Special : 117 साल पुराना रजिस्ट्रेशन कानून होगा खत्म, जमीन की खरीद-बिक्री अब ऑनलाइन। 

केंद्र सरकार ने भारत में संपत्ति की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 117 साल...

May 29, 2025 - 11:44
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Special : 117 साल पुराना रजिस्ट्रेशन कानून होगा खत्म, जमीन की खरीद-बिक्री अब ऑनलाइन। 

केंद्र सरकार ने भारत में संपत्ति की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आधुनिक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। 117 साल पुराने रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 को बदलने के लिए ‘द रजिस्ट्रेशन बिल, 2025’ का मसौदा तैयार किया गया है। इस नए विधेयक का उद्देश्य संपत्ति के रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह ऑनलाइन करना, दस्तावेजों का डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित करना और धोखाधड़ी पर रोक लगाना है। यह प्रस्तावित कानून न केवल प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत भूमि संसाधन विभाग ने इस मसौदे पर जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं। 

  • रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 का इतिहास

रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 ब्रिटिश शासनकाल में लागू किया गया था और यह भारत में संपत्ति रजिस्ट्रेशन की आधारशिला रहा है। इस कानून ने संपत्ति के स्वामित्व और हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को परिभाषित किया। यह अधिनियम मुख्य रूप से जमीन, भवन, और अन्य अचल संपत्तियों के दस्तावेजों के रजिस्ट्रेशन को नियंत्रित करता है। इसके तहत, संपत्ति के हस्तांतरण के लिए उप-रजिस्ट्रार कार्यालयों में भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करना और रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। हालांकि, यह प्रक्रिया समय लेने वाली, जटिल, और धोखाधड़ी की संभावनाओं से भरी हुई है।

पिछले कुछ दशकों में, कई राज्यों ने इस कानून में संशोधन कर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सुविधा शुरू की है। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, और कर्नाटक जैसे राज्यों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाया है। फिर भी, पूरे देश में एक समान प्रणाली की कमी और पुराने कानून की सीमाओं ने केंद्र सरकार को इस अधिनियम को पूरी तरह बदलने के लिए प्रेरित किया।

  • नए रजिस्ट्रेशन बिल, 2025 की मुख्य विशेषताएं

‘द रजिस्ट्रेशन बिल, 2025’ का मसौदा केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है। इस विधेयक की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: नया कानून संपत्ति के रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह ऑनलाइन करने का प्रावधान करता है। खरीदार और विक्रेता को अब उप-रजिस्ट्रार कार्यालयों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय, एक डिजिटल पोर्टल के माध्यम से सभी दस्तावेज अपलोड किए जाएंगे।
आधार-आधारित सत्यापन: रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में आधार कार्ड के माध्यम से खरीदार और विक्रेता की पहचान का सत्यापन अनिवार्य होगा। इससे फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी की संभावना कम होगी।
डिजिटल हस्ताक्षर और दस्तावेज संरक्षण: सभी दस्तावेजों पर डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग होगा, और इनका डिजिटल संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे कागजी दस्तावेजों के खोने या क्षतिग्रस्त होने का खतरा खत्म होगा।

पारदर्शिता और जवाबदेही: ऑनलाइन प्रणाली से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की निगरानी आसान होगी। इससे भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर अंकुश लगेगा, जो पारंपरिक प्रणाली में आम थी।
राज्य सरकारों की भूमिका: चूंकि ‘जमीन’ भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के राज्य सूची में आती है, इसलिए केंद्र सरकार को नए कानून को लागू करने के लिए राज्यों के साथ परामर्श करना होगा। हालांकि, केंद्र सरकार ने इसे समवर्ती सूची के तहत लाने की कोशिश की है ताकि एकरूपता सुनिश्चित हो।
प्रस्तावित कानून का महत्व

यह नया विधेयक भारत में संपत्ति की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को क्रांतिकारी रूप से बदलने की क्षमता रखता है। इसके कुछ प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

समय और लागत की बचत: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से खरीदारों और विक्रेताओं को उप-रजिस्ट्रार कार्यालयों में बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे समय और यात्रा लागत की बचत होगी।
धोखाधड़ी पर रोक: आधार-आधारित सत्यापन और डिजिटल हस्ताक्षर से फर्जी दस्तावेजों और स्वामित्व विवादों की संभावना कम होगी। उदाहरण के लिए, कई मामलों में, एक ही संपत्ति को कई लोगों को बेचने की घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें यह प्रणाली रोक सकती है।
डिजिटल संरक्षण: कागजी दस्तावेजों के खोने या क्षतिग्रस्त होने की समस्या खत्म होगी। डिजिटल रिकॉर्ड स्थायी और आसानी से सुलभ होंगे।
वैश्विक मानकों के अनुरूप: यह कदम भारत को उन देशों की श्रेणी में लाएगा, जहां संपत्ति रजिस्ट्रेशन पूरी तरह डिजिटल है, जैसे सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया।

  • वर्तमान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया की चुनौतियां

वर्तमान रजिस्ट्रेशन अधिनियम, 1908 के तहत, संपत्ति रजिस्ट्रेशन में कई चुनौतियां हैं। उप-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लंबी कतारें, भ्रष्टाचार, और दस्तावेजों के सत्यापन में देरी आम समस्याएं हैं। इसके अलावा, पावर ऑफ अटॉर्नी (POA) के दुरुपयोग के कारण धोखाधड़ी के मामले बढ़े हैं। उदाहरण के लिए, तमिलनाडु में हाल ही में POA धारकों को यह साबित करना अनिवार्य किया गया कि मूल मालिक जीवित है, ताकि फर्जी लेनदेन रोके जा सकें।

कई राज्यों में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क की दरें भी अलग-अलग हैं, जिससे खरीदारों को भ्रम होता है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में स्टांप ड्यूटी संपत्ति के मूल्य का 5-6% है, जबकि तमिलनाडु में यह 7% तक हो सकती है। नए विधेयक में इन असमानताओं को कम करने और एक समान प्रणाली लागू करने की कोशिश की जा रही है।

  • कानूनी और कर संबंधी पहलू

संपत्ति की खरीद-बिक्री में करों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। भारतीय आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 194IA के तहत, 50 लाख रुपये से अधिक की अचल संपत्ति (कृषि भूमि को छोड़कर) की खरीद पर खरीदार को 1% TDS (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स) काटना अनिवार्य है। यह राशि विक्रेता की ओर से सरकार को जमा की जाती है। इसके अलावा, संपत्ति बिक्री से होने वाला पूंजीगत लाभ (कैपिटल गेन) भी कर योग्य है। यदि संपत्ति 24 महीने से अधिक समय तक रखी गई है, तो यह दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) माना जाता है और 12.5% (बिना इंडेक्सेशन) या 20% (इंडेक्सेशन के साथ) की दर से कर लगता है।

नए विधेयक में इन कर प्रक्रियाओं को भी डिजिटल पोर्टल के साथ एकीकृत करने की योजना है। उदाहरण के लिए, TDS जमा करने और फॉर्म 26QB दाखिल करने की प्रक्रिया को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सिस्टम के साथ जोड़ा जा सकता है, जिससे कर अनुपालन आसान होगा।

Also Read- 28 मई 2025 को भारत में सोने-चांदी की कीमतों में मामूली गिरावट, कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं।

  • कृषि भूमि पर प्रभाव

कृषि भूमि की खरीद-बिक्री पर विशेष नियम लागू होते हैं, जो राज्य सरकारों द्वारा तय किए जाते हैं। कई राज्यों में, केवल किसान या कृषि पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति ही कृषि भूमि खरीद सकते हैं। नए विधेयक में कृषि भूमि के रजिस्ट्रेशन को भी डिजिटल करने की योजना है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि क्या गैर-किसानों के लिए खरीद पर प्रतिबंधों में बदलाव होगा। इसके अलावा, कृषि भूमि की बिक्री से होने वाला लाभ पूंजीगत लाभ कर से मुक्त है, बशर्ते यह ग्रामीण क्षेत्र में हो।

नए विधेयक के लागू होने में कई चुनौतियां हैं। पहली चुनौती डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुंच की कमी है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। दूसरी, राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना, क्योंकि भूमि राज्य का विषय है। तीसरी, पुराने रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होगी। फिर भी, सरकार ने इस दिशा में पहले से ही कई कदम उठाए हैं, जैसे भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण और आधार-लिंक्ड सत्यापन।

‘द रजिस्ट्रेशन बिल, 2025’ भारत में संपत्ति की खरीद-बिक्री को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 117 साल पुराने रजिस्ट्रेशन अधिनियम को बदलकर, यह विधेयक न केवल प्रक्रिया को सरल बनाएगा, बल्कि धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगाएगा। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, आधार-आधारित सत्यापन, और डिजिटल दस्तावेज संरक्षण जैसे प्रावधान इसे आधुनिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाते हैं। हालांकि, इसके सफल कार्यान्वयन के लिए राज्यों के साथ समन्वय, डिजिटल बुनियादी ढांचे का विकास, और जन जागरूकता जरूरी होगी। यह कदम डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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