एनडीए बिहार से राम नाथ ठाकुर को राज्यसभा में दोबारा भेजने की तैयारी में।

एनडीए बिहार में राज्यसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति लगभग तय कर चुकी है और जेडीयू के वरिष्ठ नेता राम नाथ ठाकुर को एक और

Feb 25, 2026 - 13:04
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एनडीए बिहार से राम नाथ ठाकुर को राज्यसभा में दोबारा भेजने की तैयारी में।
एनडीए बिहार से राम नाथ ठाकुर को राज्यसभा में दोबारा भेजने की तैयारी में।
  • विभाजित विपक्ष के बीच एनडीए को पांच में से सभी सीटें जीतने का मजबूत दावा
  • 9 अप्रैल को समाप्त हो रहे पांच राज्यसभा सदस्यों में ठाकुर, हरिवंश, प्रेम चंद गुप्ता, अमरेंद्र धारी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा शामिल

एनडीए बिहार में राज्यसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति लगभग तय कर चुकी है और जेडीयू के वरिष्ठ नेता राम नाथ ठाकुर को एक और कार्यकाल देने का फैसला लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के पुत्र राम नाथ ठाकुर को दोबारा नामांकित करने की तैयारी है, ताकि अत्यंत पिछड़े वर्गों (ईबीसी) में पार्टी की पकड़ मजबूत रहे। एनडीए के पास विधानसभा में 202 विधायकों का समर्थन है, जिससे चार सीटें लगभग पक्की मानी जा रही हैं। पांचवीं सीट के लिए भी एनडीए को केवल तीन अतिरिक्त विधायकों की जरूरत होगी, जो विभाजित विपक्ष की स्थिति को देखते हुए आसानी से मिल सकती है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह भी जेडीयू से दोबारा चुने जाने की संभावना है। 9 अप्रैल 2026 को पांच सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिसमें जेडीयू से राम नाथ ठाकुर और हरिवंश, राजद से प्रेम चंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा से उपेंद्र कुशवाहा शामिल हैं।

एनडीए की रणनीति में राम नाथ ठाकुर को दोबारा भेजना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वे कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख चेहरे हैं। कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर भारत रत्न दिए जाने के बाद ईबीसी और पिछड़े वर्गों में उनकी राजनीतिक पूंजी और बढ़ गई है। जेडीयू ठाकुर को राज्यसभा में रखकर इस समुदाय में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है, खासकर तब जब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ठाकुर का राजनीतिक करियर लंबा रहा है और वे कई बार विधायक व मंत्री रह चुके हैं। उनकी दोबारा नामांकन से पार्टी को ईबीसी वोट बैंक में मजबूती मिलेगी। एनडीए ने यह भी तय किया है कि जेडीयू को दो सीटें और भाजपा को दो सीटें मिलेंगी, जबकि पांचवीं सीट पर भी दावा मजबूत है।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए उम्मीदवार को कम से कम 41 वोट चाहिए। एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जो चार सीटों के लिए पर्याप्त हैं। पांचवीं सीट के लिए तीन अतिरिक्त वोट चाहिए, जो महागठबंधन के भीतर मतभेदों के कारण आसानी से मिल सकते हैं। राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, एआईएमआईएम के पास 5 और बसपा के पास 1 विधायक है। कुल मिलाकर विपक्ष के पास 41 विधायक हैं, लेकिन संयुक्त उम्मीदवार पर सहमति बनना लगभग असंभव दिख रहा है। राजद, कांग्रेस, वाम दल और छोटे दलों के बीच आपसी मतभेद और नेतृत्व को लेकर असहमति है। इस स्थिति में एनडीए को पांचवीं सीट भी जीतने का पूरा भरोसा है।

जेडीयू ने राम नाथ ठाकुर को दोबारा भेजने का फैसला इसलिए भी लिया है क्योंकि वे पार्टी के वरिष्ठतम और सम्मानित नेताओं में से एक हैं। कर्पूरी ठाकुर की विरासत को आगे बढ़ाने में ठाकुर की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। राज्यसभा में उनकी मौजूदगी से जेडीयू को ईबीसी और पिछड़े वर्गों में संदेश देने में मदद मिलेगी। हरिवंश नारायण सिंह को भी दोबारा भेजने की संभावना है, क्योंकि वे राज्यसभा के उपसभापति हैं और पार्टी के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भाजपा अपनी दो सीटों पर मजबूत उम्मीदवार उतारेगी, जिनमें से एक संभावित नाम वर्तमान सांसदों में से हो सकता है। एनडीए की एकजुटता और विपक्ष की बिखराव की स्थिति से पार्टी को पांचों सीटें जीतने का मजबूत दावा है।

विपक्ष की स्थिति बेहद कमजोर है। महागठबंधन में राजद सबसे बड़ी पार्टी है लेकिन कांग्रेस और अन्य दलों के साथ समन्वय की कमी है। एआईएमआईएम और बसपा के विधायकों का साथ मिलना भी मुश्किल दिख रहा है। विपक्ष अगर संयुक्त उम्मीदवार उतारता भी है तो मतभेदों के कारण वोट बंट सकते हैं। एनडीए के पास पहले से ही पर्याप्त संख्या है और छोटे दलों या निर्दलीयों से समर्थन मिलने की संभावना भी बनी हुई है। इस स्थिति में विपक्ष के लिए राज्यसभा में एक भी सीट जीतना चुनौतीपूर्ण होगा। एनडीए की रणनीति साफ है कि वह बिहार में अपनी स्थिति मजबूत रखना चाहती है और राज्यसभा में अधिकतम प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना चाहती है।

राम नाथ ठाकुर का नामांकन जेडीयू के लिए राजनीतिक संदेश भी है। कर्पूरी ठाकुर की विरासत को जीवित रखने और ईबीसी में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण है। ठाकुर लंबे समय से पार्टी के साथ हैं और उनकी राज्यसभा सदस्यता से जेडीयू को वरिष्ठता और अनुभव मिलता है। एनडीए ने यह भी तय किया है कि चुनाव में कोई रिस्क नहीं लिया जाएगा और सभी सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश की जाएगी। विपक्ष की कमजोरी को देखते हुए एनडीए को पांचों सीटें जीतने का भरोसा है।

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