प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पच्चीस वर्षीय युवक ने मां के नाम लिखकर जान दी।
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में बिठूर थाना क्षेत्र के होरा बांगर इलाके में एक दुखद घटना हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पच्चीस वर्षीय
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में बिठूर थाना क्षेत्र के होरा बांगर इलाके में एक दुखद घटना हुई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे पच्चीस वर्षीय युवक अजीत कुमार यादव उर्फ जीतु ने घर के हॉल में छत के पंखे के कुंडे से मफलर बांधकर फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। घटना के बाद परिजनों ने शव को देखा तो कमरे में एक दो पन्ने का नोट मिला जिसमें युवक ने भावुक शब्द लिखे थे। नोट में मुख्य रूप से लिखा था कि आई लव यू राधा काश मैं तुम्हारे साथ ही चला जाता। साथ ही भाई को बहुत प्यार करने और पिता से माफी मांगने की बात भी थी।
पुलिस और परिवार की शुरुआती पड़ताल से पता चला कि युवक की मां का नाम राधा था और उनकी मृत्यु अठारह साल पहले हो चुकी है। युवक ने शायद उन्हीं की याद में यह नाम लिखा था। नोट में यह भी लिखा गया कि भाई को बहुत प्यार करता हूं पापा मुझे माफ करना अब समझ आ गया है कि आप लोग परिवार के लिए ही सब करते हो। मैं बहुत पी चुका हूं इसलिए ज्यादा नहीं लिख पा रहा। मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि ऐसे अच्छे परिवार में जन्म लिया। मेरे बारे में मेरे दोस्त आदर्श आशू और दीपक से पूछ लेना। मैं अब जहां भी रहूंगा सुकून से रहूंगा। युवक के पिता जयवीर यादव सेना से सेवानिवृत्त हैं और अभी कानपुर विद्युत आपूर्ति निगम में कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में काम कर रहे हैं। मां के निधन के बाद पिता ने मोना से दूसरी शादी कर ली थी। मोना ने अजीत और उनके भाई पुष्पेंद्र को बड़े प्यार से पाला। अजीत पिछले डेढ़ साल से चाचा रणवीर सिंह के घर में रहकर सब इंस्पेक्टर की परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। चाचा रणवीर सिंह और भाई पुष्पेंद्र ने इस मौत को संदिग्ध बताया है और पूरी जांच की मांग की है।
जब परिवार के सदस्य सुबह घर पहुंचे तो मुख्य दरवाजा बंद था लेकिन पीछे का दरवाजा खुला मिला। अंदर जाकर उन्होंने हॉल में पंखे से लटका शव देखा। कमरे में शराब की खाली बोतल कांच का गिलास पानी की बोतल दालमोट की तश्तरी और दो जली हुई सिगरेट मिलीं। युवक के एक कान में ईयरबड भी लगा था। बिठूर थाने के इंस्पेक्टर अशोक कुमार सरोज ने बताया कि युवक का मोबाइल फोन जांच में मददगार साबित हो सकता है। अगर परिवार लिखित शिकायत देता है तो रिपोर्ट दर्ज करके आगे कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी देख रही है कि कहीं युवक ने किसी से बातचीत या वीडियो कॉल करते समय यह कदम तो नहीं उठाया।
यह घटना युवाओं में मानसिक दबाव को दिखाती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर पढ़ाई का बोझ परिवार की उम्मीदें और भविष्य की चिंता रहती है। कई बार छोटी बातें भी बड़ा असर डाल देती हैं। अजीत जैसे युवक दूर गांव से शहर आकर अकेले रहते हैं। दोस्त परिवार और सहारा की कमी महसूस होती है। मां की याद शायद सालों बाद भी ताजा हो जाती है। इस तरह की घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि युवाओं को कैसे सहारा दिया जाए। स्कूल कॉलेज और कोचिंग सेंटरों में मानसिक स्वास्थ्य की बात होनी चाहिए। काउंसलर रखे जाएं जो छात्रों की बात सुने और दबाव कम करने के तरीके बताएं। परिवार को भी बच्चों की भावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। छोटी शिकायतों को नजरअंदाज न करें। दोस्तों को भी साथ देना चाहिए ताकि कोई अकेला महसूस न करे। सरकारी स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाए जा सकते हैं। परीक्षा तनाव कम करने के लिए समय प्रबंधन और आराम की सलाह दी जा सकती है।
कानपुर जैसे शहरों में हजारों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। रोज नई उम्मीद और निराशा का चक्र चलता है। नौकरी की कमी और प्रतिस्पर्धा बढ़ती जा रही है। ऐसे में अगर कोई युवक दबाव सहन न कर पाए तो परिवार टूट जाता है। अजीत के परिवार ने उसे बहुत प्यार दिया था लेकिन शायद कुछ बातें न कह पाए। नोट में परिवार के लिए लिखे शब्द दिखाते हैं कि वह उन्हें समझता था लेकिन खुद के दर्द से बाहर नहीं निकल पाया। पुलिस अब मोबाइल की जांच कर रही है। दोस्तों से भी पूछताछ हो सकती है। अगर कोई और वजह सामने आएगी तो खुलासा होगा। अभी परिवार शव का अंतिम संस्कार करने की तैयारी में है। मोना बहुत परेशान हैं क्योंकि उन्होंने अजीत को अपने बेटे की तरह पाला था। भाई पुष्पेंद्र कहते हैं कि भाई कभी ऐसा कदम नहीं उठा सकता था बिना किसी वजह के। चाचा भी यही मानते हैं कि और गहराई से देखने की जरूरत है।
युवाओं के लिए सलाह है कि अगर मन उदास हो तो किसी से बात करें। हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। परिवार दोस्त या शिक्षक से शेयर करें। अकेले रहने पर और ज्यादा सोचने लगते हैं। व्यायाम संगीत किताबें पढ़ना या घूमना भी मदद करता है। परीक्षा की तैयारी में ब्रेक जरूरी है। अच्छा खाना नींद और सकारात्मक सोच बनाए रखें। समाज को भी युवाओं को समझना चाहिए न कि सिर्फ नतीजों पर ध्यान देना चाहिए। इस घटना से पूरे क्षेत्र में मायूसी छा गई है। पड़ोसी भी सदमे में हैं। कई लोग कह रहे हैं कि युवाओं को ज्यादा सपोर्ट की जरूरत है। कोचिंग संस्थान भी छात्रों की मानसिक स्थिति पर नजर रखें। अगर कोई असामान्य व्यवहार दिखे तो परिवार को सूचित करें। सरकार को भी ऐसे मामलों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हेल्पलाइन को और मजबूत बनाया जाए। स्कूलों में से लेकर कोचिंग तक मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा शामिल हो।
अजीत का नोट परिवार के लिए आखिरी संदेश बन गया है। उसमें प्यार माफी और सुकून की बात है। मां की याद ने शायद पुराना दर्द जगा दिया। अठारह साल बाद भी मां का नाम लिखना दिखाता है कि रिश्ते कितने गहरे होते हैं। लेकिन आत्महत्या कोई हल नहीं है। जीवन में मुश्किलें आती हैं लेकिन उनसे निकलने के रास्ते भी हैं। मदद मांगना हिम्मत का काम है। परिवार अब शोक में है। पुलिस जांच जारी रखेगी ताकि सच्चाई सामने आए। युवक के दोस्त आदर्श आशू और दीपक से भी बात की जा सकती है। शायद वे कुछ और बता सकें। कुल मिलाकर यह घटना हमें याद दिलाती है कि हर युवा की भावनाएं महत्वपूर्ण हैं। उन्हें सुनना और समझना हमारा कर्तव्य है। अगर हम समय पर ध्यान दें तो ऐसी दुखद घटनाएं रुक सकती हैं। समाज को मिलकर युवाओं का साथ देना चाहिए ताकि वे मजबूत बनें और सपने पूरे करें।
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