बिहार चुनाव 2025: काराकाट सीट पर हार के बाद ज्योति सिंह ने तोड़ी चुप्पी, कहा- यह लड़ाई किसी को हराने के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं, शोषितों और वंचितों की आवाज बनने के लिए लड़ी थी।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ऐतिहासिक जीत के बीच रोहतास जिले की
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ऐतिहासिक जीत के बीच रोहतास जिले की काराकाट विधानसभा सीट पर एक रोचक मुकाबला देखने को मिला। यहां निर्दलीय उम्मीदवार ज्योति सिंह, जो भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी हैं, को तीसरा स्थान मिला। शुरुआती गिनती में उन्हें बढ़त मिलती दिख रही थी, लेकिन अंतिम परिणामों में मुकाबला सीपीआई माले के डॉ. अरुण कुमार और जनता दल यूनाइटेड के महाबली सिंह के बीच सिमट गया। डॉ. अरुण कुमार ने 73,793 वोटों के साथ जीत हासिल की, जबकि महाबली सिंह को 71,089 वोट मिले। ज्योति सिंह को महज 21,948 वोट ही प्राप्त हुए, जिससे वे 50,688 वोटों से पीछे रहीं। हार के बाद ज्योति ने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी और सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध कविता का हवाला देते हुए लिखा कि हार नहीं मानूंगी, रार नहीं ठानूंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव उन्होंने किसी को हराने के लिए नहीं, बल्कि महिलाओं, शोषितों और वंचितों की आवाज बनने के लिए लड़ा था।
काराकाट विधानसभा सीट रोहतास जिले में आती है और यह सामान्य श्रेणी की सीट है। यहां कुल 31 राउंड की गिनती हुई, जिसमें शुरुआती राउंड्स में ज्योति सिंह आगे नजर आईं। 14वें राउंड तक जनता दल यूनाइटेड के महाबली सिंह ने बढ़त ले ली, जबकि सीपीआई माले के अरुण सिंह तीसरे स्थान पर थे। लेकिन अंत में अरुण सिंह ने पलटवार किया और जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कुल वोटर 2.5 लाख से अधिक थे और मतदान प्रतिशत 68 प्रतिशत के आसपास रहा। 11 नवंबर को दूसरे चरण में हुए मतदान के बाद यह सीट सुर्खियों में रही, क्योंकि यहां पांच प्रमुख उम्मीदवार मैदान में थे। जन सुराज पार्टी के योगेंद्र सिंह को भी 15,000 से अधिक वोट मिले, लेकिन वे चौथे स्थान पर रहे। काराकाट सीट का इतिहास देखें तो यह वामपंथी दलों का गढ़ रही है। 2020 में अरुण सिंह ने ही यहां से जीत हासिल की थी, जब उन्होंने भाजपा के राजेश्वर राज को 18,189 वोटों से हराया था। 2015 में आरजेडी के संजय कुमार सिंह विजयी हुए थे, जबकि 2010 में जनता दल यूनाइटेड के राजेश्वर राज ने 49,751 वोटों से जीत दर्ज की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी काराकाट से सीपीआई के राजा राम सिंह ने निर्दलीय पवन सिंह को 1,05,858 वोटों से हराया था। इस बार भी वोटों का ध्रुवीकरण पारंपरिक दलों के पक्ष में रहा।
ज्योति सिंह का राजनीति में प्रवेश एक पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। भोजपुरी इंडस्ट्री के पावर स्टार पवन सिंह, जो भाजपा से जुड़े हैं, ने मूल रूप से काराकाट से चुनाव लड़ने का मन बनाया था। लेकिन उनकी विवादास्पद छवि की वजह से भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया। पवन सिंह को पिछले साल ही पार्टी से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्होंने निर्दलीय लड़ने का फैसला किया, लेकिन अंत में पीछे हट गए और कहा कि वे भाजपा के सच्चे सिपाही हैं। इस बीच ज्योति सिंह ने पति पर बेवफाई का आरोप लगाया और खुद निर्दलीय उम्मीदवार बन गईं। चुनाव से ठीक पहले उन्होंने प्राशांत किशोर से मुलाकात की, जो जन सुराज पार्टी के संस्थापक हैं। हालांकि इस मुलाकात का कोई आधिकारिक विवरण नहीं आया, लेकिन इसे ज्योति के अभियान का हिस्सा माना गया। ज्योति ने अपनी रैली में महिलाओं की सुरक्षा, शोषित वर्गों के उत्थान और स्थानीय विकास पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वे सितारों की पत्नी नहीं, बल्कि बिहार की बेटी हैं। उनका अभियान सोशल मीडिया पर भी जोरदार रहा, जहां भोजपुरी गानों और भावुक अपीलों से युवाओं को जोड़ा गया। लेकिन पारंपरिक वोट बैंक के आगे यह प्रयास कमजोर पड़ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्योति के वोट एनडीए के महाबली सिंह के खाते में गए, जिससे सीपीआई माले को फायदा हुआ।
हार के बाद ज्योति सिंह का सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो गया। उन्होंने इंस्टाग्राम और एक्स पर वाजपेयी जी की कविता 'हार नहीं मानूंगा' का अंश शेयर किया। इसमें लिखा था कि हार नहीं मानूंगी, रार नहीं ठानूंगी, लड़ती रहूंगी, जीत जाऊंगी। ज्योति ने कहा कि यह यात्रा किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं थी, बल्कि बिहार की महिलाओं, गरीबों और वंचितों के लिए थी। उन्होंने धन्यवाद दिया उन लोगों को जिन्होंने उनका साथ दिया। ज्योति का यह बयान न केवल हार को गरिमापूर्ण तरीके से स्वीकार करता है, बल्कि राजनीति में लंबे संघर्ष का संकेत भी देता है। पवन सिंह ने भी पत्नी की हार पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ज्योति ने बहादुरी से लड़ा और हम आगे बढ़ेंगे। लेकिन पारिवारिक कलह अभी भी चर्चा में है। ज्योति ने प्रचार के दौरान पति पर निजी आरोप लगाए थे, जिससे उनका वैवाहिक जीवन सुर्खियों में रहा। पवन सिंह, जो रियलिटी शो राइज एंड फॉल में नजर आए थे, ने कहा कि वे परिवार के प्रति वफादार हैं।
यह चुनाव बिहार की राजनीति में सेलिब्रिटी कैंडिडेट्स की असफलता को भी उजागर करता है। काराकाट के अलावा छपरा से खेसारी लाल यादव, करगहर से रितेश पांडेय जैसे सितारे हार गए। केवल सिंगर मैथिली ठाकुर ही अलीनगर से जीत सकीं। एनडीए की कुल 202 सीटों की जीत में भाजपा को 89, जेडीयू को 85, एलजेपी आरवी को 19 सीटें मिलीं। विपक्षी महागठबंधन को 35 सीटें ही नसीब हुईं। महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान और कल्याण योजनाओं ने एनडीए को फायदा पहुंचाया। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे विकास की जीत बताया, जबकि नीतीश कुमार ने दसवें कार्यकाल का संकल्प लिया। ज्योति सिंह की हार से साफ है कि स्टार पावर अकेले पर्याप्त नहीं, स्थानीय मुद्दों और संगठन की जरूरत है।
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