मध्य पूर्व में महायुद्ध के मुहाने पर दुनिया, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दोटूक चेतावनी- 'समझौता करो या बड़े सैन्य हमले का सामना करो'।
वैश्विक कूटनीति और सैन्य मामलों में एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसने समूचे मध्य पूर्व सहित
- खाड़ी देशों के अनुरोध पर टली मंगलवार को होने वाली सैन्य कार्रवाई, वॉशिंगटन ने तेहरान के सामने रखी परमाणु कार्यक्रम बंद करने की सख्त शर्त
- अमेरिकी सेना के शीर्ष कमांडरों को पलक झपकते ही बड़े पैमाने पर हमले शुरू करने के निर्देश, वाइट हाउस ने कहा- 'हमारे पास खोने के लिए समय नहीं'
वैश्विक कूटनीति और सैन्य मामलों में एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिसने समूचे मध्य पूर्व सहित पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आशंकाओं के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को एक बेहद सख्त और अंतिम चेतावनी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि यदि तेहरान प्रशासन युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने और वाशिंगटन की शर्तों के अनुरूप एक व्यापक शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तुरंत तैयार नहीं होता है, तो अमेरिकी सेना ईरान पर फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य हमले शुरू कर देगी। राष्ट्रपति ने इस संदर्भ में अपने सशस्त्र बलों के शीर्ष जनरलों और नीति निर्धारकों को पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार रहने के कड़े निर्देश जारी किए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में बिना किसी देरी के त्वरित और विनाशकारी कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब कुछ ही समय पहले अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने संयुक्त रूप से 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और बुनियादी ढांचागत ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए थे। हालांकि इसके बाद द्विपक्षीय वार्ताओं के लिए एक अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन शांति वार्ता के अपेक्षित परिणाम सामने न आने के कारण दोनों देशों के बीच गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी रणनीति को स्पष्ट करते हुए सोशल मीडिया पर यह साझा किया कि मंगलवार के लिए एक बेहद बड़ा और सुनियोजित सैन्य हमला पूरी तरह से तय किया जा चुका था, लेकिन खाड़ी क्षेत्र के कुछ प्रमुख मित्र देशों के शासकों और राजनयिकों के विशेष हस्तक्षेप और मध्यस्थता के अनुरोध के बाद इस हमले को अंतिम क्षणों में कुछ समय के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया गया।
खाड़ी देशों के नेताओं ने वाशिंगटन से संपर्क साधकर यह दलील दी थी कि तेहरान की ओर से एक नया और संशोधित शांति प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिस पर आगे की चर्चा की जानी चाहिए क्योंकि यह प्रस्ताव अमेरिका के लिए स्वीकार्य शर्तों के बेहद करीब हो सकता है। मित्र देशों की इस राजनयिक अपील और शांति को एक अंतिम अवसर देने की भावना का सम्मान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने नियोजित हवाई हमलों को फिलहाल रोक दिया है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपनी सेना को बैकअप मोड पर रहने के लिए कहा है। सैन्य कमांडरों को दिए गए स्पष्ट आदेश में कहा गया है कि हमले की योजना को पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है, बल्कि केवल कुछ समय के लिए टाला गया है और यदि बातचीत की मेज पर ईरान ने किसी भी प्रकार की टालमटोल की रणनीति अपनाई, तो पलक झपकते ही एक बड़ा और पूर्ण पैमाने का हमला शुरू कर दिया जाएगा।
वाइट हाउस का कड़ा कूटनीतिक रुख
अमेरिकी प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते की पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह होगी कि तेहरान को अपनी सभी परमाणु महत्वाकांक्षाओं और यूरेनियम संवर्धन के कार्यक्रमों का स्थायी रूप से त्याग करना होगा। वाशिंगटन का मानना है कि पिछले सैन्य अभियानों में ईरान की बुनियादी सैन्य क्षमताओं और मिसाइल निर्माण इकाइयों को भारी नुकसान पहुंचाया गया है, इसलिए अब देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी ऐसे समझौते को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो भविष्य में ईरान को परमाणु बम बनाने का अवसर प्रदान करता हो।
इस पूरे घटनाक्रम पर वाइट हाउस के वरिष्ठ नीतिगत प्रवक्ताओं ने भी मीडिया ब्रीफिंग में सरकार के रुख को और अधिक स्पष्ट किया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने बहुत ही स्पष्ट लक्ष्मण रेखा खींच दी है और ईरान के पास अब समय बहुत तेजी से खत्म हो रहा है। अमेरिका ने अपनी पिछली सैन्य कार्रवाइयों के माध्यम से यह साबित कर दिया है कि वह ईरान के आंतरिक सैन्य और औद्योगिक ढांचे को पूरी तरह से पंगु बनाने की क्षमता रखता है। इस वजह से वाशिंगटन अब किसी भी ऐसी लंबी और बेनतीजा बातचीत का हिस्सा नहीं बनना चाहता जिसका उपयोग ईरान केवल अपने खोए हुए सैन्य ठिकानों को दोबारा मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में करना चाहता हो।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस सैन्य और राजनयिक तनाव का सीधा असर वैश्विक वित्तीय और ऊर्जा बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है। जैसे ही अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा हमले को टालने और साथ ही सेना को तैयार रहने के दोहरे संदेश सामने आए, वैसे ही वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी इस अनिश्चितता के कारण निवेशकों के भीतर भारी घबराहट देखी जा रही है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्ग पर इस संघर्ष का सीधा प्रभाव पड़ रहा है। यदि यहां दोबारा युद्ध छिड़ता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती है, जो पहले से ही ईंधन और ऊर्जा संकट का सामना कर रही है।
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