चंदन मिश्रा हत्याकांड में तौसीफ बादशाह समेत 5 शूटर्स की पहचान हुई, पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी।

Patna Crime News: पटना के पारस एचएमआरआई अस्पताल में 17 जुलाई 2025 को हुए सनसनीखेज हत्याकांड ने बिहार में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े....

Jul 18, 2025 - 12:02
Jul 18, 2025 - 12:09
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चंदन मिश्रा हत्याकांड में तौसीफ बादशाह समेत 5 शूटर्स की पहचान हुई, पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी।
चंदन मिश्रा हत्याकांड में तौसीफ बादशाह समेत 5 शूटर्स की पहचान हुई, पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी।

पटना के पारस एचएमआरआई अस्पताल में 17 जुलाई 2025 को हुए सनसनीखेज हत्याकांड ने बिहार में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना में बक्सर के कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की पांच हथियारबंद हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी तौसीफ उर्फ बादशाह सहित पांच शूटर्स की पहचान कर ली है। अन्य चार शूटर्स के नाम आरिफ, नसीम, शहबाज और गुड्डू बताए गए हैं। पुलिस और विशेष कार्य बल (STF) की टीमें फुलवारी शरीफ और बक्सर में लगातार छापेमारी कर रही हैं, जिसमें तौसीफ को हिरासत में ले लिया गया है। यह हत्या गैंगवार और सुपारी किलिंग से जुड़ी बताई जा रही है, 17 जुलाई 2025 की सुबह पटना के पारस एचएमआरआई अस्पताल के आईसीयू में पांच हथियारबंद लोग बिना किसी डर के घुस गए। ये लोग दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए थे और सीधे उस कमरे में पहुंचे, जहां बक्सर का कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा इलाज के लिए भर्ती था। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि शूटर्स ने हथियार लहराते हुए कमरे में प्रवेश किया और चंदन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। महज 30 सेकंड में वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मोटरसाइकिलों पर सवार होकर फरार हो गए। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर जश्न मनाते हुए भागे, जिससे इस हत्या की सुनियोजित प्रकृति का पता चलता है।

चंदन मिश्रा 2011 में व्यापारी राजेंद्र केसरी की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। उसे मेडिकल आधार पर 15 दिन की पैरोल मिली थी, और वह पटना के पारस अस्पताल में इलाज करा रहा था। हत्या के समय उसकी पैरोल खत्म होने में सिर्फ एक दिन बाकी था। इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं, क्योंकि हमलावर बिना किसी रुकावट के आईसीयू तक पहुंच गए।

  • आरोपियों की पहचान और तौसीफ बादशाह की भूमिका

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर पांच शूटर्स की पहचान कर ली है। मुख्य आरोपी तौसीफ उर्फ बादशाह को फुलवारी शरीफ के गुलिस्तान मोहल्ले से हिरासत में लिया गया है। तौसीफ सफेद प्रिंटेड शर्ट और नीली जींस में बिना सिर ढके अस्पताल में सबसे आगे चलता दिखा। वह फुलवारी शरीफ में जमीन का कारोबार करता है और सुपारी किलिंग में शामिल होने का उसका पुराना इतिहास है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तौसीफ ने इस हत्याकांड की साजिश रची और शूटर्स की अगुवाई की। वह पहले भी रमजान के दौरान फुलवारी शरीफ के दुर्गा मंदिर के पास गोलीबारी की घटना में शामिल रहा था और आर्म्स एक्ट के तहत उसका नाम दर्ज है।

अन्य चार शूटर्स की पहचान आरिफ, नसीम, शहबाज और गुड्डू के रूप में हुई है। इनमें से कुछ बक्सर जिले के बेलौर और लीलाधरपुर गांव के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनके ठिकानों पर छापेमारी तेज कर दी है और जल्द ही बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई है। तौसीफ की मां से भी पूछताछ की गई, लेकिन वह फरार होने में कामयाब रहा था, जब तक कि पुलिस ने उसे हिरासत में नहीं लिया।

  • गैंगवार और सुपारी किलिंग

पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह हत्या गैंगवार का नतीजा प्रतीत होती है। चंदन मिश्रा और शेरू नामक अपराधी के बीच पुरानी दुश्मनी थी, जो भगवानपुर जेल में शुरू हुई थी। दोनों कभी करीबी दोस्त थे और बक्सर में चंदन-शेरू गैंग के नाम से कुख्यात थे। इस गैंग ने छोटे-मोटे अपराधों से शुरुआत की और धीरे-धीरे हत्या, उगाही और अन्य संगठित अपराधों में शामिल हो गया। हालांकि, बाद में दोनों के बीच मतभेद हो गए, और शेरू वर्तमान में पश्चिम बंगाल की जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। पुलिस को शक है कि शेरू के गुट ने तौसीफ के जरिए इस हत्या को अंजाम दिया हो।

पुलिस का यह भी मानना है कि यह सुपारी किलिंग का मामला हो सकता है। तौसीफ का गैंग कथित तौर पर सुपारी लेकर हत्याएं करता है, और इस वारदात में अस्पताल की आंतरिक जानकारी का इस्तेमाल किया गया। सीसीटीवी फुटेज में शूटर्स की बेखौफ हरकतें और उनकी तेजी यह दर्शाती हैं कि उन्होंने पहले से रेकी की थी और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाया।

  • पुलिस की कार्रवाई

चंदन मिश्रा के पिता मंटू मिश्रा की शिकायत पर शास्त्री नगर थाने में तौसीफ, मन्नू, बलवंत सिंह उर्फ भिंडी और दो अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 120बी (आपराधिक साजिश) और आर्म्स एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज हुआ है। पुलिस और STF की संयुक्त टीमें फुलवारी शरीफ के गुलिस्तान और मिन्हाज नगर मोहल्लों के साथ-साथ बक्सर में छापेमारी कर रही हैं। सीसीटीवी फुटेज में शूटर्स के चेहरे साफ दिखने से उनकी पहचान में मदद मिली है।

पुलिस ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है। सवाल उठ रहे हैं कि इतने सशस्त्र लोग बिना किसी जांच के अस्पताल के अंदर कैसे घुस गए। संदेह है कि इसमें अस्पताल कर्मचारियों की मिलीभगत भी हो सकती है।

इस हत्याकांड ने बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। पिछले 26 दिनों में बिहार में 50 हत्याएं और पटना में 14 हत्याएं दर्ज की गई हैं, जिनमें चंदन मिश्रा का मामला सबसे चर्चित है। विपक्षी दलों ने इसे “जंगल राज” की वापसी बताते हुए नीतीश कुमार सरकार पर निशाना साधा है। विधानसभा चुनाव से पहले यह घटना सरकार के लिए चुनौती बन गई है। स्थानीय लोगों और संगठनों ने अस्पतालों में सुरक्षा बढ़ाने और अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

पटना के पारस अस्पताल में चंदन मिश्रा की हत्या ने न केवल अपराध की गंभीरता को उजागर किया, बल्कि अस्पतालों की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। तौसीफ बादशाह और उसके साथियों की पहचान और एक की गिरफ्तारी से पुलिस को बड़ी सफलता मिली है, लेकिन बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी और इस गैंगवार के पीछे की पूरी साजिश का खुलासा अभी बाकी है। यह घटना समाज को सतर्क करती है कि संगठित अपराध और गैंगवार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

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