UPI Auto Pay का छिपा खेल: बिना बताए कटते हैं पैसे, OTT से रिचार्ज तक सब्सक्रिप्शन भूलने पर अचानक मैसेज आ जाते हैं, जानें इसका उपाय। 

UPI के बढ़ते उपयोग के साथ एक आम समस्या सामने आ रही है जहां उपयोगकर्ताओं को अचानक बैंक से मैसेज मिलता है कि उनके खाते से पैसे कट

Jan 12, 2026 - 12:45
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UPI Auto Pay का छिपा खेल: बिना बताए कटते हैं पैसे, OTT से रिचार्ज तक सब्सक्रिप्शन भूलने पर अचानक मैसेज आ जाते हैं, जानें इसका उपाय। 
UPI Auto Pay का छिपा खेल: बिना बताए कटते हैं पैसे, OTT से रिचार्ज तक सब्सक्रिप्शन भूलने पर अचानक मैसेज आ जाते हैं, जानें इसका उपाय। 

UPI के बढ़ते उपयोग के साथ एक आम समस्या सामने आ रही है जहां उपयोगकर्ताओं को अचानक बैंक से मैसेज मिलता है कि उनके खाते से पैसे कट गए हैं। कई बार उपयोगकर्ता ने न तो कोई ऑनलाइन खरीदारी की होती है और न ही किसी को पैसे ट्रांसफर किए होते हैं। फिर भी पेमेंट का मैसेज आ जाता है और समझ नहीं आता कि यह राशि कहां गई। इसकी मुख्य वजह UPI अकाउंट से जुड़ा Auto Pay सब्सक्रिप्शन होता है जो उपयोगकर्ता ने कभी चालू किया होता है और बाद में भूल जाते हैं।

Auto Pay एक सुविधा है जो UPI पर आधारित है और एनपीसीआई द्वारा शुरू की गई है। यह उपयोगकर्ताओं को बार-बार मैन्युअल पेमेंट करने की जरूरत से बचाती है। जब कोई व्यक्ति किसी सेवा के लिए Auto Pay सेट करता है तो पहली बार वह मैन्युअल रूप से पेमेंट करता है और उसके बाद हर महीने या तय अंतराल पर पेमेंट अपने आप कट जाता है। यह सुविधा ओटीटी प्लेटफॉर्म, म्यूजिक स्ट्रीमिंग, मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल, इंश्योरेंस प्रीमियम, क्रेडिट कार्ड बिल, न्यूज सब्सक्रिप्शन और कई अन्य डिजिटल सेवाओं पर उपलब्ध है।

उपयोगकर्ता अक्सर फ्री ट्रायल या डिस्काउंट ऑफर के लालच में Auto Pay चालू कर देते हैं। ट्रायल पीरियड खत्म होने के बाद भी अगर Auto Pay बंद नहीं किया जाता तो अगले महीने से पैसे अपने आप कटने लगते हैं। कई बार उपयोगकर्ता को यह पता ही नहीं चलता कि उनका Auto Pay चालू है क्योंकि बैंक से मैसेज आता है लेकिन वे इसे अनदेखा कर देते हैं या भूल जाते हैं। जब महीनों बाद एक साथ कई सब्सक्रिप्शन के पेमेंट कटते हैं तो खाते में अचानक कमी दिखती है।

Auto Pay सेट करने के लिए सेवा प्रदाता उपयोगकर्ता से UPI आईडी के माध्यम से मैंडेट बनवाता है। यह मैंडेट एक प्रकार का स्थायी निर्देश होता है जो बैंक को बताता है कि तय तारीख पर तय राशि सेवा प्रदाता को ट्रांसफर कर दें। मैंडेट में अमाउंट, फ्रीक्वेंसी, वैलिडिटी पीरियड और मैक्सिमम अमाउंट जैसी जानकारी शामिल होती है। एक बार मैंडेट अप्रूव होने के बाद पेमेंट हर बार यूजर की अनुमति के बिना हो जाता है।

सबसे बड़ी समस्या तब आती है जब उपयोगकर्ता सेवा का उपयोग बंद कर देता है लेकिन Auto Pay मैंडेट रद्द नहीं करता। सेवा प्रदाता हर महीने पैसे लेता रहता है और उपयोगकर्ता को पता तब चलता है जब बैंक बैलेंस कम दिखता है। कई मामलों में उपयोगकर्ता सालों तक अनजाने में पैसे देते रहते हैं। कुछ प्लेटफॉर्म ट्रायल के बाद ऑटो रिन्यूअल कर देते हैं और रद्द करने का विकल्प छिपा हुआ या जटिल रखते हैं।

Auto Pay मैंडेट रद्द करने के लिए उपयोगकर्ता को बैंक ऐप या UPI ऐप में जाना होता है। वहां मैनेज Auto Pay या मैंडेट सेक्शन में जाकर सभी एक्टिव मैंडेट देखे जा सकते हैं। उपयोगकर्ता जिस मैंडेट को रद्द करना चाहता है उसे चुनकर कन्फर्म कर सकता है। रद्द होने के बाद अगले साइकिल से पेमेंट बंद हो जाता है। कुछ बैंक मैंडेट की लिस्ट ईमेल या एसएमएस से भी भेजते हैं लेकिन ज्यादातर उपयोगकर्ता इसे चेक नहीं करते।

बैंक और UPI ऐप्स में Auto Pay मैंडेट की जानकारी अलग-अलग तरीके से उपलब्ध होती है। गूगल पे, फोनपे, पेटीएम, पेटीएम और अन्य ऐप्स में अलग सेक्शन होता है जहां सभी एक्टिव और पिछले मैंडेट दिखते हैं। उपयोगकर्ता को नियमित रूप से इन मैंडेट को चेक करना चाहिए ताकि अनचाहे पेमेंट से बचा जा सके। अगर कोई अनजान मैंडेट दिखे तो उसे तुरंत रद्द कर देना चाहिए।

कई बार उपयोगकर्ता को लगता है कि उनका डेबिट कार्ड या बैंक अकाउंट हैक हो गया है लेकिन ज्यादातर मामलों में यह Auto Pay सब्सक्रिप्शन की वजह से होता है। सेवा प्रदाता जब पेमेंट लेते हैं तो बैंक से मैसेज आता है जिसमें पेमेंट का कारण भी लिखा होता है लेकिन कई बार उपयोगकर्ता इसे ध्यान से नहीं पढ़ते। मैसेज में सेवा का नाम और राशि स्पष्ट रूप से होती है लेकिन अगर उपयोगकर्ता ने कई सब्सक्रिप्शन लिए हैं तो वे भूल जाते हैं।

इस समस्या से बचने के लिए उपयोगकर्ताओं को हर नए सब्सक्रिप्शन के समय Auto Pay की शर्तें ध्यान से पढ़नी चाहिए। ट्रायल के बाद ऑटो रिन्यूअल की जानकारी चेक करनी चाहिए और जरूरत न होने पर तुरंत रद्द कर देना चाहिए। अगर किसी सेवा का उपयोग बंद हो गया है तो मैंडेट रद्द करने से पहले पेमेंट हिस्ट्री चेक कर लेना चाहिए।

Auto Pay एक सुविधाजनक विकल्प है लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है। उपयोगकर्ता को नियमित रूप से अपने UPI मैंडेट की निगरानी करनी चाहिए ताकि अनचाहे पेमेंट से बचा जा सके। बैंक भी समय-समय पर मैंडेट की सूची भेजते हैं लेकिन उपयोगकर्ता को खुद सक्रिय रहना जरूरी है।

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