Politics: शिलान्यास पट्टी में नहीं लिखा था नाम, नगर पालिका उपाध्यक्ष रमाकांत बिलगैया ने फावड़े से तोड़ी शिला, CMO पर लगाया अनदेखी का आरोप। 

मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना नगर पालिका में 17 जून 2025 को एक शिलान्यास समारोह के दौरान अप्रत्याशित ड्रामा देखने को मिला...

Jun 20, 2025 - 11:39
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Politics: शिलान्यास पट्टी में नहीं लिखा था नाम, नगर पालिका उपाध्यक्ष रमाकांत बिलगैया ने फावड़े से तोड़ी शिला, CMO पर लगाया अनदेखी का आरोप। 

सागर : मध्य प्रदेश के सागर जिले के बीना नगर पालिका में 17 जून 2025 को एक शिलान्यास समारोह के दौरान अप्रत्याशित ड्रामा देखने को मिला। वीर सावरकर वार्ड में 15.60 लाख रुपये की लागत से बनने वाली सड़क के शिलान्यास के लिए आयोजित कार्यक्रम में नगर पालिका उपाध्यक्ष रमाकांत बिलगैया ने शिलान्यास पट्टी पर अपना नाम न देखकर गुस्से में आकर उसे फावड़े से तोड़ डाला। यह घटना श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के पास हुई और कैमरे में रिकॉर्ड होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। बिलगैया ने नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) रामप्रकाश जगनेरिया पर जानबूझकर उनकी अनदेखी करने का आरोप लगाया। घटना के बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दोबारा शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया।

  • शिलान्यास से हंगामे तक

17 जून 2025 को बीना के वीर सावरकर वार्ड में एक नई सड़क के निर्माण के लिए शिलान्यास समारोह का आयोजन किया गया था। इस सड़क की लागत 15.60 लाख रुपये थी, और कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, नगर पालिका अधिकारियों और निवासियों की मौजूदगी थी। समारोह की शुरुआत पारंपरिक पूजा-पाठ और शिलान्यास पट्टी के अनावरण के साथ हुई। लेकिन जैसे ही शिलान्यास पट्टी का अनावरण किया गया, नगर पालिका उपाध्यक्ष रमाकांत बिलगैया ने पाया कि पट्टी पर उनका नाम नहीं लिखा गया। इस बात से गुस्साए बिलगैया ने तुरंत मौके पर मौजूद लोगों के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। स्वदेश न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने पूजा के लिए लाई गई कुदाल उठाई और शिलान्यास पट्टी को तोड़ डाला। यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। वीडियो में बिलगैया को गुस्से में पट्टी तोड़ते और CMO पर आरोप लगाते देखा जा सकता है। उन्होंने कहा, "शिलान्यास पट्टी पर मेरा नाम न होना मेरे पद और सम्मान का अपमान है। CMO रामप्रकाश जगनेरिया हर शासकीय कार्यक्रम में मेरी अनदेखी करते हैं, जो अब बर्दाश्त से बाहर है।" घटना के बाद वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। कुछ लोगों ने बिलगैया को शांत करने की कोशिश की, लेकिन उनका गुस्सा कम नहीं हुआ। स्थिति को बिगड़ता देख, विधायक निर्मला सप्रे और नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार ने हस्तक्षेप किया। दोनों ने बिलगैया का समर्थन करते हुए कहा कि शिलान्यास पट्टी पर उपाध्यक्ष का नाम न होना गलत है। बाद में स्थिति को शांत करने के लिए दोबारा शिलान्यास कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बिलगैया का नाम शामिल किया गया।

  • रमाकांत बिलगैया के आरोप: CMO पर गंभीर इल्जाम

रमाकांत बिलगैया ने इस घटना के बाद मीडिया से बातचीत में CMO रामप्रकाश जगनेरिया पर गंभीर आरोप लगाए। न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, बिलगैया ने कहा, "मैं नगर पालिका का उपाध्यक्ष हूं, और मेरा कर्तव्य है कि मैं अपने क्षेत्र के विकास कार्यों में हिस्सा लूं। लेकिन CMO हर बार मुझे नजरअंदाज करते हैं। शिलान्यास पट्टी पर मेरा नाम जानबूझकर नहीं लिखा गया, जो मेरे सम्मान और पद की अवमानना है।" बिलगैया ने यह भी दावा किया कि यह पहली बार नहीं है जब उनकी अनदेखी की गई। उन्होंने कहा, "पिछले कई कार्यक्रमों में भी मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया है। यह साफ तौर पर साजिश है।" उन्होंने CMO के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और कहा कि वह इस मामले को उच्च अधिकारियों तक ले जाएंगे। X पर एक पोस्ट में बिलगैया के हवाले से लिखा गया, "मैं अपने सम्मान के साथ समझौता नहीं करूंगा। अगर मेरे साथ ऐसा ही व्यवहार होता रहा, तो मैं और सख्त कदम उठाऊंगा।"

  • CMO और नगर पालिका की प्रतिक्रिया

घटना के बाद CMO रामप्रकाश जगनेरिया ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CMO ने दावा किया कि शिलान्यास पट्टी पर नाम न लिखे जाने की कोई साजिश नहीं थी, बल्कि यह एक तकनीकी चूक थी। न्यूज24 की एक रिपोर्ट में बताया गया कि CMO ने इस मामले में माफी मांगने की बजाय इसे गलतफहमी करार दिया। नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार ने इस मामले में बिलगैया का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "उपाध्यक्ष का नाम शिलान्यास पट्टी पर होना चाहिए था। यह एक गंभीर चूक है, और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।" विधायक निर्मला सप्रे ने भी इस मामले में CMO की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि भविष्य में ऐसी गलतियां नहीं होनी चाहिए।

यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, और X पर लोगों ने इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ यूजर्स ने बिलगैया के व्यवहार की निंदा की और इसे गैरजिम्मेदाराना बताया। एक यूजर ने लिखा, "शिलान्यास पट्टी तोड़ना कोई समाधान नहीं है। नेताजी को अपनी शिकायत को सही तरीके से दर्ज करानी चाहिए थी।" वहीं, कुछ लोगों ने बिलगैया के गुस्से को जायज ठहराया। एक X पोस्ट में लिखा गया, "अगर बार-बार किसी का अपमान हो, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। CMO को जवाब देना चाहिए कि आखिर बिलगैया का नाम क्यों नहीं लिखा गया।" कुछ यूजर्स ने इस घटना को हास्य के रूप में लिया। एक पोस्ट में मजाक में लिखा गया, "नेताजी ने फावड़े से शिलान्यास कर दिया, अब सड़क भी जल्दी बनेगी!" इस घटना ने बीना की स्थानीय राजनीति में भी हलचल मचा दी। कुछ लोगों ने इसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर की गुटबाजी से जोड़ा, क्योंकि बिलगैया BJP से जुड़े हैं। X पर एक यूजर ने लिखा, "यह BJP की अंदरूनी लड़ाई का नतीजा है। बीना में सब कुछ ठीक नहीं है।" हालांकि, इस दावे की कोई पुष्टि नहीं हुई।

  • बीना नगर पालिका का राजनीतिक परिदृश्य

यह घटना बीना नगर पालिका के राजनीतिक परिदृश्य को भी दर्शाती है। बीना, सागर जिले का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और रेलवे जंक्शन है, जिसे "उद्योग नगरी" के नाम से जाना जाता है। यहां की नगर पालिका में BJP का दबदबा रहा है, और वर्तमान में नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार और उपाध्यक्ष रमाकांत बिलगैया दोनों BJP से हैं। हालांकि, बीना में समय-समय पर नगर पालिका के भीतर विवाद सामने आते रहे हैं। मई 2024 में नगर पालिका अध्यक्ष लता सकवार के साथ एक अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से बहस का मामला सुर्खियों में था। इसके अलावा, वीर सावरकर वार्ड में पहले भी ठेकेदार और पार्षद के बीच पार्क निर्माण को लेकर विवाद हो चुका है। ये घटनाएं दर्शाती हैं कि बीना नगर पालिका में प्रशासनिक और राजनीतिक तनाव समय-समय पर उभरते रहते हैं। रमाकांत बिलगैया का शिलान्यास पट्टी तोड़ना कई कानूनी और नैतिक सवाल खड़े करता है। कानूनी रूप से, यह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला हो सकता है, क्योंकि शिलान्यास पट्टी नगर पालिका की संपत्ति थी। हालांकि, अभी तक इस मामले में कोई FIR दर्ज नहीं हुई है, और नगर पालिका ने इसे आंतरिक मामला मानकर दोबारा शिलान्यास कर स्थिति को संभाल लिया।

नैतिक रूप से, बिलगैया का यह व्यवहार एक जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं माना जा सकता। विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें अपनी शिकायत को औपचारिक रूप से दर्ज कराना चाहिए था। एक स्थानीय पत्रकार ने X पर लिखा, "नेताजी का गुस्सा समझ आता है, लेकिन फावड़े से पट्टी तोड़ना गलत संदेश देता है। यह जनता के सामने गलत उदाहरण पेश करता है।" यह घटना बीना नगर पालिका में प्रशासनिक सुधार की जरूरत को भी उजागर करती है। शिलान्यास पट्टी पर नाम न लिखे जाने की घटना एक छोटी सी चूक हो सकती है, लेकिन इससे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच विश्वास की कमी साफ झलकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नगर पालिका को ऐसी घटनाओं से बचने के लिए प्रोटोकॉल बनाना चाहिए, जिसमें सभी जनप्रतिनिधियों के नाम शामिल करने की प्रक्रिया स्पष्ट हो। साथ ही, CMO और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है। बीना जैसे औद्योगिक शहर में, जहां विकास कार्यों की गति तेज है, प्रशासनिक लापरवाही से इस तरह के विवाद उत्पन्न हो सकते हैं।

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