बाबरी मस्जिद शिलान्यास के तुरंत बाद TMC निलंबित विधायक हुमायूं कबीर का AIMIM संग गठबंधन का ऐलान, बंगाल चुनाव में BJP-TMC को देंगे चुनौती। 

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ आ गया है, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने

Dec 8, 2025 - 13:00
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बाबरी मस्जिद शिलान्यास के तुरंत बाद TMC निलंबित विधायक हुमायूं कबीर का AIMIM संग गठबंधन का ऐलान, बंगाल चुनाव में BJP-TMC को देंगे चुनौती। 
बाबरी मस्जिद शिलान्यास के तुरंत बाद TMC निलंबित विधायक हुमायूं कबीर का AIMIM संग गठबंधन का ऐलान, बंगाल चुनाव में BJP-TMC को देंगे चुनौती। 

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया मोड़ आ गया है, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद जैसे ढांचे के शिलान्यास के कुछ ही घंटों बाद ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ गठबंधन की घोषणा की। यह घटना 6 दिसंबर 2025 को मुरशिदाबाद जिले के बेल्डंगा में हुई, जहां कबीर ने बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद का शिलान्यास किया। शिलान्यास के बाद उन्होंने मीडिया को बताया कि ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ बातचीत चल रही है और दोनों मिलकर आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा तथा TMC को रोकने की रणनीति बना रहे हैं। कबीर ने कहा कि उनका उद्देश्य न तो भाजपा को सत्ता में आने देना है और न ही TMC को फिर से सरकार बनाने देना। यह बयान उस समय आया जब पूरा क्षेत्र सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में था और राजनीतिक तनाव चरम पर था। हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वे मूल रूप से कांग्रेस से जुड़े थे, लेकिन 2011 में TMC में शामिल हो गए। 2015 में TMC ने उन्हें छह वर्ष के लिए निलंबित कर दिया था, जिसके बाद 2018 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। 2019 के लोकसभा चुनाव में वे मुरशिदाबाद से भाजपा के टिकट पर लड़े, लेकिन हार गए। उसके बाद फिर TMC में वापसी की और 2021 के विधानसभा चुनाव में भरतपुर सीट से विधायक बने। कबीर ने TMC के खिलाफ कई बार बयान दिए, जिसमें जिला अधिकारियों को आरएसएस के एजेंट बताने जैसे आरोप शामिल थे। हाल ही में उन्होंने TMC नेतृत्व पर मुस्लिम समुदाय के प्रति उपेक्षा का आरोप लगाया और मस्जिद निर्माण की योजना की घोषणा की। इस योजना ने TMC को असहज कर दिया, क्योंकि यह 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस की वर्षगांठ पर थी।

शिलान्यास की योजना की घोषणा कबीर ने नवंबर 2025 के अंत में की थी। उन्होंने बेल्डंगा में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति बनाने का ऐलान किया, जो अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र में था। पोस्टरों में शिलान्यास की तारीख 6 दिसंबर बताई गई, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ गया। कुछ पोस्टर फाड़ दिए गए, और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। राजभवन ने राज्य सरकार को कानून-व्यवस्था की चिंता जताई, लेकिन कबीर ने इसे आधारहीन बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कानून-व्यवस्था बनाए रखना। मुरशिदाबाद प्रशासन ने शिलान्यास के लिए औपचारिक अनुमति नहीं दी थी, लेकिन कबीर ने इसे अंजाम दिया। शिलान्यास के दौरान स्थानीय ग्रामीण ईंटें और निर्माण सामग्री दान में लाए, जो घटना की लोकप्रियता दर्शाता है। 6 दिसंबर को शिलान्यास के ठीक बाद कबीर ने AIMIM गठबंधन का बयान दिया। उन्होंने कहा कि ओवैसी ने उन्हें हैदराबाद आने का न्योता दिया है और गठबंधन की बातचीत अंतिम चरण में है। कबीर ने दावा किया कि उनकी नई पार्टी 22 दिसंबर को लॉन्च होगी और AIMIM के साथ मिलकर 294 में से 135 विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। इनमें 90 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार होंगे। उनका लक्ष्य हंग असेंबली बनाना है, ताकि वे किंगमेकर की भूमिका निभा सकें। कबीर ने कहा कि TMC का मुस्लिम वोट बैंक खत्म हो जाएगा और वे भाजपा तथा TMC दोनों को हराएंगे। उन्होंने TMC को आरएसएस मुखिया बताया और कहा कि मुख्यमंत्री मंदिरों पर सैकड़ों करोड़ खर्च करती हैं, लेकिन मस्जिद निर्माण का विरोध करती हैं।

TMC ने कबीर के बाबरी मस्जिद वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। 4 दिसंबर को पार्टी की अनुशासन समिति ने उन्हें निलंबित कर दिया। कोलकाता के मेयर ने कहा कि पार्टी ने पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन कबीर नहीं माने। TMC ने स्पष्ट किया कि पार्टी धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर चलती है और कबीर का कदम पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहा था। एक मंत्री ने मस्जिद का नाम बाबरी रखने पर सवाल उठाया और कहा कि मुस्लिम मुद्दों का समाधान नामकरण से नहीं होता। विद्वानों को नाम तय करना चाहिए। TMC ने कबीर के AIMIM गठबंधन बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन आंतरिक सर्कल में इसे वोट बैंक पर हमला माना जा रहा है।

भाजपा ने इस पूरे घटनाक्रम को TMC की साजिश करार दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि TMC जानबूझकर तनाव भड़का रही है, ताकि चुनाव से पहले ध्रुवीकरण हो। एक भाजपा नेता ने कहा कि कबीर को TMC का समर्थन प्राप्त है, अन्यथा वे इतना हंगामा नहीं कर पाते। भाजपा ने कबीर को अपना कोर टीम सदस्य बताया और कहा कि वे सुवेंदु अधिकारी के करीबी हैं। कबीर के पूर्व भाजपा सदस्य होने का जिक्र करते हुए भाजपा ने TMC पर पलटवार किया। कबीर ने भाजपा पर भी निशाना साधा और कहा कि वे भाजपा को सत्ता में नहीं आने देंगे। भाजपा ने शिलान्यास को उकसावे के रूप में देखा और कहा कि यह मुरशिदाबाद में दंगे भड़का सकता था। AIMIM ने कबीर के गठबंधन प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि कबीर भाजपा के कोर टीम के सदस्य हैं और सुवेंदु अधिकारी तथा अमित शाह से जुड़े हैं। AIMIM ने गठबंधन की कोई संभावना नहीं बताई। कबीर ने इसका जवाब देते हुए कहा कि वे प्रवक्ता को नहीं जानते, लेकिन ओवैसी के करीबी लोगों ने संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी बंगाल में चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो उन्हें उनकी जरूरत है। कबीर ने दावा किया कि ओवैसी को भी भाजपा का एजेंट कहा जाता है, लेकिन यह राजनीति का हिस्सा है। AIMIM ने पहले भी बंगाल में सीमित स्तर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन ज्यादा सफलता नहीं मिली। कबीर का प्रस्ताव AIMIM के लिए नया अवसर हो सकता था, लेकिन पार्टी ने इसे ठुकरा दिया।

कबीर ने अपनी नई पार्टी के लिए फरवरी 2026 में मुरशिदाबाद में एक बड़ा आयोजन करने की योजना बताई, जहां लाखों मुसलमान कुरान पाठ करेंगे। उन्होंने कहा कि यह भाजपा के गीता पाठ कार्यक्रम से प्रेरित नहीं है। कबीर ने दावा किया कि पूरे भारत के उद्योगपति और मुस्लिम समुदाय से धनराशि मिलेगी, जो मस्जिद निर्माण में सहायता करेगी। उन्होंने कहा कि वे विधायक पद से इस्तीफा नहीं देंगे, क्योंकि भरतपुर के लोग उन्हें रोक रहे हैं। कबीर का यह बयान आगामी 2026 विधानसभा चुनावों को प्रभावित कर सकता है, खासकर मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में। मुरशिदाबाद जिला अल्पसंख्यक आबादी वाला है, जहां वोट बैंक की राजनीति महत्वपूर्ण है। शिलान्यास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही। पुलिस ने हाईवे पर निगरानी रखी और कबीर ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन रोकता है, तो रेजिनागर से बहारामपुर तक हाईवे ब्लॉक हो जाएगा। घटना शांतिपूर्ण रही, लेकिन स्थानीय स्तर पर बहस छिड़ गई। कबीर ने कहा कि उनका संदेश सरल है- आग से मत खेलो। यह बयान प्रशासन के खिलाफ था। कालकत्ता हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर एक जनहित याचिका दायर हुई, जिसकी सुनवाई 5 दिसंबर को हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि कानून-व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कबीर ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया, लेकिन कहा कि वे अपने फैसले पर अडिग हैं।

कबीर के बयान ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि TMC और भाजपा दोनों धर्म का राजनीतिकरण कर रही हैं। TMC मंदिर बनवा रही है, जबकि भाजपा राम मंदिर का प्रचार कर रही है। कबीर ने दावा किया कि उनकी पार्टी मुस्लिम समुदाय की आवाज बनेगी और 2026 चुनाव में TMC का वोट बैंक बिखेर देगी। उन्होंने कहा कि तस्वीर अभी बाकी है। कबीर का AIMIM गठबंधन प्रस्ताव, भले ही खारिज हो गया, लेकिन यह दर्शाता है कि वे अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा ने इसे TMC की रणनीति बताया, जबकि CPI(M) ने बंगाल की घुमावदार राजनीति पर टिप्पणी की। एक CPI(M) नेता ने कहा कि एक पूर्व TMC नेता अब भाजपा में हिंदू जुटा रहा है, जबकि कबीर पूर्व भाजपा सदस्य होने के बावजूद मुस्लिम भावनाओं को उभार रहा है। मुरशिदाबाद जिले में बेल्डंगा साम्प्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। यहां TMC मजबूत है, लेकिन भाजपा वोट हिस्सा बढ़ा रही है। कबीर का शिलान्यास इसी संवेदनशीलता का फायदा उठाने का प्रयास लगता है। स्थानीय TMC कार्यकर्ता ने कहा कि प्रतीकवाद कार्रवाई से तेजी से जुटाता है। कबीर ने पहले भी नई पार्टी लॉन्च करने की बात कही थी, लेकिन अब AIMIM का नाम जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि वे 135 सीटों पर लड़ेंगे और हंग संसद में किंगमेकर बनेंगे। कबीर ने ओवैसी से बातचीत का जिक्र किया, लेकिन AIMIM की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई।

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