Politics: सैनिटरी पैड पर राहुल गांधी की तस्वीर के साथ छेड़छाड़, बेंगलुरु में दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज।
Bihar News: हाल ही में बिहार में कांग्रेस पार्टी की ओर से शुरू किए गए एक सामाजिक अभियान ने उस समय विवाद का रूप ले लिया, जब सैनिटरी पैड पर राहुल...
Political News: हाल ही में बिहार में कांग्रेस पार्टी की ओर से शुरू किए गए एक सामाजिक अभियान ने उस समय विवाद का रूप ले लिया, जब सैनिटरी पैड पर राहुल गांधी की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया। इस घटना ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई, बल्कि सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी। बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में युवा कांग्रेस कार्यकर्ता प्रियंका देवी की शिकायत के आधार पर रतन रंजन और अरुण कोसिल के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। यह मामला एक फर्जी वीडियो से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी की तस्वीर को सैनिटरी पैड पर दिखाया गया, जो कांग्रेस की 'प्रियदर्शिनी उदान योजना' के तहत बांटे जा रहे थे।
- प्रियदर्शिनी उदान योजना और विवाद की शुरुआत
कांग्रेस पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं के बीच मासिक धर्म स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए 'प्रियदर्शिनी उदान योजना' शुरू की थी। इस योजना के तहत बिहार में करीब पांच लाख महिलाओं को मुफ्त सैनिटरी पैड बांटे जाने थे। इन सैनिटरी पैड के पैकेट्स पर कांग्रेस के प्रमुख नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की तस्वीरें छपी थीं, ताकि इस अभियान को ज्यादा से ज्यादा लोग जान सकें। यह अभियान महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था, जिसमें मुफ्त सैनिटरी पैड के साथ-साथ महिलाओं को इस विषय पर जागरूक करने का लक्ष्य था। कांग्रेस की अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की प्रमुख अलका लांबा ने इस अभियान की शुरुआत करते हुए कहा था, "हमने सैनिटरी पैड बनाने के लिए मशीनें लगाईं, मुफ्त प्रशिक्षण दिया, मुफ्त कच्चा माल दिया और अब बिहार की महिलाएं इन पैड्स को बना रही हैं। इससे उन्हें रोजगार और सम्मान दोनों मिल रहा है।" इस अभियान को 'पैडमैन' फिल्म से प्रेरित बताया गया, जिसमें मासिक धर्म स्वच्छता के महत्व को रेखांकित किया गया था।
लेकिन यह अभियान तब विवादों में घिर गया, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि सैनिटरी पैड के अंदरूनी हिस्से पर भी राहुल गांधी की तस्वीर छपी है। यह वीडियो तेजी से फैला और इसे लेकर बीजेपी और जेडी(यू) जैसे विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधा। बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इसे "बिहार की महिलाओं का अपमान" करार दिया और कहा कि यह कांग्रेस की "महिला विरोधी" मानसिकता को दर्शाता है।
- कांग्रेस का जवाब और FIR
कांग्रेस ने इस वीडियो को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया। पार्टी की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह वीडियो राहुल गांधी की छवि को खराब करने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सैनिटरी पैड के पैकेट्स पर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की तस्वीरें तो हैं, लेकिन पैड के अंदर तस्वीर होने का दावा पूरी तरह झूठा है। सुप्रिया ने कहा, "यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसमें राहुल गांधी की छवि को गलत तरीके से पेश किया गया है। इस फर्जी वीडियो के खिलाफ हमने कानूनी कार्रवाई शुरू की है।" युवा कांग्रेस कार्यकर्ता प्रियंका देवी ने बेंगलुरु के हाई ग्राउंड्स पुलिस स्टेशन में रतन रंजन और अरुण कोसिल के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इस शिकायत के आधार पर दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153 (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505(2) (नफरत फैलाने वाले बयान) के तहत FIR दर्ज की गई। प्रियंका देवी ने अपनी शिकायत में कहा कि यह वीडियो न केवल राहुल गांधी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश है, बल्कि यह समाज में नफरत और गलतफहमी फैलाने का भी प्रयास है।
इस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया, खासकर X पर, लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स ने इसे कांग्रेस की गलत रणनीति का हिस्सा बताया और कहा कि सैनिटरी पैड जैसे संवेदनशील उत्पाद पर किसी नेता की तस्वीर छापना अनुचित है। एक यूजर ने लिखा, "सैनिटरी पैड पर राहुल गांधी की तस्वीर लगाना महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। यह सिर्फ वोटों के लिए सस्ता प्रचार है।" वहीं, कुछ यूजर्स ने कांग्रेस का समर्थन करते हुए कहा कि यह अभियान महिलाओं के लिए एक सकारात्मक कदम है और फर्जी वीडियो के जरिए इसे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस समर्थकों ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं ने भी कई बार पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीरों का इस्तेमाल विभिन्न योजनाओं और उत्पादों पर किया है, जैसे कोविड वैक्सीन सर्टिफिकेट्स पर। अलका लांबा ने कहा, "जब बीजेपी अपनी योजनाओं में पीएम की तस्वीरें इस्तेमाल करती है, तब कोई विवाद नहीं होता। लेकिन जब हम महिलाओं के लिए कुछ करते हैं, तो इसे विवाद बना दिया जाता है।"
- राजनीतिक विवाद
इस घटना ने बिहार में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। बीजेपी और जेडी(यू) ने इसे कांग्रेस की "सस्ती लोकप्रियता" की रणनीति करार दिया। जेडी(यू) के नेता नीरज कुमार ने कहा कि कांग्रेस अपने सहयोगी दल RJD की आक्रामक राजनीति की नकल कर रही है और बिहार में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए नीतीश कुमार द्वारा किए गए कार्यों को नजरअंदाज कर रही है। बीजेपी प्रवक्ता कुंतल कृष्णा ने भी इस कदम को अनुचित बताया और कहा कि यह केवल प्रचार के लिए किया गया है। दूसरी ओर, बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने इस अभियान का बचाव करते हुए कहा कि यह महिलाओं के स्वास्थ्य और जागरूकता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा, "हमारा लक्ष्य पांच लाख महिलाओं तक सैनिटरी पैड पहुंचाना है। महिला कांग्रेस इस अभियान को जमीनी स्तर पर लागू कर रही है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह योजना इंडिया गठबंधन की "माई-बहीन मान योजना" का हिस्सा है, जिसमें सत्ता में आने पर महिलाओं को 2,500 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया गया है।
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने रतन रंजन और अरुण कोसिल की तलाश शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलाने में इन दोनों की भूमिका थी। कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया है कि इस मामले में और भी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, "हम उन सभी लोगों की लिस्ट बना रहे हैं, जिन्होंने इस फर्जी वीडियो को फैलाने में हिस्सा लिया। कोई भी बख्शा नहीं जाएगा।" इस बीच, कुछ महिलाओं ने इस अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि सैनिटरी पैड जैसे निजी उत्पाद पर किसी भी नेता की तस्वीर छापना गलत है। मुजफ्फरपुर की पिंकी कुमारी ने कहा, "यह महिलाओं का अपमान है। हमें मुफ्त सैनिटरी पैड चाहिए, लेकिन इस तरह की राजनीति नहीं।" वहीं, वैशाली की सुनिता सिंह ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए, न कि प्रचार पर।
What's Your Reaction?