झांसी में आधी रात को टला बड़ा रेल जैसा सड़क हादसा, सवारियों से भरी शताब्दी बस बनी आग का गोला।
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के केंद्र यानी झांसी जिले से देर रात एक बेहद ही भयावह और रूहकँपा देने वाली घटना सामने आई है,
- चालक की सूझबूझ से बची पचास से अधिक यात्रियों की अनमोल जिंदगी, जलकर खाक हुआ लाखों का कीमती सामान
- लखनऊ से रतलाम जा रही बस में शॉर्ट सर्किट के बाद फटा डीजल पाइप, दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत से बुझाई लपटें
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के केंद्र यानी झांसी जिले से देर रात एक बेहद ही भयावह और रूहकँपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सफर कर रहे दर्जनों यात्रियों की सांसें अटका दीं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से मध्य प्रदेश के औद्योगिक शहर रतलाम की ओर जा रही यात्रियों से खचाखच भरी एक निजी शताब्दी ट्रैवलर बस में झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक भीषण आग लग गई। आधी रात के सन्नाटे में जब अधिकांश सवारियां गहरी नींद में सो रही थीं, तभी अचानक बस के अगले हिस्से से धुआं और आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते पूरी बस आग की गगनचुंबी लपटों की चपेट में आ गई, जिससे राजमार्ग पर दूर-दूर तक केवल काला धुआं और चीख-पुकार का मंजर दिखाई देने लगा।
इस भयानक घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि बस के चालक ने समय रहते खतरे को भांप लिया और अपनी अद्वितीय सतर्कता व सूझबूझ का परिचय दिया। जैसे ही चालक को केबिन के भीतर कुछ जलने की गंध आई और डैशबोर्ड के पास से धुआं निकलता दिखा, उसने बिना एक पल गंवाए बस को तुरंत सड़क के किनारे खड़ा कर दिया। बस रुकते ही चालक और परिचालक ने तुरंत चिल्लाकर सो रहे यात्रियों को जगाया और आपातकालीन द्वारों सहित सभी दरवाजों को खोलकर सवारियों को तेजी से नीचे उतरने के निर्देश दिए। चालक की इस त्वरित प्रतिक्रिया के कारण बस के भीतर मौजूद पचास से अधिक यात्री समय रहते सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे, जिससे एक बहुत बड़ा और दर्दनाक जानलेवा हादसा होते-होते टल गया।
हालांकि, जान बचाने की इस आपाधापी और मची भगदड़ के बीच यात्रियों को अपना सामान वाहन के भीतर से निकालने का जरा सा भी अवसर नहीं मिल सका। जैसे ही अंतिम यात्री बस से नीचे उतरा, उसके कुछ ही सेकंड के भीतर पूरी बस एक धधकती हुई भट्टी में तब्दील हो गई। यात्रियों की आंखों के सामने ही उनके कीमती दस्तावेज, कपड़े, आभूषण, नकदी और अन्य आवश्यक सामान जलकर पूरी तरह से राख हो गए। कई यात्री सड़क किनारे खड़े होकर अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई और कीमती सामान को स्वाहा होते देख फफक-फफक कर रोने लगे, लेकिन वे इस बात के लिए ईश्वर का धन्यवाद भी कर रहे थे कि उनकी और उनके बच्चों की जान सुरक्षित बच गई।
वाहन के चालक द्वारा बाद में पुलिस प्रशासन को दिए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, इस भीषण अग्निकांड की शुरुआत बस के इंजन रूम में हुए एक तकनीकी शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई थी। इंजन के भीतर बिजली की तारों में हुए घर्षण के कारण पहले मामूली सी चिंगारी उठी, जिसने तुरंत ही पास में स्थित मुख्य डीजल पाइपलाइन को अपनी चपेट में ले लिया। आग की गर्मी के कारण डीजल का पाइप अचानक तेज धमाके के साथ फट गया, जिससे अत्यधिक ज्वलनशील ईंधन पूरी बस के निचले हिस्से में फैल गया। डीजल के संपर्क में आते ही आग ने इतना उग्र रूप धारण कर लिया कि वह कुछ ही मिनटों में खिड़कियों के रास्ते बस के भीतर की सीटों और छतों तक पहुंच गई।
राजमार्ग पर धू-धू कर जलती बस को देखकर वहां से गुजरने वाले अन्य वाहन चालकों ने तुरंत अपने वाहन रोक दिए और स्थानीय पुलिस व अग्निशमन विभाग को इस आपातकालीन स्थिति की सूचना दी। सूचना मिलते ही झांसी के स्थानीय पुलिस थानों की गाड़ियां और दमकल विभाग की कई गाड़ियां पानी के टैंकरों के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गईं। अग्निशमन दल के कर्मचारियों ने बिना वक्त गंवाए चारों तरफ से बस पर पानी और रासायनिक झाग (फोम) की बौछारें डालनी शुरू कर दीं। बस में लगी आग इतनी विकराल थी कि उस पर पूरी तरह से काबू पाने और लपटों को शांत करने में दमकल कर्मियों को करीब दो घंटे से अधिक का समय और कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
इस दर्दनाक हादसे के कारण झांसी-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों तरफ का यातायात पूरी तरह से ठप हो गया, जिससे सड़क पर कई किलोमीटर लंबा वाहनों का जाम लग गया। पुलिस कर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए रूट को कुछ समय के लिए डायवर्ट किया और आग बुझने के बाद क्रेन की मदद से जली हुई बस के लोहे के ढांचे को सड़क के बीच से हटाकर किनारे किया। इसके बाद ही राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था को दोबारा से सुचारू रूप से बहाल किया जा सका। जिला प्रशासन ने मौके पर ही फंसे हुए यात्रियों के लिए पीने के पानी, भोजन और उन्हें उनके गंतव्य रतलाम तक भेजने के लिए वैकल्पिक बसों की व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित की।
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