मतदाता सूची विवाद- कांग्रेस का चुनाव आयोग पर पलटवार, कहा- पहले चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दे, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देने की चुनौती। 

Political: नई दिल्ली में 18 अगस्त 2025 को कांग्रेस पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के बयानों पर तीखा पलटवार किया। कांग्रेस ने कहा कि पहले चुनाव.....

Aug 19, 2025 - 12:10
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मतदाता सूची विवाद- कांग्रेस का चुनाव आयोग पर पलटवार, कहा- पहले चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दे, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देने की चुनौती। 
मतदाता सूची विवाद- कांग्रेस का चुनाव आयोग पर पलटवार, कहा- पहले चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दे, सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देने की चुनौती। 

नई दिल्ली में 18 अगस्त 2025 को कांग्रेस पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के बयानों पर तीखा पलटवार किया। कांग्रेस ने कहा कि पहले चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर साबित करे कि मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी नहीं है, इसके बाद कांग्रेस भी हलफनामा देकर मतदाता सूची में गड़बड़ियों का सबूत पेश करेगी। यह बयान उस विवाद के जवाब में आया, जिसमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का आरोप लगाया था, जिसे उन्होंने "वोट चोरी" करार दिया। जवाब में, सीईसी ज्ञानेश कुमार ने 17 अगस्त को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी से सात दिनों के भीतर हलफनामा देने या माफी मांगने की मांग की थी। 

इस मुद्दे ने बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है। विवाद की शुरुआत 1 अगस्त 2025 को हुई, जब राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल की महादेवपुरा विधानसभा सीट पर एक लाख से अधिक मतदाताओं की सूची में गड़बड़ी हुई, जिसके कारण कांग्रेस उम्मीदवार की हार हुई। उन्होंने इसे "वोट चोरी" का मामला बताया और चुनाव आयोग पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ मिलकर चुनावी धांधली करने का आरोप लगाया। राहुल ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने छह महीने की जांच के बाद सबूत इकट्ठा किए हैं, जिनमें फर्जी मतदाता पते, शून्य घर नंबर, और एक ही पते पर कई मतदाताओं के नाम शामिल हैं। उदाहरण के लिए, उन्होंने एक 10 फीट ऊंची इमारत में 80 मतदाताओं के नाम और 70 वर्षीय शकुनी देवी का नाम दो बार दर्ज होने का दावा किया।

17 अगस्त को, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने राहुल गांधी के दावों को "आधारहीन" और "संविधान का अपमान" बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति उस क्षेत्र का मतदाता नहीं है, तो उसे अपनी शिकायत हलफनामे के साथ दर्ज करानी होगी। ज्ञानेश ने राहुल से सात दिनों के भीतर हलफनामा देने या देश से माफी मांगने की मांग की, अन्यथा उनके दावों को अमान्य माना जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार में विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया पारदर्शी है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है। ज्ञानेश कुमार ने बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के विवाद पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि ये नाम पिछले 20 वर्षों में मृत या अनुपस्थित मतदाताओं के थे, जिन्हें सूची से हटाया गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि इन हटाए गए मतदाताओं की सूची जिला मजिस्ट्रेट की वेबसाइटों पर 56 घंटे के भीतर अपलोड की गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि मशीन-रीडेबल मतदाता सूची साझा करना 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार प्रतिबंधित है, क्योंकि इससे मतदाताओं की निजता भंग हो सकती है।

कांग्रेस ने 18 अगस्त को इस मुद्दे पर पलटवार किया। पार्टी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग को अपनी मतदाता सूची पर इतना भरोसा है, तो वह पहले सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर साबित करे कि सूची में कोई गड़बड़ी नहीं है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि राहुल गांधी ने जो आंकड़े पेश किए, वे चुनाव आयोग के ही डेटा पर आधारित हैं। उन्होंने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बीजेपी के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहा है।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने यह भी आरोप लगाया कि सीईसी की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को हटाने का फैसला इसलिए किया गया ताकि सरकार अपने पसंदीदा व्यक्ति को नियुक्त कर सके। इंडिया ब्लॉक, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) जैसे दल शामिल हैं, ने इस मुद्दे पर एकजुट होकर विरोध जताया। 18 अगस्त को विपक्षी दलों के संसदीय नेताओं की बैठक में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर चर्चा हुई। हालांकि, इसे लागू करने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है, जो वर्तमान में विपक्ष के पास नहीं है। सपा सांसद रामगोपाल यादव ने दावा किया कि 2022 के उत्तर प्रदेश चुनाव में 18,000 मतदाताओं के नाम हटाने की शिकायत पर हलफनामा दिया गया था, लेकिन आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि अगर मतदाता सूची गलत थी, तो लोकसभा को भंग करना चाहिए।

इस विवाद ने बिहार में 17 अगस्त से शुरू हुई "वोटर अधिकार यात्रा" को और हवा दी, जिसमें राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव ने हिस्सा लिया। इस 1,300 किलोमीटर लंबी यात्रा का उद्देश्य मतदाता सूची में गड़बड़ियों के खिलाफ जागरूकता फैलाना है। राहुल ने सासाराम में एक सभा में कहा कि आयोग ने उनसे हलफनामा मांगा, लेकिन बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर जैसे नेताओं से ऐसी कोई मांग नहीं की गई, जिन्होंने समान आरोप लगाए थे। बीजेपी ने भी इस मुद्दे पर जवाबी हमला बोला। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राहुल के आरोपों को आधारहीन बताया और कहा कि संवैधानिक संस्था पर इस तरह के आरोप लगाना गलत है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस अपनी हार का ठीकरा आयोग पर फोड़ रही है। पार्टी ने रायबरेली, वायनाड, डायमंड हार्बर, और कन्नौज जैसे निर्वाचन क्षेत्रों में विपक्ष पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाया।

इस विवाद ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ज्ञानेश कुमार का कड़ा रुख और राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग ने आयोग की तटस्थ छवि को नुकसान पहुंचाया है। दूसरी ओर, आयोग का कहना है कि वह सभी मतदाताओं के हित में काम कर रहा है और किसी भी दल के साथ भेदभाव नहीं करता। ज्ञानेश ने कहा कि शून्य घर नंबर वाले मतदाता फर्जी नहीं हैं, बल्कि वे बेघर लोग या अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोग हैं, जिन्हें मतदान का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए नोशनल नंबर दिए जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विश्लेषकों का कहना है कि यह विवाद भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है।

मतदाता सूची में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। इस विवाद ने यह भी दिखाया कि सोशल मीडिया और डिजिटल युग में मतदाता डेटा की निजता और सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है। कुछ लोगों ने आयोग के उस दावे पर सवाल उठाया कि मशीन-रीडेबल मतदाता सूची साझा करने से निजता भंग हो सकती है, जबकि दूसरों का मानना है कि यह पारदर्शिता बढ़ाने का एक तरीका हो सकता है। पुलिस और प्रशासन की भूमिका भी इस विवाद में चर्चा में रही। 11 अगस्त को, नई दिल्ली में चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च कर रहे लगभग 200 सांसदों और समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी भी शामिल थे, जो बिहार में एसआईआर के खिलाफ विरोध कर रहे थे। विपक्ष का कहना था कि यह प्रक्रिया जल्दबाजी में की जा रही है और इससे कई वास्तविक मतदाताओं के नाम हट सकते हैं।

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