बेपटरी होकर पलटे ट्रेन के इंजन सहित तीन डिब्बे, खाली होने के कारण टली सैकड़ों रेल यात्रियों की जान।

उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल ऋषिकेश में स्थित योग नगरी रेलवे स्टेशन पर सोमवार की देर रात एक बेहद गंभीर

May 19, 2026 - 11:36
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बेपटरी होकर पलटे ट्रेन के इंजन सहित तीन डिब्बे, खाली होने के कारण टली सैकड़ों रेल यात्रियों की जान।
बेपटरी होकर पलटे ट्रेन के इंजन सहित तीन डिब्बे, खाली होने के कारण टली सैकड़ों रेल यात्रियों की जान।
  • ऋषिकेश के योग नगरी रेलवे स्टेशन पर बड़ा रेल हादसा, शंटिंग के दौरान पटरी से उतरी उज्जैनी एक्सप्रेस
  • देर रात मची अफरा-तफरी के बाद भारी पुलिस बल तैनात, शंटिंग लाइन के डेड एंड को तोड़कर आगे बढ़ी धड़धड़ाती ट्रेन

उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल ऋषिकेश में स्थित योग नगरी रेलवे स्टेशन पर सोमवार की देर रात एक बेहद गंभीर और दिल दहला देने वाला रेल हादसा घटित हुआ। स्टेशन परिसर के शंटिंग यार्ड में नियमित प्रक्रिया के तहत खड़ी की जा रही उज्जैनी एक्सप्रेस ट्रेन अचानक अनियंत्रित हो गई और उसने सुरक्षा के लिहाज से बनाई गई शंटिंग लाइन के अंतिम छोर यानी डेड एंड को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया। रफ्तार अधिक होने के कारण ट्रेन का शक्तिशाली इंजन और उसके पीछे जुड़े तीन मुख्य कोच पटरी से पूरी तरह से उतर गए और तेज आवाज के साथ जमीन पर पलट गए। इस भीषण तकनीकी खराबी और हादसे के बाद पूरे रेलवे स्टेशन परिसर और उसके आसपास के रिहायशी इलाकों में एकाएक अफरा-तफरी और भारी दहशत का माहौल बन गया, जिससे लोग किसी अनहोनी की आशंका में इधर-उधर भागने लगे।

इस पूरे डरावने घटनाक्रम में सबसे बड़ी और राहत की बात यह रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त ट्रेन पूरी तरह से खाली थी और उसमें कोई भी यात्री सवार नहीं था। उज्जैनी एक्सप्रेस ने कुछ समय पहले ही अपनी नियमित यात्रा पूरी की थी और सभी यात्रियों को स्टेशन पर सुरक्षित उतारने के बाद उसे केवल रखरखाव और सफाई के लिए यार्ड की तरफ ले जाया जा रहा था। यदि यह घटना कुछ समय पहले मुख्य प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की मौजूदगी के दौरान होती, तो निश्चित रूप से सैकड़ों मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा सकती थीं। ट्रेन के डिब्बों के पलटने की आवाज इतनी जोरदार थी कि स्टेशन पर मौजूद रेलवे कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े और स्थिति का जायजा लिया।

हादसे की भयावहता को देखते हुए रेलवे नियंत्रण कक्ष को तुरंत सूचित किया गया, जिसके बाद रेलवे के तकनीकी अधिकारियों और स्थानीय पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीमें एम्बुलेंस और राहत सामग्री के साथ मौके पर पहुंच गईं। शुरुआती दौर में मची भारी आपाधापी को शांत करने के लिए पुलिस बल ने तुरंत मोर्चा संभाला और घटनास्थल पर जमा हो रही उत्सुक लोगों की भारी भीड़ को नियंत्रित करना शुरू किया। सुरक्षा और राहत कार्यों में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए, इसके लिए पुलिस ने पूरे शंटिंग यार्ड के आसपास के क्षेत्र को चारों तरफ से घेर लिया है और आम जनता की आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। रेलवे के वरिष्ठ तकनीकी इंजीनियर और सुरक्षा सलाहकार भी रात में ही मौके पर पहुंच गए और उन्होंने घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए प्रारंभिक स्थलीय निरीक्षण शुरू कर दिया है। रेलवे यार्ड प्रबंधन के अनुसार, उज्जैनी एक्सप्रेस के खाली रैक को जब मुख्य लाइन से हटाकर साइडिंग ट्रैक पर भेजा जा रहा था, तब लोको पायलट और शंटिंग स्टाफ के बीच तालमेल की कमी या अचानक ब्रेक फेल होने की वजह से ट्रेन रुक नहीं सकी। ट्रेन ने लोहे के मजबूत अवरोधक को उखाड़ फेंका, जिसके कारण इंजन के पहिये मिट्टी में धंस गए और पीछे के तीन डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़ते हुए तिरछे होकर गिर गए।

इस दुर्घटना के बाद उत्तर रेलवे मंडल के उच्च अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति के गठन के आदेश जारी कर दिए हैं। यह समिति इस बात की गहनता से पड़ताल करेगी कि क्या यह हादसा लोको पायलट की किसी मानवीय भूल का नतीजा था या फिर ट्रेन के ब्रेकिंग सिस्टम में अचानक आई किसी बड़ी तकनीकी विफलता के कारण इंजन नियंत्रण से बाहर हो गया था। यार्ड में शंटिंग के समय रफ्तार के जो कड़े नियम निर्धारित होते हैं, उनका पूरी तरह से पालन किया जा रहा था या नहीं, इस बिंदु पर भी अधिकारियों द्वारा स्टेशन मास्टर और केबिन स्टाफ के बयानों को दर्ज किया जा रहा है। जांच दल को तीन दिनों के भीतर अपनी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

सोमवार रात को हुए इस हादसे के बाद मंगलवार सुबह से ही योग नगरी ऋषिकेश स्टेशन पर रेल यातायात को सुचारू बनाए रखने और प्रभावित ट्रैक को साफ करने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। मुरादाबाद और हरिद्वार से विशेष दुर्घटना राहत ट्रेनें और भारी क्षमता वाली क्रेनें मौके पर बुलाई गई हैं, जिनकी मदद से पलटे हुए भारी-भरकम डिब्बों और मुख्य इंजन को दोबारा पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। रेलवे प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य शंटिंग लाइन को जल्द से जल्द दुरुस्त करना है ताकि अन्य आने-जाने वाली ट्रेनों के परिचालन पर इसका कोई विपरीत और दीर्घकालिक प्रभाव न पड़े और यात्री सेवाएं सामान्य रूप से जारी रह सकें।

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