बिहार में ‘नोट डबल’ करने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़, राज्यव्यापी नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस, कई रसूखदार चेहरे कानून के शिकंजे में।

बिहार में कानून व्यवस्था और आर्थिक अपराधों को लेकर चल रही सख्त कार्रवाइयों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला

May 20, 2026 - 11:41
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बिहार में ‘नोट डबल’ करने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़, राज्यव्यापी नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस, कई रसूखदार चेहरे कानून के शिकंजे में।
बिहार में ‘नोट डबल’ करने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़, राज्यव्यापी नेटवर्क खंगालने में जुटी पुलिस, कई रसूखदार चेहरे कानून के शिकंजे में।
  • सत्ताधारी जेडीयू नेता और सरकारी स्कूल के हेडमास्टर समेत कई रसूखदार चेहरे कानून के शिकंजे में
  • करोड़ों रुपये की ठगी और जाली नोटों के काले कारोबार से जुड़े सिंडिकेट के पीछे सफेदपोशों का हाथ

बिहार में कानून व्यवस्था और आर्थिक अपराधों को लेकर चल रही सख्त कार्रवाइयों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने राज्य की प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में मासूम और सीधे-साधे लोगों को कम समय में अमीर बनाने का लालच देकर उनके पैसे दोगुने करने वाले एक बहुत बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह के तार केवल सामान्य अपराधियों से ही नहीं जुड़े हैं, बल्कि समाज में प्रतिष्ठित माने जाने वाले सफेदपोश लोग भी इसके मुख्य सूत्रधारों में शामिल पाए गए हैं। पुलिस और विशेष जांच टीमों द्वारा की गई छापेमारी में इस बात के पुख्ता प्रमाण मिले हैं कि आम जनता की गाढ़ी कमाई को हड़पने के लिए एक संगठित सिंडिकेट चलाया जा रहा था। इस पूरे खेल में राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक पहुंच का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा था ताकि कानून की नजरों से बचा जा सके।

इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां तब जुड़नी शुरू हुईं जब कई पीड़ित परिवारों ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी गंवाने के बाद हिम्मत दिखाई और मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई। जांच के आगे बढ़ने पर जो तथ्य सामने आए, वे बेहद हैरान करने वाले हैं क्योंकि इस गिरोह के मुख्य संरक्षकों में सत्ताधारी दल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के एक स्थानीय स्तर के नेता और शिक्षा विभाग के एक जिम्मेदार सरकारी स्कूल के हेडमास्टर का नाम प्रमुखता से सामने आया है। यह सफेदपोश लोग समाज में अपनी साफ-सुथरी छवि और प्रभाव का इस्तेमाल करके लोगों को जाल में फंसाते थे और उन्हें भरोसा दिलाते थे कि उनका पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। जब लोग इन पर विश्वास करके लाखों-करोड़ों रुपये इनके हवाले कर देते थे, तो यह गिरोह कुछ समय तक उन्हें झांसा देता रहता था और बाद में बड़ी रकम इकट्ठा होते ही अंडरग्राउंड हो जाता था।

गिरोह के तौर-तरीकों की गहन पड़ताल से यह साफ हुआ है कि यह लोग केवल नकदी को दोगुना करने का झांसा ही नहीं देते थे, बल्कि इनके पास से भारी मात्रा में अर्ध-निर्मित और जाली नोट छापने की सामग्री भी बरामद की गई है। गिरोह के सदस्य भोले-भाले ग्रामीणों और छोटे व्यापारियों को निशाना बनाते थे और उन्हें विश्वास दिलाने के लिए शुरुआत में कुछ असली नोटों के बदले दोगुनी रकम वापस भी करते थे ताकि बाजार में उनका विश्वास जम सके। एक बार जब कोई बड़ा आसामी इनके जाल में फंस जाता था और बड़ी रकम लेकर पहुंचता था, तो उसे नकली नोटों की गड्डियां थमा दी जाती थीं या फिर डरा-धमका कर भगा दिया जाता था। हेडमास्टर की भूमिका इस गिरोह में वित्तीय लेनदेन को संभालने और पढ़े-लिखे लोगों को इस योजना की प्रामाणिकता समझाने की थी, जबकि जेडीयू नेता अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल कर पुलिसिया कार्रवाई का डर दिखाकर पीड़ितों का मुंह बंद रखता था।

गिरोह की कार्यप्रणाली और बरामदगी

छापेमारी के दौरान जांच अधिकारियों को आरोपियों के ठिकानों से नोटों के आकार के कटे हुए सादे कागज, विशेष प्रकार के केमिकल, जाली नोट छापने वाली मशीनें और कई लग्जरी गाड़ियां मिली हैं। इसके साथ ही विभिन्न बैंकों के पासबुक, एटीएम कार्ड और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं, जो इस बात का गवाह हैं कि यह अवैध कारोबार कितने बड़े पैमाने पर फैला हुआ था।

इस मामले के सामने आने के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर बेहद तेज हो गया है और विपक्षी दलों को सरकार पर निशाना साधने का एक बड़ा मौका मिल गया है। हालांकि, शासन स्तर से यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है कि कानून के सामने कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका संबंध किसी भी दल या पद से क्यों न हो। पुलिस प्रशासन ने एक विशेष कार्य बल का गठन किया है जो इस गिरोह के राज्यव्यापी नेटवर्क के साथ-साथ अंतर-राज्यीय कड़ियों की भी बारीकी से जांच कर रहा है। शुरुआती जांच में यह भी अंदेशा जताया जा रहा है कि इस काले धंधे से कमाए गए धन का एक बड़ा हिस्सा बेनामी संपत्तियों को खरीदने और चुनाव प्रबंधन में भी इस्तेमाल किया जा रहा था, जिसकी अलग से मनी लॉन्ड्रिंग के कोण से जांच की जा रही है।

आर्थिक अपराध इकाई की टीमें अब उन सभी लोगों की सूची तैयार कर रही हैं जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इन सफेदपोश अपराधियों के संपर्क में थे या जिन्होंने इस गिरोह के माध्यम से अपनी बेनामी संपत्ति को खपाने का प्रयास किया था। सरकारी स्कूल के हेडमास्टर के बैंक खातों और उनकी चल-अचल संपत्ति का जो ब्यौरा प्राथमिक जांच में मिला है, वह उनके वैध आय के स्रोतों से कहीं अधिक है, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने भी उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही, जेडीयू के स्थानीय संगठन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी नेता की प्राथमिक सदस्यता को रद्द करने और उन्हें पद से निष्कासित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है ताकि दल की छवि पर कोई आंच न आए।

इस तरह के गिरोहों का फलना-फूलना इस बात का भी संकेत है कि समाज में रातों-रात अमीर बनने की चाहत किस कदर लोगों के दिमाग पर हावी हो चुकी है, जिसका फायदा उठाकर ठग बड़ी आसानी से अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं। स्थानीय प्रशासन अब इस पूरे मामले को एक नजीर के रूप में देख रहा है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह के फर्जीवाड़े का शिकार न बने। इस कार्रवाई के बाद से कई अन्य जिलों में भी सक्रिय इसी तरह के छोटे-मोटे गिरोहों के सदस्य अपने ठिकानों को छोड़कर फरार हो गए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

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