रेड फोर्ट ब्लास्ट: चिदंबरम का केंद्र पर हमला, घरेलू आतंकवाद की चुप्पी क्यों, पढ़े-लिखे युवाओं को कट्टर बनाने वाली परिस्थितियों पर सवाल।
दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस धमाके में 12 लोगों की जान चली गई और 20 से अधिक
दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार विस्फोट ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस धमाके में 12 लोगों की जान चली गई और 20 से अधिक लोग घायल हो गए। केंद्र सरकार ने इसे आतंकी घटना घोषित कर जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। लेकिन इसी बीच पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने एक बार फिर घरेलू आतंकवाद का मुद्दा उठाया है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि भारत को दो प्रकार के आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है- विदेश से प्रशिक्षित घुसपैठिए आतंकवादी और घरेलू आतंकवादी। चिदंबरम ने सरकार पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और पूछा कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां हैं जो भारतीय नागरिकों, यहां तक कि पढ़े-लिखे लोगों को भी आतंकवादी बना देती हैं। उनका यह बयान उस समय आया है जब जांच में फरीदाबाद के एक मेडिकल कॉलेज से जुड़े कश्मीरी डॉक्टरों का नाम सामने आया है, जो जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों से जुड़े माने जा रहे हैं। भाजपा ने चिदंबरम के बयान को आतंकियों को कवर फायर देने वाला बताया है। यह विवाद न केवल राजनीतिक बहस को तेज कर रहा है, बल्कि आतंकवाद के घरेलू स्वरूप पर गहन चिंता जता रहा है।
घटना की शुरुआत 10 नवंबर की शाम को हुई। समय था करीब 6 बजकर 52 मिनट। चांदनी चौक के व्यस्त इलाके में रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 1 के पास एक सफेद ह्यूंडई आई20 कार में जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कार के टुकड़े उड़ गए, आसपास की 12 गाड़ियां जल उठीं और सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। कार में अमोनियम नाइट्रेट और आरडीएक्स के मिश्रण से बने लगभग तीन किलोग्राम विस्फोटक भरे थे। दिल्ली पुलिस ने तुरंत यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम) और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी), नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) और फॉरेंसिक टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों में स्थानीय व्यापारी, बस कंडक्टर और पर्यटक शामिल थे। दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने बताया कि कार धमाके से ठीक पहले ट्रैफिक लाइट पर रुकी थी और उसमें दो से तीन लोग सवार थे। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि कार दोपहर करीब तीन बजे सुनेहरी मस्जिद के पास पार्क हुई थी और शाम को ही हिली।
जांच तेजी से आगे बढ़ी। एनआईए ने केस अपने हाथ में ले लिया। प्रारंभिक जांच में यह आत्मघाती हमला माना गया। मुख्य संदिग्ध डॉक्टर उमर उन नबी थे, जो पुलवामा के कोइल गांव के रहने वाले थे। उमर ने श्रीनगर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से एमडी की डिग्री ली थी और फरीदाबाद के अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर में सीनियर रेजिडेंट थे। डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई कि धमाके के समय कार में मौजूद शव उमर का ही था। उनके परिवार के सैंपल से 100 प्रतिशत मैच मिला। उमर ने 29 अक्टूबर को यह कार खरीदी थी। जांच में पता चला कि वे तुर्की के हैंडलर 'यूकासा' से सेशन ऐप पर संपर्क में थे। फरीदाबाद में 9 नवंबर को छापेमारी में 2900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुए। डॉक्टर मुजम्मिल अहमद गनाई, डॉक्टर आदिल मजीद राथर और डॉक्टर शाहीना शाहिद जैसे पेशेवरों को गिरफ्तार किया गया। शाहीना जैश की महिला विंग 'जमात-उल-मोमिनात' से जुड़ी थीं। यह मॉड्यूल 'व्हाइट कॉलर टेरर' का उदाहरण था, जिसमें पढ़े-लिखे लोग लॉजिस्टिक्स संभालते थे। साजिश में अयोध्या राम मंदिर (25 नवंबर) और बाबरी विध्वंस बरसी (6 दिसंबर) को लक्ष्य बनाया गया था। कानपुर और ग्रेटर नोएडा से नौ संदिग्ध हिरासत में हैं।
इसी पृष्ठभूमि में 12 नवंबर को चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट की। उन्होंने लिखा, "मैं पहलगाम हमले से पहले और बाद में भी यही कहता आया हूं कि आतंकवादी दो तरह के होते हैं- विदेश से प्रशिक्षित घुसपैठिए आतंकवादी और घरेलू आतंकवादी। मैंने संसद में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान भी यही कहा था। घरेलू आतंकवादियों के जिक्र पर मेरा मजाक उड़ाया गया और मुझे ट्रोल किया गया।" आगे उन्होंने कहा, "हालांकि, मुझे कहना होगा कि सरकार ने इस पर चुप्पी साध ली क्योंकि सरकार जानती है कि घरेलू आतंकवादी भी होते हैं। इस पोस्ट का मकसद यह है कि हमें खुद से पूछना चाहिए कि ऐसी कौन सी परिस्थितियां हैं जो भारतीय नागरिकों, यहां तक कि पढ़े-लिखे लोगों को भी आतंकवादी बना देती हैं।" चिदंबरम ने पहलगाम हमले (जम्मू-कश्मीर में हालिया घटना) और ऑपरेशन सिंदूर (आतंकी ठिकानों पर स्ट्राइक) का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार विदेशी आतंक पर तो बोलती है, लेकिन घरेलू पर चुप रहती है। उनका बयान डॉक्टरों की गिरफ्तारी से जुड़ा था, जो दिखाता है कि रेडिकलाइजेशन की जड़ें अंदर ही हैं।
चिदंबरम का यह मुद्दा नया नहीं है। वे पूर्व गृह मंत्री रहते हुए 2008 के मुंबई हमलों और अन्य घटनाओं पर घरेलू तत्वों की भूमिका पर जोर देते रहे। पहलगाम हमले के बाद उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान का हाथ साबित नहीं हुआ। गृह मंत्री अमित शाह ने तब चिदंबरम पर पाकिस्तान को क्लीन चिट देने का आरोप लगाया। ऑपरेशन सिंदूर (2024 में कश्मीर में आतंकी कैंपों पर कार्रवाई) पर संसद बहस में चिदंबरम ने घरेलू रेडिकलाइजेशन का जिक्र किया, जिस पर भाजपा ने हमला बोला। अब रेड फोर्ट ब्लास्ट के बाद उनका बयान फिर सुर्खियों में है। इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे प्रमुखता दी। चिदंबरम का कहना है कि तनाव, बेरोजगारी, सामाजिक असमानता और ऑनलाइन प्रोपगैंडा जैसे कारक युवाओं को कट्टर बनाते हैं। वे सुझाव देते हैं कि सरकार को जड़ों पर काम करना चाहिए, न कि केवल दमन पर।
भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा, "कांग्रेस आतंकियों को कवर फायर क्यों दे रही है? ट्रेनिंग लेने वाले घुसपैठिए और घरेलू- दोनों आतंकी हैं। कोई परिस्थिति आतंक को जायज नहीं ठहराती। सोनिया गांधी का बटला हाउस दौरा से चिदंबरम तक, कांग्रेस वोट बैंक को राष्ट्रीय हित से ऊपर रखती है।" भाजपा ने चिदंबरम को ट्रोलिंग का हवाला देकर बचाव का आरोप लगाया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारामैया ने भी हमलों के कारण पूछे, जिस पर भाजपा ने कांग्रेस को निशाना बनाया। यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आतंकवाद के मुद्दे को ध्रुवीकरण की ओर ले जा रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया कड़ी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 नवंबर को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। कैबिनेट ने इसे 'घिनौनी आतंकी घटना' घोषित किया और पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। मोदी ने लोक नायक अस्पताल जाकर घायलों से मुलाकात की और कहा, "षड्यंत्रकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।" गृह मंत्री अमित शाह ने एजेंसियों को निर्देश दिए कि सभी अपराधी, सहयोगी और प्रायोजक पकड़े जाएं। एनआईए ने विशेष टीम गठित की। सुरक्षा बढ़ा दी गई- हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन, धार्मिक स्थल और स्मारकों पर अलर्ट। रेड फोर्ट तीन दिनों के लिए बंद रहा। लाल किला मेट्रो स्टेशन 12 नवंबर तक बंद। अमेरिका, इजरायल, मिस्र और बांग्लादेश ने निंदा की। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सहयोग की पेशकश की।
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