Air India Flight AI-171 हादसा- Captain ने जानबूझकर इंजन के फ्यूल सप्लाई को बंद कर दिया था, जांच में नया मोड़। 

12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने वाली Air India की.....

Jul 18, 2025 - 11:53
Jul 18, 2025 - 14:30
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Air India Flight AI-171 हादसा- Captain ने जानबूझकर इंजन के फ्यूल सप्लाई को बंद कर दिया था, जांच में नया मोड़। 
Air India Flight AI-171 हादसा- Captain ने जानबूझकर इंजन के फ्यूल सप्लाई को बंद कर दिया था, जांच में नया मोड़। 

12 जून 2025 को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरने वाली Air India की Flight AI-171 के दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया। इस हादसे में 242 यात्रियों और चालक दल के 241 लोग मारे गए, जबकि 19 लोग जमीन पर हताहत हुए। केवल एक यात्री, विशवासकुमार रमेश, इस हादसे में जीवित बचे। भारत के विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती रिपोर्ट और हाल की खबरों ने इस हादसे में एक चौंकाने वाले पहलू को उजागर किया है। कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग के आधार पर कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि विमान के Captain ने जानबूझकर इंजन की ईंधन आपूर्ति बंद की थी, जिसके कारण यह हादसा हुआ। हालांकि, यह दावा अभी पूरी तरह सिद्ध नहीं हुआ है और जांच जारी है।

Air India की बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर Flight AI-171 ने 12 जून 2025 को दोपहर 1:38 बजे अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरी। उड़ान भरने के महज 32 सेकंड बाद विमान बी.जे. मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल परिसर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे भयानक आग लग गई। इस हादसे में 169 भारतीय, 53 ब्रिटिश, 7 पुर्तगाली और 1 कनाडाई यात्री के साथ-साथ 12 चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई। जमीन पर भी 19 लोग मारे गए और 67 गंभीर रूप से घायल हुए। हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आग की तापमान 1,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने डीएनए जांच को भी मुश्किल बना दिया।

AAIB की 15 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट, जो 12 जुलाई 2025 को जारी की गई, ने हादसे के कारणों पर कई सवाल खड़े किए। रिपोर्ट के अनुसार, उड़ान भरने के तीन सेकंड बाद, यानी 1:38:42 बजे, विमान के दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच एक सेकंड के अंतराल में ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में चले गए। इससे दोनों इंजनों को ईंधन की आपूर्ति बंद हो गई और विमान की शक्ति तुरंत खत्म हो गई। कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग में एक पायलट को दूसरे से पूछते सुना गया, “तुमने फ्यूल क्यों काटा?” जवाब में दूसरा पायलट कहता है, “मैंने ऐसा नहीं किया।” यह बातचीत हादसे के रहस्य को और गहरा करती है।

कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स, जैसे वॉल स्ट्रीट जर्नल, ने अमेरिकी जांचकर्ताओं के हवाले से दावा किया कि Captain सुमीत सभरवाल, जिनके पास 15,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव था, ने जानबूझकर फ्यूल स्विच को कटऑफ स्थिति में डाला। इस दौरान सह-पायलट क्लाइव कुंदर, जो विमान उड़ा रहे थे, ने इस कदम पर हैरानी जताई और तनाव में दिखे, जबकि Captain शांत रहे। हालांकि, AAIB की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि यह बातचीत किस पायलट ने शुरू की, और न ही यह पुष्टि हुई है कि स्विच जानबूझकर बंद किए गए थे।

फ्यूल कंट्रोल स्विच बोइंग 787 के कॉकपिट में थ्रॉटल लीवर के ठीक पीछे होते हैं और इन्हें गलती से हिलाना मुश्किल है। इन स्विचों में एक स्प्रिंग-लोडेड लॉकिंग मैकेनिज्म होता है, जिसके लिए स्विच को पहले ऊपर उठाना पड़ता है और फिर ‘रन’ से ‘कटऑफ’ स्थिति में ले जाना पड़ता है। विमानन विशेषज्ञ डेविड सौसी के अनुसार, इन स्विचों को गलती से बंद करना “बेहद दुर्लभ” है।

2018 में अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (FAA) ने बोइंग 737 और 787 विमानों के फ्यूल स्विचों में लॉकिंग फीचर के डिसएंगेज होने की संभावना पर एक सलाहकारी बुलेटिन जारी किया था। हालांकि, यह बुलेटिन केवल सलाहकारी था, न कि अनिवार्य। Air India ने इस बुलेटिन के आधार पर अपने विमान VT-ANB की जांच नहीं की थी। AAIB ने पाया कि 2023 में थ्रॉटल कंट्रोल मॉड्यूल बदलने के बाद इस विमान के फ्यूल स्विच में कोई खराबी दर्ज नहीं हुई थी।

हादसे के बाद विमान का रैम एयर टरबाइन (RAT) तैनात हो गया, जो इंजन विफलता या हाइड्रोलिक सिस्टम की गंभीर कमी का संकेत है। RAT ने सीमित बिजली प्रदान की, लेकिन यह विमान को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं थी। इसके अलावा, लैंडिंग गियर नीचे की स्थिति में पाया गया, जो यह दर्शाता है कि विमान को ऊंचाई हासिल करने में दिक्कत हो रही थी।

पायलटों ने फ्यूल स्विच को 10-12 सेकंड बाद फिर से ‘रन’ स्थिति में लाने की कोशिश की, जिससे एक इंजन में रीलाइट शुरू हुआ, लेकिन दूसरा इंजन ठीक नहीं हो सका। इसके बाद पायलटों ने “मेडे मेडे मेडे” का संकट कॉल किया, लेकिन तब तक विमान हवाई अड्डे की सीमा के बाहर दुर्घटनाग्रस्त हो चुका था।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में Captain पर जानबूझकर फ्यूल बंद करने का आरोप लगाया गया, जिसे भारतीय कमर्शियल पायलट्स एसोसिएशन (ICPA) और एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ALPA) ने सिरे से खारिज किया। इन संगठनों ने इसे “लापरवाही भरा और आधारहीन” दावा बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। पायलटों का कहना है कि दोनों पायलटों ने उड़ान से पहले ब्रेथलाइजर टेस्ट पास किया था और पर्याप्त आराम के बाद पूरी तरह फिट थे।

हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों ने जांच में पारदर्शिता और दोषियों को सजा देने की मांग की है। नरेश महेश्वरी, जिनके बेटे की इस हादसे में मौत हुई, ने कहा, “हम चाहते हैं कि ऐसी लापरवाही से कोई और न मरे।” एक अन्य पीड़ित के रिश्तेदार नीरज पटेल ने सरकार से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की।

Air India Flight AI-171 का हादसा भारत की सबसे भीषण विमानन त्रासदियों में से एक है। कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डिंग और फ्यूल स्विच की स्थिति ने जांच को एक जटिल मोड़ पर ला दिया है। क्या यह तकनीकी खराबी थी, मानवीय गलती थी, या जानबूझकर किया गया कृत्य? इस सवाल का जवाब AAIB की अंतिम रिपोर्ट, जो जून 2026 तक आने की उम्मीद है, में मिल सकता है। तब तक, यह हादसा विमानन सुरक्षा और तकनीकी जांच के महत्व को रेखांकित करता है। भारत, अमेरिका और ब्रिटेन के विशेषज्ञों की संयुक्त जांच से उम्मीद है कि इस त्रासदी के सही कारण सामने आएंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा।

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