Bihar Election 2025 Special : एनडीए ने सीट बंटवारे का ऐलान किया, भाजपा और जदयू को 101-101 सीटें, लोजपा (रा) को 29

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बज चुकी है। 12 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने अपनी सीटों के बंटवारे का औपचारिक ऐलान कर दिया। कुल 243 सीटों वाली

Oct 13, 2025 - 11:15
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Bihar Election 2025 Special : एनडीए ने सीट बंटवारे का ऐलान किया, भाजपा और जदयू को 101-101 सीटें, लोजपा (रा) को 29
एनडीए ने सीट बंटवारे का ऐलान किया, भाजपा और जदयू को 101-101 सीटें, लोजपा (रा) को 29

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी बज चुकी है। 12 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने अपनी सीटों के बंटवारे का औपचारिक ऐलान कर दिया। कुल 243 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा और जनता दल यूनाइटेड को बराबर 101-101 सीटें मिली हैं। लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास को 29, राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 6 और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को 6 सीटें आवंटित की गई हैं। यह फैसला केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एक्स पर पोस्ट करके साझा किया। उन्होंने लिखा कि एनडीए के साथियों ने सौहार्दपूर्ण वातावरण में यह वितरण पूरा किया है। सभी दलों के कार्यकर्ता और नेता इसका हर्षपूर्वक स्वागत कर रहे हैं। बिहार फिर से एनडीए सरकार के लिए तैयार है। यह ऐलान चुनाव से ठीक एक महीने पहले आया है, जब 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में वोटिंग होनी है। गठबंधन के इस फैसले से विपक्ष महागठबंधन पर दबाव बढ़ गया है, जो अभी अपनी सीटों पर चर्चा कर रहा है।

यह सीट बंटवारा कई दिनों की सघन चर्चाओं का नतीजा है। भाजपा और जदयू के बीच बराबरी का फॉर्मूला पहली बार लागू हुआ है। 2020 के चुनाव में जदयू को 115 और भाजपा को 110 सीटें मिली थीं। लेकिन इस बार जदयू ने अपनी मांग कम रखी। केंद्रीय नेतृत्व ने छोटे दलों को भी जगह दी, ताकि गठबंधन मजबूत रहे। लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के नेता चिराग पासवान ने 40-50 सीटों की मांग की थी, लेकिन 29 पर सहमति बनी। चिराग ने कहा कि यह फैसला एनडीए की एकता दिखाता है। हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी ने 15 सीटों की बात कही थी, लेकिन 6 पर रुक गए। राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा को भी 6 सीटें मिलीं। कुल मिलाकर 243 सीटें बंट गईं। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह समझौता सभी के हित में है। अब उम्मीदवारों के नाम जल्द तय होंगे।

बिहार चुनाव का इतिहास हमेशा रोमांचक रहा है। 2020 में एनडीए ने 125 सीटें जीती थीं, जिसमें भाजपा को 74 और जदयू को 43 मिलीं। विपक्ष महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं। इस बार एनडीए का लक्ष्य बहुमत पार करना है। सीट बंटवारे से छोटे दलों को मजबूती मिलेगी। लोजपा रामविलास को अनुसूचित जाति वाले इलाकों में फायदा होगा। हम और रालोमो को पिछड़े वर्ग के वोट बैंक से ताकत। जदयू के नेता नीतीश कुमार ने कहा कि यह फैसला बिहार की प्रगति के लिए जरूरी है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कार्यकर्ताओं से जश्न मनाने को कहा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में उम्मीदवार चयन होगा। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने तंज कसा कि एनडीए में सीटों की लड़ाई खत्म हुई, लेकिन बिहार की समस्याएं बाकी हैं।

चुनाव आयोग ने 6 नवंबर को 121 सीटों पर पहला चरण और 11 नवंबर को 122 सीटों पर दूसरा चरण तय किया है। 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। बिहार की 243 सीटें सामान्य, अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षित हैं। एनडीए का फॉर्मूला इनका ध्यान रखता है। भाजपा को 30 एससी और 2 एसटी सीटें मिल सकती हैं। जदयू को 37 एससी और 1 एसटी। लोजपा को 23 एससी। यह बंटवारा जातिगत समीकरण साधने का प्रयास है। बिहार में यादव, कुशवाहा, कोइरी, भूमिहार, राजपूत जैसे वर्ग निर्णायक हैं। एनडीए ने इन्हें संतुलित रखा। महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस, वामपंथी और विकासशील इंसान पार्टी शामिल हैं। वे 130-140 सीटों पर दावा कर रहे हैं। लेकिन सीट बंटवारे पर अभी सहमति नहीं बनी। तेजस्वी यादव की अगुवाई में वे दिल्ली में बैठक करेंगे।

एनडीए का यह फैसला रणनीतिक है। 2020 में लोजपा ने अलग लड़ाई लड़ी थी, जिससे भाजपा को नुकसान हुआ। अब चिराग पासवान को शामिल कर वोट एकजुट होंगे। जीतन राम मांझी के हम को महादलित वोट मिलेंगे। उपेंद्र कुशवाहा के रालोमो को कोइरी समाज का समर्थन। भाजपा और जदयू मिलकर 202 सीटों पर लड़ेंगे। यह संख्या मजबूत है। केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि बिहार में विकास की लहर चलेगी। नीतीश कुमार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन कुछ सीटों पर विवाद बाकी है। जैसे महनार, मटिहानी और चकाई। इन पर अंतिम फैसला होगा। एनडीए ने सर्वे करवाया है। ओपिनियन पोल में एनडीए को बढ़त दिख रही। तेजस्वी यादव सीएम फेस के रूप में लोकप्रिय हैं, लेकिन एनडीए की एकजुटता मजबूत।

बिहार चुनाव में मुद्दे भी अहम हैं। बेरोजगारी, बाढ़, शिक्षा, स्वास्थ्य। एनडीए ने पंचायत चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया। जदयू ने जाति जनगणना का वादा किया। भाजपा ने राम मंदिर और विकास पर जोर। विपक्ष ने आरक्षण और महंगाई उठाई। सीट बंटवारे से एनडीए का कैंपेन तेज होगा। कार्यकर्ता उत्साहित हैं। पटना में जश्न हुआ। चिराग पासवान ने कहा कि बिहार तैयार है। मांझी ने कविता लिखकर खुशी जताई। कुशवाहा ने कहा कि यह ऐतिहासिक है। अब उम्मीदवारों की लिस्ट जल्द आएगी। कुछ विधायकों ने इस्तीफा दिया। जैसे विभा देवी और प्रकाश वीर। वे जदयू में शामिल हो सकते हैं।

यह बंटवारा एनडीए की एकता का प्रतीक है। कई दिनों की खींचतान के बाद सहमति बनी। भाजपा ने छोटे दलों को खुश रखा। जदयू ने बराबरी स्वीकार की। इससे गठबंधन मजबूत हुआ। विपक्ष को चुनौती मिली। महागठबंधन को जल्द फैसला लेना होगा। राष्ट्रीय जनता दल को सबसे ज्यादा सीटें मिलेंगी। लेकिन कांग्रेस और वामपंथी की मांगें हैं। विकासशील इंसान पार्टी भी दबाव में। बिहार का चुनाव जाति, विकास और गठबंधन पर टिका। एनडीए ने पहला कदम मजबूत रखा। अब प्रचार युद्ध शुरू। सभाएं, रोड शो होंगे। पीएम मोदी और राहुल गांधी आएंगे। बिहार की सियासत रोमांचक रहेगी। उम्मीद है कि शांतिपूर्ण चुनाव होंगे। वोटर जागरूक हैं। विकास के लिए वोट देंगे।

एनडीए का यह फैसला बिहार की राजनीति बदल सकता। 2025 चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर असर डालेंगे। अगर एनडीए जीता, तो नीतीश फिर सत्ता में। विपक्ष मजबूत हुआ तो तेजस्वी का सपना साकार। सीट बंटवारा पहला पड़ाव है। आगे उम्मीदवार चयन। कुछ सीटों पर दावेदारों की लड़ाई। लेकिन गठबंधन टूटेगा नहीं। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि बिहार फिर एनडीए का। कार्यकर्ता जोर लगाएं। यह ऐलान समय पर आया। अब कैंपेन गति पकड़ेगा। बिहारवासी उम्मीद बांधे। विकास की राह खुलेगी।

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