एमआईटी इंजीनियर्स ने विकसित की चिप वाली दवा, पेट में जाकर रेडियो सिग्नल भेजती है, दवा ली गई या नहीं यह कन्फर्म करती है।
मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इंजीनियर्स ने एक ऐसी स्मार्ट पिल विकसित की है जो निगलने के बाद पेट से रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल भेजक
मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के इंजीनियर्स ने एक ऐसी स्मार्ट पिल विकसित की है जो निगलने के बाद पेट से रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल भेजकर कन्फर्म करती है कि मरीज ने दवा ली है या नहीं। यह सिस्टम मौजूदा पिल कैप्सूल में शामिल किया जा सकता है तथा इसमें बायोडिग्रेडेबल रेडियो फ्रीक्वेंसी एंटीना होता है। सिग्नल भेजने के बाद अधिकांश कंपोनेंट्स पेट में विघटित हो जाते हैं जबकि एक छोटा आरएफ चिप पाचन तंत्र से बाहर निकल जाता है। यह तकनीक दवा लेने की पुष्टि करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी का उपयोग करती है जो शरीर के बाहर से आसानी से डिटेक्ट की जा सकती है तथा मनुष्यों के लिए सुरक्षित है।
कैप्सूल की बाहरी परत जेलाटिन से बनी होती है जिस पर सेल्यूलोज तथा मोलिब्डेनम या टंगस्टन की कोटिंग लगाई जाती है जो रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल को ब्लॉक करती है। निगलने के बाद पेट के एसिड से यह कोटिंग घुल जाती है तथा डिवाइस एक्टिवेट होकर 915 मेगाहर्ट्ज पर सिग्नल ट्रांसमिट करता है। एक्सटर्नल रिसीवर 2 फीट तक की दूरी से सिग्नल प्राप्त कर सकता है तथा 10 मिनट के अंदर पुष्टि हो जाती है। यह सिस्टम SAFARI नाम से जाना जाता है जो Smart Adherence via FARaday cage And Resorbable Ingestible का संक्षिप्त रूप है तथा Faraday cage की तरह काम करता है।
इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य मरीजों की दवा लेने की अनुपालन को बेहतर बनाना है क्योंकि दवा न लेना स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा पैदा करता है तथा अमेरिका में ही प्रतिवर्ष 125000 मौतें तथा 100 अरब डॉलर से अधिक का अतिरिक्त खर्च होता है। पारंपरिक तरीके जैसे सेल्फ रिपोर्टिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक पिल बॉटल्स में कमियां हैं जबकि यह डिवाइस प्रत्यक्ष रूप से इंगेस्टेशन की पुष्टि करता है। पहले विकसित आरएफ आधारित डिवाइसेज में कंपोनेंट्स बॉडी में स्थायी रूप से रह जाते थे लेकिन इस नई प्रणाली में जिंक एंटीना तथा अन्य सामग्री जैसे सेल्यूलोज सुरक्षित रूप से विघटित हो जाते हैं।
पशुओं पर परीक्षण में यह साबित हुआ कि कैप्सूल पेट में सिग्नल भेजते हैं तथा 7 दिनों के अंदर विघटित हो जाते हैं बिना किसी हानिकारक रसायन संचय के। सुअरों पर किए गए प्रयोगों में ब्लड में जिंक तथा मोलिब्डेनम स्तर पहले दिन बढ़े तथा फिर सामान्य हो गए। डिवाइस में बैटरी नहीं होती तथा यह पैसिव आरएफआईडी सिस्टम पर आधारित है। यदि मानव उपयोग के लिए विकसित किया गया तो वेयरेबल डिवाइस सिग्नल प्राप्त कर स्वास्थ्य टीम को ट्रांसमिट कर सकता है।
यह विकास उन मरीजों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है जहां दवा न लेना गंभीर परिणाम देता है जैसे ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता जो इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेते हैं। शोधकर्ताओं ने प्रीक्लिनिकल अध्ययन जारी रखने तथा जल्द ही मानव परीक्षण करने की योजना बनाई है। यह तकनीक पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट कम करती है तथा लंबे समय तक बॉडी में रहने वाले डिवाइसेज की आवश्यकता समाप्त करती है। पिछले प्रयासों में डिजिटल पिल्स जैसे Abilify MyCite में सेंसर होता था जो पेट में एक्टिवेट होकर पैच को सिग्नल भेजता था लेकिन उनमें स्थायी कंपोनेंट्स थे। नई बायोरिसॉर्बेबल तकनीक इस समस्या को हल करती है तथा विभिन्न दवाओं के साथ एकीकृत की जा सकती है जहां पिल को बदलना संभव नहीं होता। शोध में Novo Nordisk तथा अन्य संस्थानों का सहयोग रहा तथा यह Nature Communications में प्रकाशित हुआ।
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