पंजाब के मोगा में सुरक्षा व्यवस्था को ध्‍वस्त कर सरकारी नशा मुक्ति केंद्र से फरार हुए 30 मरीज- मुख्य द्वार का ताला तोड़कर दिया घटना को अंजाम।

पंजाब के मोगा जिले से एक बेहद ही हैरान करने वाला और प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला सामने आया

May 21, 2026 - 14:24
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पंजाब के मोगा में सुरक्षा व्यवस्था को ध्‍वस्त कर सरकारी नशा मुक्ति केंद्र से फरार हुए 30 मरीज- मुख्य द्वार का ताला तोड़कर दिया घटना को अंजाम।
पंजाब के मोगा में सुरक्षा व्यवस्था को ध्‍वस्त कर सरकारी नशा मुक्ति केंद्र से फरार हुए 30 मरीज- मुख्य द्वार का ताला तोड़कर दिया घटना को अंजाम।
  • नशा मुक्ति और पुनर्वास प्रणाली पर उठे गंभीर सवाल- मोगा के सिविल अस्पताल परिसर में मची अफरा-तफरी, प्रशासनिक मुस्तैदी पर लगी बड़ी चपत
  • पंजाब में नशा विरोधी अभियान के बीच बड़ी चूक- पुलिस ने नाकेबंदी कर शुरू किया सर्च ऑपरेशन, फरार मरीजों की तलाश में जुटी कई टीमें

पंजाब के मोगा जिले से एक बेहद ही हैरान करने वाला और प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के स्थानीय सिविल अस्पताल परिसर में संचालित सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र से रात के अंधेरे में करीब तीस मरीज मुख्य द्वार का ताला तोड़कर अचानक फरार हो गए। इस सामूहिक पलायन की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। घटना के वक्त केंद्र पर तैनात सुरक्षाकर्मी और स्टाफ कुछ समझ पाते, तब तक मरीजों का यह बड़ा समूह परिसर की चारदीवारी को पार कर ओझल हो चुका था। इस सुरक्षा चूक ने न केवल मोगा जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है, बल्कि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियानों के कड़े कूटनीतिक दावों की जमीनी हकीकत भी बयां कर दी है। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस और जिला स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और पूरे मामले की बारीकी से पड़ताल शुरू कर दी गई है।

इस पूरी घटना के विस्तृत घटनाक्रम के अनुसार, नशा मुक्ति केंद्र में उपचाराधीन इन मरीजों ने पिछले कुछ दिनों से सुनियोजित तरीके से भागने की साजिश रची थी। घटना वाली रात जब केंद्र का अधिकांश स्टाफ और सुरक्षाकर्मी अपनी रूटीन ड्यूटी के बाद विश्राम मोड में थे, तभी मरीजों के एक गुट ने अंदरूनी बैरक से निकलकर मुख्य गलियारे की तरफ कूच किया। वहां लगे लोहे के भारी गेट और उस पर जड़े ताले को इन मरीजों ने किसी भारी वस्तु की मदद से कड़े प्रहार करके तोड़ दिया। ताला टूटते ही अंदर मौजूद करीब तीस मरीज एक साथ बाहर की तरफ भागे और अस्पताल परिसर के पिछले हिस्से का फायदा उठाकर मुख्य सड़क पर निकल गए। ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने जब ताला टूटने की आवाज सुनी और मरीजों को भागते देखा, तो उन्होंने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने और उनके आक्रामक रुख के आगे स्टाफ पूरी तरह बेबस नजर आया।

सरकारी पुनर्वास केंद्रों में सुरक्षा और काउंसलिंग की कमी

पंजाब के विभिन्न जिलों में चल रहे सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में मरीजों की बढ़ती संख्या के मुकाबले सुरक्षा प्रबंध और पेशेवर काउंसलर्स की भारी कमी देखी जा रही है। मोगा की यह घटना स्पष्ट करती है कि बिना कड़े सुरक्षा घेरे और प्रभावी मनोवैज्ञानिक सत्रों के, हिंसक और गंभीर रूप से एडिक्ट हो चुके मरीजों को संभालना स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए एक बेहद जोखिम भरा काम साबित हो रहा है।

इस सुरक्षा चूक और सनसनीखेज फरारी के बाद सिविल अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों ने आपातकालीन बैठक बुलाकर मामले की आंतरिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आ रही है कि केंद्र के भीतर क्षमता से अधिक मरीजों को रखा गया था और रात के समय सुरक्षाकर्मियों की तैनाती नियमों के मुताबिक बेहद कम थी। फरार हुए मरीजों के चिकित्सा इतिहास (मेडिकल हिस्ट्री) खंगालने पर पता चला है कि इनमें से अधिकांश मरीज गंभीर सिंथेटिक नशा करने के आदी थे, जिन्हें उनके परिजनों ने जबरन या पुलिस काउंसलिंग के माध्यम से यहाँ भर्ती कराया था। इलाज के शुरुआती हफ्तों में होने वाले विड्रॉल सिम्टम्स (नशा छोड़ने के बाद होने वाली शारीरिक और मानसिक बेचैनी) के कारण ये मरीज अत्यधिक आक्रामक और चिड़चिड़े हो गए थे, जिसके चलते वे किसी भी कीमत पर केंद्र की चारदीवारी से बाहर निकलने के लिए छटपटा रहे थे।

हादसे की सूचना मिलने के तुरंत बाद मोगा के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर पूरे शहर और जिला सीमाओं के आसपास कटीली नाकेबंदी कर दी गई है। पुलिस की पांच से अधिक विशेष टीमें फरार हुए सभी तीस मरीजों के गृह जनपदों, संभावित ठिकानों और उनके पैतृक गांवों में लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस प्रशासन ने फरार मरीजों के परिजनों से भी संपर्क साधा है और उनसे अपील की है कि यदि उनका बच्चा घर वापस लौटता है, तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या स्वास्थ्य अधिकारियों को दी जाए ताकि उनका इलाज दोबारा सुचारू रूप से शुरू किया जा सके। कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय सामाजिक घटना को रोकने के लिए सिविल अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

इस घटना ने पंजाब में पिछले कई सालों से चल रहे नशा विरोधी अभियानों और स्वास्थ्य कूटनीति के प्रशासनिक ढांचे पर एक बार फिर गंभीर विमर्श की आवश्यकता पैदा कर दी है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिक मंचों का मानना है कि नशा मुक्ति केवल दवाओं के सहारे संभव नहीं है, इसके लिए बुनियादी स्तर पर बुनियादी ढांचे का मजबूत होना और मरीजों की चौबीसों घंटे कड़ी निगरानी होना बेहद आवश्यक है। सरकारी केंद्रों में अक्सर मरीजों को बुनियादी सुविधाएं न मिलने और कर्मचारियों के कथित कड़े व्यवहार की शिकायतें भी समय-समय पर सामने आती रहती हैं, जो मरीजों के भीतर व्यवस्था के प्रति एक नकारात्मक विद्रोह की भावना पैदा कर देती हैं। मोगा का यह सामूहिक पलायन इसी व्यवस्थागत असंतोष और कमजोर निगरानी तंत्र का एक बहुत बड़ा और प्रत्यक्ष परिणाम माना जा रहा है।

चिकित्सा और प्रशासनिक स्तर पर अब इस बात की भी गहन समीक्षा की जा रही है कि नशा मुक्ति केंद्र के मुख्य द्वार का ताला तोड़ने में मरीजों को कामयाबी कैसे मिली और क्या इस कृत्य में उन्हें अंदर या बाहर से किसी प्रकार की कोई मदद मिली थी। पुलिस अधिकारियों ने केंद्र में तैनात सुरक्षा गार्डों और वार्ड बॉयज के बयान भी दर्ज किए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या घटना के वक्त कोई लापरवाही बरती गई थी। यदि इस जांच में किसी भी कर्मचारी की कतई संलिप्तता या ड्यूटी में कोताही पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, जिले के अन्य उप-मंडलों में चल रहे पुनर्वास केंद्रों को भी हाई अलर्ट पर रहने और अपने यहाँ की सुरक्षा व्यवस्था को तुरंत चाक-चौबंद करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

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