इंडिगो संकट के बाद हवाई किराया कैपिंग शुरू, डुओपॉली वाली एविएशन इंडस्ट्री में सरकारी हस्तक्षेप ने यात्रियों को राहत दी।
भारतीय विमानन क्षेत्र में हाल ही में उत्पन्न संकट ने पूरे देश के हवाई यात्रा तंत्र को हिला दिया है, जहां इंडिगो एयरलाइंस की व्यापक उड़ान
भारतीय विमानन क्षेत्र में हाल ही में उत्पन्न संकट ने पूरे देश के हवाई यात्रा तंत्र को हिला दिया है, जहां इंडिगो एयरलाइंस की व्यापक उड़ान रद्दीकरण के कारण हजारों यात्री फंस गए। इस संकट के बाद केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों के किराए पर सख्त कैप लगाने का फैसला किया, जो दूरी के आधार पर 7,500 रुपये से 18,000 रुपये तक सीमित है। यह कदम 6 दिसंबर 2025 को उठाया गया, जब इंडिगो की उड़ानें पांचवें दिन भी प्रभावित रहीं और अन्य एयरलाइंस के किराए में भारी उछाल देखा गया। विमानन मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये कैप तब तक लागू रहेंगे जब तक स्थिति पूरी तरह स्थिर नहीं हो जाती। इस बीच, कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि विमानन मंत्रालय आखिरकार जागा है, लेकिन एयरलाइन सेक्टर में डुओपॉली बनी रहने तक फेयर कैपिंग आवश्यक रहेगी। इंडिगो का संकट 2 दिसंबर 2025 से शुरू हुआ, जब नई फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों के पूर्ण कार्यान्वयन के बाद पायलट और क्रू की कमी के कारण उड़ानें रद्द होने लगीं। ये नियम डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) द्वारा पायलट थकान को कम करने और वैश्विक सुरक्षा मानकों से तालमेल बिठाने के लिए लागू किए गए थे। पहला चरण जुलाई 2025 में और दूसरा नवंबर 2025 में शुरू हुआ। इंडिगो ने स्वीकार किया कि योजना और पूर्वानुमान में चूक हुई, जिससे दैनिक 2,200 उड़ानों में से सैकड़ों रद्द हो गईं। 5 दिसंबर को 1,000 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं, जबकि 6 दिसंबर को यह संख्या 385 तक पहुंची। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्री घंटों इंतजार करते नजर आए।
इस संकट ने घरेलू उड़ानों की क्षमता में भारी कमी ला दी, क्योंकि इंडिगो का बाजार हिस्सा 60 प्रतिशत से अधिक है। अन्य एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया, स्पाइसजेट और अकासा पर दबाव बढ़ गया, जिसके फलस्वरूप किराए में असामान्य वृद्धि हुई। उदाहरण के लिए, दिल्ली-मुंबई मार्ग पर किराया 20,000 रुपये से अधिक हो गया, जबकि कोलकाता-मुंबई के लिए 90,000 रुपये तक पहुंच गया। बेंगलुरु-दिल्ली के किराए 88,000 रुपये के आसपास देखे गए। यह वृद्धि डिमांड-सप्लाई असंतुलन के कारण हुई, जहां स्वचालित राजस्व प्रबंधन सिस्टम ने बची हुई सीटों के दाम बढ़ा दिए। विमानन मंत्रालय ने इसे अवसरवादी मूल्य निर्धारण करार दिया और सभी एयरलाइंस को निर्देश जारी किए कि वे निर्धारित कैप का पालन करें। सरकार ने किराया कैप को दूरी स्लैब के आधार पर तय किया। 500 किलोमीटर तक की दूरी के लिए अधिकतम 7,500 रुपये, 500 से 1,000 किलोमीटर के लिए 12,000 रुपये, 1,000 से 1,500 किलोमीटर के लिए 15,000 रुपये और 1,500 किलोमीटर से अधिक के लिए 18,000 रुपये। ये सीमाएं इकोनॉमी क्लास के लिए हैं और यूजर डेवलपमेंट फीस, पैसेंजर सर्विस फीस तथा करों को छोड़कर हैं। बिजनेस क्लास और उड़ान योजना (यूडैन) के तहत क्षेत्रीय उड़ानें इससे बाहर हैं। यह कैप कोविड-19 महामारी के दौरान 2020 से लागू अंतिम कैप था, जो अगस्त 2022 तक चला। मंत्रालय ने कहा कि किसी भी उल्लंघन पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 4 दिसंबर से ही गैर-स्टॉप घरेलू उड़ानों पर इकोनॉमी क्लास किराए को कैप कर दिया था।
इंडिगो संकट के दौरान यात्रियों को हुई असुविधा को कम करने के लिए सरकार ने अन्य कदम भी उठाए। रेल मंत्रालय ने 37 ट्रेनों में 116 अतिरिक्त कोच जोड़े, मुख्य रूप से दक्षिणी, उत्तरी और पश्चिमी रेलवे में। ये जोड़ 6 दिसंबर से लागू हुए, ताकि हवाई यात्रियों को वैकल्पिक परिवहन उपलब्ध हो। इंडिगो को 5 से 15 दिसंबर के बीच कैंसिलेशन और रीशेड्यूलिंग शुल्क पर पूर्ण छूट दी गई। सभी रद्द या प्रभावित उड़ानों के रिफंड 7 दिसंबर रात 8 बजे तक पूरे करने का आदेश दिया गया। इंडिगो ने 6 दिसंबर को 1,500 उड़ानें संचालित करने का लक्ष्य रखा, जो 138 में से 135 गंतव्यों को कवर करेगा। 95 प्रतिशत नेटवर्क कनेक्टिविटी बहाल हो चुकी थी। डीजीसीए ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को शो-कॉज नोटिस जारी किया, जिसमें योजना, निगरानी और संसाधन प्रबंधन में महत्वपूर्ण चूक का उल्लेख है। इंडिगो को 24 घंटे में जवाब देना था। सरकार ने एफडीटीएल नियमों के कुछ प्रावधानों को 10 फरवरी 2026 तक स्थगित कर दिया, जिसमें रात्रि उड़ानों की परिभाषा और साप्ताहिक आराम को शामिल किया गया। हालांकि, पायलट यूनियनों ने इसका विरोध किया, कहा कि सुरक्षा से समझौता नहीं होना चाहिए। इंडिगो ने माफी मांगी और कहा कि यह संचालन संकट योजना अंतराल के कारण हुआ। एयरलाइन ने पायलट भर्ती पर रिपोर्ट हर 15 दिन में जमा करने का वादा किया।
इस संकट ने भारतीय विमानन उद्योग में डुओपॉली की समस्या को उजागर किया, जहां इंडिगो और एयर इंडिया समूह मिलकर 86 प्रतिशत से अधिक बाजार नियंत्रित करते हैं। एयर इंडिया का हिस्सा विंटर, एयर एशिया इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के विलय के बाद 26 प्रतिशत हो गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने कम खिलाड़ियों के कारण एक एयरलाइन की समस्या पूरे सिस्टम को प्रभावित करती है। डायनामिक प्राइसिंग संतुलित बाजार में काम करती है, लेकिन डुओपॉली में यह यात्रियों के लिए बोझ बन जाती है। विमानन क्षेत्र में पहले कई एयरलाइंस जैसे जेट एयरवेज, किंगफिशर और गोएयर बंद हो चुकी हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा कम हुई। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने 7 दिसंबर को इस डुओपॉली पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विमानन मंत्रालय आखिरकार जागा है और इकोनॉमी क्लास किराए पर कैप लगाया है। लेकिन जब तक एयरलाइन सेक्टर में डुओपॉली बनी रहेगी, तब तक ये कैप लागू रहने चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि मजबूत प्रतिस्पर्धा के अभाव में सार्वजनिक हित की रक्षा का एकमात्र तरीका मूल्य नियंत्रण है। अधिकांश यात्री इकोनॉमी क्लास में यात्रा करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा आवश्यक है। चिदंबरम ने पहले भी कहा था कि इंडिगो संकट प्रबंधन, मंत्रालय, डीजीसीए और पूरी सरकार की बड़ी विफलता दर्शाता है। नई एफडीटीएल नियम जनवरी 2024 में अधिसूचित हुए थे, लेकिन पिछले 23 महीनों में सरकार ने एयरलाइंस को अनुकूलन में मार्गदर्शन नहीं दिया। संकट बढ़ने पर सरकार असहाय नजर आई और अंततः नियमों में छूट दे दी।
चिदंबरम की टिप्पणी विमानन उद्योग की संरचनात्मक कमजोरियों पर केंद्रित रही। उन्होंने कहा कि उदारीकरण और खुली अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धा पर आधारित है। प्रतिस्पर्धा के अभाव में विमानन जैसे क्षेत्रों में हानिकारक परिणाम सामने आते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में एक जीवंत और प्रतिस्पर्धी विमानन उद्योग को दो खिलाड़ियों के व्यवसाय में कैसे बदल दिया गया। यह डुओपॉली कई क्षेत्रों में मौजूद है, लेकिन विमानन में यह यात्रियों को सीधे प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम से कम तीन-चार प्रमुख एयरलाइंस होने चाहिए ताकि स्थिरता बनी रहे और एक की विफलता पूरे नेटवर्क को न हिलाए। सरकार ने संकट की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की, जो इंडिगो पर क्या गलत हुआ, जिम्मेदारी तय करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाएगी। संसदीय पैनल इंडिगो अधिकारियों और डीजीसीए को बुला सकता है। विमानन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है और 10-15 दिसंबर तक सामान्य संचालन बहाल हो जाएगा। इंडिगो ने 7 दिसंबर को 2,300 में से 1,650 उड़ानें संचालित कीं, जबकि 650 रद्द रहीं। हैदराबाद में 100 से अधिक रद्दियां हुईं। मंत्रालय ने कहा कि अन्य एयरलाइंस पूर्ण क्षमता पर चल रही हैं।
इस संकट ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया। रेलवे ने प्रीमियम ट्रेनों में चेयर कार और स्लीपर क्लास कोच जोड़े। दक्षिणी रेलवे ने 18 ट्रेनों में वृद्धि की। इंडिगो ने मालिकों को होटल आवास प्रदान करने का वादा किया। रिफंड प्रक्रिया में देरी पर सख्ती बरती गई। संकट के दौरान मौसम सामान्य रहा, लेकिन शादी और छुट्टियों के पीक सीजन ने दबाव बढ़ाया। इंडिगो ने सॉफ्टवेयर अपग्रेड और क्रू रोटेशन में सुधार का वादा किया। विमानन क्षेत्र की वृद्धि के बावजूद, डुओपॉली ने जोखिम बढ़ा दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत नियामक निगरानी और अधिक प्रतिस्पर्धा आवश्यक है। किराया कैप ने तत्काल राहत दी, लेकिन लंबे समय के लिए बाजार संतुलन जरूरी है। पी चिदंबरम की मांग मूल्य नियंत्रण को स्थायी बनाने की है, जब तक प्रतिस्पर्धा मजबूत न हो। संकट ने दिखाया कि एक एयरलाइन की समस्या पूरे देश को प्रभावित कर सकती है। सरकार ने कहा कि सभी हवाई अड्डों पर संचालन सुधर रहा है। दिल्ली में 108 रद्दियां हुईं, लेकिन कनेक्टिविटी बहाल हो रही है।
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