भारत के पास इतने साधन नहीं हैं कि वह पाकिस्तान को पूरी तरह ध्वस्त कर सके- राज्यसभा में कपिल सिब्बल के बयान से मचा बवाल।
Political News: राज्यसभा में स्वतंत्र सांसद कपिल सिब्बल ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन ....
Political News: राज्यसभा में स्वतंत्र सांसद कपिल सिब्बल ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए कहा कि भारत के पास इतने सैन्य साधन नहीं हैं कि वह पाकिस्तान को पूरी तरह नष्ट कर सके। सिब्बल ने वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह के बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि अक्टूबर 2024 तक भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या घटकर 31 रह गई है, जो 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद सबसे कम है। उन्होंने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) कार्यक्रम की भी आलोचना की, जो 1984 में शुरू हुआ था, लेकिन 2025 तक एक भी विमान पूरी तरह तैयार नहीं हुआ। सिब्बल ने चेतावनी दी कि जल्द ही भारत के पास केवल 29 स्क्वाड्रन रह जाएंगे, जबकि पाकिस्तान के पास 25 और चीन के पास 133 स्क्वाड्रन हैं। उन्होंने पाकिस्तान और चीन के गठजोड़ को भारत के लिए बड़ी चुनौती बताया।
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर हिंदू पर्यटक थे। इस हमले की जिम्मेदारी द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली, जिसे भारत ने लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी बताया। भारत ने इस हमले को पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद से जोड़ा, जिसे पाकिस्तान ने खारिज किया। जवाब में, भारत ने 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसमें भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के नौ ठिकानों पर हवाई हमले किए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे “सटीक और गैर-वृद्धि वाला” जवाब बताया, जिसमें कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ।
पाकिस्तान ने दावा किया कि इन हमलों में 26 नागरिक मारे गए और 46 घायल हुए। पाकिस्तान ने यह भी कहा कि उसने भारतीय वायुसेना के छह विमानों, जिसमें तीन राफेल शामिल थे, को मार गिराया, हालांकि ये दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए। भारत ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन में कम से कम तीन विमान खो गए, जिनमें संभवतः एक राफेल शामिल था। यह राफेल का पहला युद्ध नुकसान था।
राज्यसभा में ऑपरेशन सिंदूर और पहलगाम हमले पर चर्चा के दौरान कपिल सिब्बल ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर कई सवाल उठाए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की, क्योंकि 8 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को नहीं बुलाया गया। सिब्बल ने कहा कि स्थानीय नेताओं को शामिल करने से जमीनी हकीकत बेहतर समझी जा सकती थी। उन्होंने पूछा, “अगर अब्दुल्ला को बैठक में नहीं बुलाया गया, तो आपको जानकारी कैसे मिलेगी?”
सिब्बल ने भारतीय वायुसेना की कमजोरियों पर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि भारत के पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जो 1965 के युद्ध के बाद सबसे कम है। वायुसेना को 42 स्क्वाड्रन की जरूरत है, लेकिन पुराने मिग-21, मिग-29 और मिराज 2000 विमानों के रिटायर होने से स्थिति और खराब हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द ही यह संख्या 29 तक गिर सकती है। दूसरी ओर, पाकिस्तान के पास 25 स्क्वाड्रन हैं, जिनमें एफ-16, जेएफ-17 और चीनी जे-10सी विमान शामिल हैं। चीन के पास 133 स्क्वाड्रन हैं, और वह 2025 में छठी पीढ़ी के विमान लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है, जबकि भारत का पांचवीं पीढ़ी का उन्नत मध्यम युद्धक विमान (एएमसीए) 2032-33 तक तैयार होगा।
सिब्बल ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस कार्यक्रम की आलोचना की। यह कार्यक्रम 1984 में शुरू हुआ था, लेकिन 2025 तक एक भी विमान पूरी तरह तैयार नहीं हुआ। सिब्बल ने कहा कि एचएएल की उत्पादन क्षमता अपर्याप्त है, और तेजस विमान अभी भी पूरी तरह से परिचालन में नहीं हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि पिछले 11 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में क्या प्रगति हुई। वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने भी फरवरी 2025 में बेंगलुरु में एक एयर शो में एचएएल की देरी की आलोचना की थी।
सिब्बल ने पाकिस्तान और चीन के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग को भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा, “हम केवल पाकिस्तान से नहीं, बल्कि पाकिस्तान और चीन के गठजोड़ से लड़ रहे हैं। चीन पाकिस्तान को उन्नत तकनीक और विमान दे रहा है।” पाकिस्तान के पास चीनी जे-10सी और जेएफ-17 विमान हैं, जो चौथी और 4.5 पीढ़ी के हैं, जबकि भारत का राफेल 4.5 पीढ़ी का विमान है। सिब्बल ने कहा कि भारत के पास राफेल की केवल दो स्क्वाड्रन (36 विमान) हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को सफल बताया, जिसमें भारतीय वायुसेना ने 22 मिनट में नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान के आतंकवादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया और इसका उद्देश्य सीमा पार करना या क्षेत्र पर कब्जा करना नहीं था। हालांकि, विपक्ष ने इस ऑपरेशन पर सवाल उठाए। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने पूछा कि ऑपरेशन में कितने भारतीय विमान खो गए और क्या एक राफेल विमान नष्ट हुआ। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर सुरक्षा चूक के लिए जिम्मेदारी लेने से बचने का आरोप लगाया।
समाजवादी पार्टी के सांसद रामाशंकर राजभर ने कहा कि जनता को पहलगाम हमले के बाद त्वरित और कड़ा जवाब चाहिए था, न कि 17 दिन बाद ऑपरेशन सिंदूर। उन्होंने इसे “
ऑपरेशन सिंदूर” की कमी बताया। शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने पूछा कि अगर ऑपरेशन इतना सफल था, तो भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान से क्यों नहीं छुड़ाया गया।
भारतीय वायुसेना की स्थिति चिंताजनक है। इसके पास 31 स्क्वाड्रन हैं, जिसमें सु-30 एमकेआई, राफेल, मिराज 2000 और मिग-29 जैसे चौथी और 4.5 पीढ़ी के विमान हैं। हालांकि, पुराने मिग-21 और जगुआर विमान रिटायर हो रहे हैं। हाल ही में तीन जगुआर विमानों के प्रशिक्षण के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होने से दो पायलटों की मौत हो गई। भारत ने 2015 में 36 राफेल विमानों का सौदा किया, लेकिन मूल योजना 126 विमानों की थी। 2025 में नौसेना के लिए 26 और राफेल खरीदे गए, लेकिन यह अभी भी अपर्याप्त है।
पाकिस्तान के पास लगभग 76 एफ-16, जेएफ-17 और जे-10सी विमान हैं, जो चीनी तकनीक से लैस हैं। उसके पास 500 एआईएम-120सी-5 मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 100 किमी है, जबकि भारत के राफेल में मेटियोर मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 150-200 किमी है। फिर भी, वायुसेना की कम स्क्वाड्रन संख्या भारत के लिए चिंता का विषय है।
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