर की कीमत प्रति छात्र 10 लाख रुपये तय की गई थी। इस मोटी रकम को सीधे बैंक खातों में न मंगाकर विभिन्न डिजिटल वॉलेट और अज्ञात खातों के माध्यम से टुकड़ों में लिया जा रहा था। शुरुआती तकनीकी जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद डराने वाले हैं; इस गिरोह ने अब तक भोले-भाले छात्रों और उनके अभिभावकों से कुल 5.74 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की अवैध वसूली कर ली है। सोशल मीडिया या मैसेजिंग ऐप्स पर किसी भी प्रतियोगी परीक्षा के प्रश्नपत्र एडवांस में उपलब्ध होने का दावा पूरी तरह से धोखाधड़ी है। छात्र और अभिभावक ऐसे किसी भी फर्जी दावे के झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई और बच्चों का भविष्य दांव पर न लगाएं।
जैसे-जैसे री-नीट 2026 की परीक्षा की तारीखें नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे इस टेलीग्राम चैनल पर छात्रों का दबाव और भुगतान करने की दर भी बढ़ती चली गई। ठगों ने छात्रों के मन में परीक्षा में असफल होने का डर पैदा किया और दावा किया कि यदि वे यह रकम नहीं देंगे, तो दूसरे छात्र बाजी मार ले जाएंगे। इस डिजिटल दबाव के कारण कई अभिभावकों ने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी और कुछ ने कर्ज लेकर इन साइबर अपराधियों के खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसे ट्रांसफर होने के बाद जब छात्रों को कोई वैध सामग्री नहीं मिली या उन्हें ग्रुप से ब्लॉक किया जाने लगा, तब जाकर इस बड़े वित्तीय घोटाले का अहसास पीड़ितों को हुआ। इसके बाद अहमदाबाद के कुछ स्थानीय पीड़ितों ने हिम्मत दिखाकर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन का रुख किया और पूरे मामले का ब्योरा अधिकारियों के सामने रखा।
अहमदाबाद साइबर पुलिस ने इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस की एक विशेष टीम अब उस टेलीग्राम चैनल के आईपी एड्रेस, वर्चुअल फोन नंबर्स और उन बैंक खातों के वित्तीय लेन-देन (मनी ट्रेल) को ट्रैक करने में जुट गई है, जिनका इस्तेमाल इस 5.74 करोड़ रुपये की राशि को खपाने के लिए किया गया था। प्राथमिक जांच से यह संकेत मिल रहे हैं कि इस गिरोह के तार देश के कई राज्यों से जुड़े हो सकते हैं और 'राघव सर' का नाम पूरी तरह से एक काल्पनिक और मुखौटा पहचान हो सकता है। पुलिस ने टेलीग्राम पैरेंट कंपनी को भी आधिकारिक नोटिस भेजकर इस विशिष्ट चैनल के एडमिन और क्रिएटर के मूल डेटा और चैट लॉग्स साझा करने को कहा है ताकि वास्तविक अपराधियों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।
इस साइबर फ्रॉड ने परीक्षा प्रणाली के दोबारा आयोजन के बीच छात्रों की मानसिक स्थिति और उनकी लाचारी को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। पहली परीक्षा के रद्द होने से पहले ही छात्र गहरे असंतोष और तनाव से जूझ रहे थे, और अब दोबारा परीक्षा की तैयारी के दबाव ने उन्हें इस प्रकार के शॉर्टकट और धोखाधड़ी के प्रति अधिक संवेदनशील बना दिया है। राष्ट्रीय स्तर की इस परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां और परीक्षा नियामक संस्थाएं लगातार कड़े कदम उठा रही हैं, लेकिन इसके समानांतर चल रहा यह साइबर अपराध का समानांतर नेटवर्क प्रशासन के लिए एक नई और सिरदर्द चुनौती बनकर उभरा है। इस घटना के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली गतिविधियों की मॉनिटरिंग को और अधिक सख्त करने की मांग उठने लगी है।
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