महाराष्ट्र में प्री-मॉनसून वर्षा से कुछ हिस्सों को मिली बड़ी राहत, जबकि अन्य मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी।

महाराष्ट्र में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में दो विपरीत परिस्थितियां देखने को

May 23, 2026 - 12:49
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महाराष्ट्र में प्री-मॉनसून वर्षा से कुछ हिस्सों को मिली बड़ी राहत, जबकि अन्य मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी।
महाराष्ट्र में प्री-मॉनसून वर्षा से कुछ हिस्सों को मिली बड़ी राहत, जबकि अन्य मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी।
  • पुणे और आसपास के क्षेत्रों में धूल भरी आंधी के साथ बरसे बादल, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में तापमान पैंतालीस पार
  • चिलचिलाती धूप और उमस के बीच मौसमी बदलावों से राहत के संकेत, तटीय और पश्चिमी जिलों में मौसम विभाग की चेतावनी

महाराष्ट्र में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है और राज्य के अलग-अलग हिस्सों में दो विपरीत परिस्थितियां देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां पश्चिमी और तटीय इलाकों में प्री-मॉनसून गतिविधियों के चलते मौसम खुशनुमा हो गया है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और विदर्भ के मैदानी इलाकों में सूरज की तपिश और गर्म हवाओं का कहर बदस्तूर जारी है। शुक्रवार को पुणे और सातारा जैसे जिलों में अचानक आसमान में काले बादलों का जमावड़ा हुआ और देखते ही देखते तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश शुरू हो गई। इस आकस्मिक वर्षा ने स्थानीय निवासियों को पिछले कई दिनों से जारी भीषण उमस और चुभने वाली गर्मी से तात्कालिक रूप से बहुत बड़ी राहत प्रदान की है। इसके विपरीत, राज्य के अंदरूनी और पूर्वी जिलों में रहने वाले लोगों को अभी भी सूरज की सीधी और तीखी किरणों का सामना करना पड़ रहा है, जहां तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है।

पुणे शहर में हुई इस प्री-मॉनसून बारिश का असर तापमान में आई गिरावट के रूप में स्पष्ट रूप से देखा गया। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, पुणे में दोपहर के बाद मौसम ने करवट ली और शहर के विभिन्न हिस्सों में कुल तेरह दशमलव एक मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इस बारिश के बाद शहर का अधिकतम तापमान गिरकर सैंतीस डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जो पिछले दिनों की तुलना में काफी कम है। बारिश के साथ ही तेज गति से चली हवाओं ने वातावरण में ठंडक घोल दी, जिससे शाम के समय लोगों को घरों से बाहर निकलने और ठंडी हवाओं का आनंद लेने का अवसर मिला। सातारा जिले में भी इसी प्रकार की हल्की बूंदाबांदी और तेज हवाओं की स्थिति देखी गई, जिससे पश्चिमी घाट से सटे इन पहाड़ी और अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन प्रकोप से अस्थाई राहत मिली है।

हालांकि, राज्य के अन्य बड़े हिस्सों की स्थिति पुणे जैसी राहत भरी नहीं है और वहां गर्मी ने अपने पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उत्तर महाराष्ट्र के नंदुरबार में शुक्रवार को अधिकतम तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस के स्तर को छू गया, जबकि मालेगांव में स्थिति और भी गंभीर रही जहां थर्मामीटर का पारा इकतालीस डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मराठवाड़ा क्षेत्र में भी धूप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर गया। इस क्षेत्र के प्रमुख शहरों में शामिल परभनी में अधिकतम तापमान इकतालीस दशमलव तीन डिग्री सेल्सियस और छत्रपति संभाजीनगर में इकतालीस दशमलव चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। विदर्भ क्षेत्र की बात करें तो वहां की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है, जहां ब्रह्मपुरी में पारा सैंतालीस दशमलव दो डिग्री और वर्धा में सैंतालीस डिग्री सेल्सियस के डरावने स्तर पर पहुंच चुका है, जिसके कारण पूरा इलाका भट्टी की तरह तप रहा है।

तापमान का तुलनात्मक विवरण और क्षेत्रीय स्थिति

पुणे: 13.1 मिमी वर्षा के साथ अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज, उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत।

मालेगांव और नंदुरबार: उत्तर महाराष्ट्र के इन क्षेत्रों में पारा क्रमशः 41 और 40 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा।

मराठवाड़ा क्षेत्र: छत्रपति संभाजीनगर में 41.4 डिग्री और परभनी में 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज।

विदर्भ की भीषण स्थिति: ब्रह्मपुरी में पारा 47.2 डिग्री और वर्धा में 47 डिग्री सेल्सियस के साथ प्रचंड लू का प्रकोप।

मुंबई महानगर: कोलाबा में 35 डिग्री और सांताक्रुज में 34.5 डिग्री सेल्सियस तापमान, हवा में अत्यधिक आर्द्रता।

महानगर मुंबई और उसके आसपास के तटीय जिलों में तापमान भले ही चालीस डिग्री के पार नहीं गया है, लेकिन हवा में मौजूद अत्यधिक नमी और आर्द्रता के कारण लोगों का हाल बेहाल है। मुंबई के कोलाबा वेधशाला में अधिकतम तापमान पैंतीस डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि उपनगरीय क्षेत्र सांताक्रुज में यह चौंतीस दशमलव पांच डिग्री सेल्सियस रहा। भले ही यह तापमान विदर्भ या मराठवाड़ा की तुलना में बहुत कम प्रतीत होता है, परंतु समुद्र के निकट होने के कारण हवा में आर्द्रता का स्तर अस्सी प्रतिशत से अधिक है, जिसके कारण होने वाले अत्यधिक पसीने और चिपचिपी गर्मी ने मुंबईवासियों को बुरी तरह थका दिया है। शनिवार सुबह से ही मुंबई और ठाणे के आसमान में आंशिक रूप से बादलों की आवाजाही देखी जा रही है, जिससे इस बात की प्रबल संभावना बन रही है कि तटीय क्षेत्रों में भी बहुत जल्द बारिश की बौछारें गिर सकती हैं।

मौसम संबंधी इस विषमता के बीच भारतीय मौसम विभाग ने आगामी कुछ दिनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण चेतावनी और पूर्वानुमान जारी किए हैं। मौसम वैज्ञानिकों के विश्लेषण के अनुसार, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाएं तेजी से पश्चिमी तट की ओर बढ़ रही हैं, जिसके कारण मुंबई, पुणे, ठाणे, रायगढ़, रत्नागिरी और पालघर जिलों में बिजली कड़कने, गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश होने की पूरी संभावना है। इन तटीय और दक्षिण-पश्चिमी जिलों के लिए यलो और कुछ स्थानों के लिए विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, विदर्भ के नागपुर, यवतमाल, चंद्रपुर, अकोला और अमरावती जैसे जिलों के लिए अगले चौबीस से अड़तालीस घंटों तक गंभीर लू की स्थिति बने रहने के कारण ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।

कृषि क्षेत्र पर मौसम के इस दोहरे प्रभाव को देखते हुए ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में किसानों के लिए विशेष कृषि-परामर्श जारी किया गया है। जहां एक ओर प्री-मॉनसून बारिश मिट्टी की नमी को बढ़ाने और खरीफ सीजन की तैयारियों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, वहीं अचानक आने वाले आंधी-तूफान से खेतों में कटी रखी फसलों और बागवानी को नुकसान पहुंचने की भी आशंका है। किसानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करें या उन्हें तिरपाल की मदद से अच्छी तरह ढककर रखें। इसके अतिरिक्त, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र के पशुपालकों को अत्यधिक तापमान से अपने मवेशियों को बचाने के लिए छायादार स्थानों पर रखने, उन्हें पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराने तथा पोल्ट्री फार्म की छतों पर घास या बोरे डालकर तापमान नियंत्रित करने की सलाह दी गई है।

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