'दीवाली मनाने के बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता बनी रही', सीएम रेखा गुप्ता के इस बयान पर विपक्ष ने साधा निशाना

यह 2020 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था, जहां एक रात में पीक 675 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंचा। प्री-दीवाली स्तर 156.6 था, जो 212 प्रतिशत की छलांग लगाकर रिकॉर्ड तोड़ दिया। पंजाब-हरियाणा में

Dec 7, 2025 - 11:24
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'दीवाली मनाने के बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता बनी रही', सीएम रेखा गुप्ता के इस बयान पर विपक्ष ने साधा निशाना
'दीवाली मनाने के बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता बनी रही', सीएम रेखा गुप्ता के इस बयान पर विपक्ष ने साधा निशाना

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दावा किया है कि दीवाली समारोहों के बावजूद शहर की वायु गुणवत्ता बनी रही और प्रदूषण स्तर पिछले वर्षों की तुलना में कम रहा। उन्होंने कहा कि फायरक्रैकर्स की अनुमति मिलने के बाद भी दीवाली से पहले और बाद का AQI गैप कम हुआ, जो प्रदूषण में कमी का संकेत है। यह बयान 6 दिसंबर 2025 को एचटी लीडरशिप समिट में दिया गया, जहां गुप्ता ने कहा कि सरकार ने 10 महीनों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए तेजी से कदम उठाए हैं। हालांकि, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, दीवाली के दौरान दिल्ली का AQI 345 तक पहुंचा, जो बहुत खराब श्रेणी में था और 2024 के 328, 2023 के 218 तथा 2022 के 312 से अधिक था। यह पांच वर्षों में सबसे खराब पोस्ट-दीवाली हवा का स्तर था, जहां PM2.5 का औसत 488 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, जो प्री-दीवाली स्तर से 212 प्रतिशत अधिक था। गुप्ता के दावे और वास्तविक आंकड़ों के बीच स्पष्ट विरोधाभास है, जहां दीवाली रात को फायरक्रैकर्स के धुएं ने हवा को विषैली बना दिया।

दीवाली 20 अक्टूबर 2025 को मनाई गई, जब सुप्रीम कोर्ट ने दो घंटे के लिए ग्रीन फायरक्रैकर्स की अनुमति दी। गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि दीवाली के अगले दिन का AQI पिछले सरकारों की तुलना में कम था, भले ही फायरक्रैकर्स फूटे हों। उन्होंने दावा किया कि प्रदूषण स्थिर रहा और सरकार ने धूल नियंत्रण के लिए मिस्ट टेक्नोलॉजी, स्लम क्षेत्रों में गैस कनेक्शन तथा इलेक्ट्रिक बसों का विस्तार किया। लेकिन CPCB के डेटा से पता चलता है कि दीवाली सुबह 8 बजे AQI 337 था, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। शाम तक यह 344 हो गया, जबकि चार स्टेशनों पर 400 से ऊपर का गंभीर स्तर दर्ज हुआ। 21 अक्टूबर को AQI 351 तक पहुंच गया, जो 19 अक्टूबर के 326 से अधिक था। यह वृद्धि फायरक्रैकर्स के उपयोग से जुड़ी थी, जो कानूनी समय सीमा से आगे चली, प्रदूषण के आंकड़ों में रिकॉर्ड टूटने की बात सामने आई है। क्लाइमेट ट्रेंड्स के विश्लेषण के अनुसार, दीवाली के बाद PM2.5 का औसत 488 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रहा, जो WHO की सुरक्षित सीमा से 100 गुना अधिक है। यह 2020 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था, जहां एक रात में पीक 675 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर पहुंचा। प्री-दीवाली स्तर 156.6 था, जो 212 प्रतिशत की छलांग लगाकर रिकॉर्ड तोड़ दिया। पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 77 प्रतिशत घटीं, फिर भी दिल्ली की हवा विषैली हो गई। फायरक्रैकर्स के धुएं ने PM2.5 को 19-20 अक्टूबर की रातों के बीच तेजी से बढ़ाया। ग्रीन फायरक्रैकर्स का दावा खोखला साबित हुआ, क्योंकि सामान्य पटाखों से कोई मापनीय अंतर नहीं पड़ा। CPCB के 38 में से 36 स्टेशनों पर लाल जोन दर्ज हुआ, जो बहुत खराब से गंभीर तक था।

गुप्ता ने 22 अक्टूबर को कहा कि दीवाली रात का प्रदूषण पिछले वर्ष से कम था, लेकिन डेटा उल्टा कहता है। 2025 का दीवाली AQI 345 था, जो 2021 के 382 के करीब लेकिन 2024 के 328 से ऊंचा। पोस्ट-दीवाली AQI 351 रहा, जो 2023 के 358 से थोड़ा कम लेकिन 2022 के 339 से अधिक। गुप्ता ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान के स्टेज II को लागू करने का उल्लेख किया, लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि स्टेज II के बावजूद प्रदूषण बढ़ा। 21 अक्टूबर सुबह 7 बजे AQI 451 तक पहुंचा, जो राष्ट्रीय सुरक्षित सीमा से दोगुना था। नोएडा और गुड़गांव में 407 और 402 दर्ज हुआ, जो प्रदूषण के फैलाव को दर्शाता है। अशोक विहार में 445, आनंद विहार में 440 तथा वजीरपुर में 435 का स्तर गंभीर था। मॉनिटरिंग स्टेशनों में डेटा गैप ने विवाद बढ़ाया। 20-21 अक्टूबर की रात में 39 में से सिर्फ 11 स्टेशनों ने निरंतर रिकॉर्डिंग की, जबकि 28 स्टेशनों का डेटा पीक प्रदूषण घंटों में गायब रहा। चांदनी चौक में 12:45 am पर AQI 876 था, जो 3:15 am पर 998.8 हो गया। आनंद विहार में 11 pm पर 627 के बाद 4 am तक डेटा रुका। कुल 173 घंटे का डेटा गुम था, जिसमें 163 पीक समय के थे। यह 2024 के 34 घंटों से कहीं अधिक था। CPCB के अनुसार, दीवाली रात 10 pm से 13 घंटे तक AQI 400 से ऊपर रहा। अगर गुम डेटा को एक्सट्रापोलेट किया जाए, तो औसत AQI 380 से ऊपर होता, जो गंभीर श्रेणी में आता। गुप्ता ने विपक्ष के डेटा टैंपरिंग आरोपों को खारिज किया, कहा कि डेटा टैंपरप्रूफ है।

सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के उपाय बताए। गुप्ता ने कहा कि धूल कम करने के लिए मिस्ट मशीनें लगाई गईं, स्लम में गैस कनेक्शन दिए गए तथा सिक्योरिटी गार्डों को हीटर प्रदान किए ताकि खुले में जलाने की जरूरत न पड़े। पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक बसें बढ़ाई गईं। यमुना नदी से प्रदूषण हटाने के लिए म्यूनिसिपल ड्रेन टैपिंग तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपग्रेड किए गए। लेकिन इन उपायों के बावजूद दीवाली के बाद AQI बहुत खराब से गंभीर रहा। 8 नवंबर को AQI 355 तक पहुंचा, जो स्टेज II के तहत था। गुप्ता ने जनता से कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के उपयोग की अपील की। विंटर सीजन के लिए सरकारी ऑफिस टाइमिंग बदली गईं ताकि ट्रैफिक लोड बंटे। दीवाली से पहले 19 अक्टूबर को AQI 326 था, जो स्टेज II लागू होने के बाद भी बढ़ा। ग्रीन फायरक्रैकर्स की अनुमति के बावजूद फायरक्रैकर्स रातभर फूटे, जो सुप्रीम कोर्ट के दो घंटे के आदेश का उल्लंघन था। क्लाइमेट ट्रेंड्स ने कहा कि 2025 की दीवाली हाल के वर्षों में सबसे प्रदूषित रही, जहां PM2.5 4 pm से 11 pm तक 150 से 650 तक उछला। यह स्पाइक फायरक्रैकर्स से जुड़ा था। दिल्ली में 38 स्टेशनों में से 34 लाल जोन में थे। वजीरपुर और जहांगीरपुरी में 408, बुराड़ी क्रॉसिंग में 405 तथा शादिपुर में 399 दर्ज हुआ। द्वारका, मुंडका तथा मेजर ध्यान चंद स्टेडियम जैसे इलाकों में भी उच्च स्तर था।

गुप्ता ने 6 दिसंबर को फिर कहा कि प्रदूषण विरासत समस्या है, जिसे हल करने के लिए सबकी सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि सख्ती अकेले पर्याप्त नहीं। फायरक्रैकर्स बैन के बावजूद AQI पिछले वर्ष जैसा रहा। लेकिन डेटा दिखाता है कि 2025 में वृद्धि अधिक थी। विपक्ष ने स्टेशनों को बंद करने का आरोप लगाया, लेकिन गुप्ता ने कहा कि डेटा में हेरफेर नहीं हो सकता। क्लाउड सीडिंग ट्रायल पर भी बहस हुई। पोस्ट-दीवाली हेल्थ रिस्क बढ़े, जहां सांस की बीमारियां तथा हृदय रोगों का खतरा अधिक हुआ। मेडिकल एक्सपर्ट्स ने कहा कि दिल्ली की हवा में सांस लेना 10 सिगरेट पीने के बराबर है। प्रदूषण के स्रोतों में वाहन उत्सर्जन, धूल तथा खुले जलाने शामिल हैं। दिल्ली की जनसंख्या वृद्धि तथा वाहनों की संख्या ने समस्या बढ़ाई। गुप्ता ने कहा कि सरकार ने निर्माण कार्य 21 प्रतिशत बढ़ाने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रित किया। लेकिन आंकड़े उल्टा कहते हैं। 2021 में पोस्ट-दीवाली AQI 462 था, जो पांच वर्षों का रिकॉर्ड था। 2025 में PM2.5 का अधिकतम 675 रहा। स्टेज II में निर्माण सीमित किया गया, लेकिन प्रभाव कम पड़ा। दिल्ली-NCR में GRAP लागू रहा, जहां स्टेज III की आशंका बनी। गुप्ता ने छठ पूजा के लिए यमुना किनारे 1000 से अधिक स्पॉट तैयार किए। लेकिन प्रदूषण ने उत्सवों को प्रभावित किया।

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