मालेगांव नगर निगम चुनाव में ISLAM पार्टी का बड़ा उलटफेर, 35 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, मेयर बनने की राह आसान।
महाराष्ट्र के मालेगांव में नगर निगम चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, जहां नई पार्टी 'ISLAM' (Indian Secular Largest Assembly of Maharashtra) ने सबसे
- ओवैसी की AIMIM को 21 सीटें मिलीं लेकिन ISLAM पार्टी ने छीना वोट बैंक, मालेगांव में नया मेयर कौन बनेगा
- मुस्लिम बहुल मालेगांव में कांग्रेस का दबदबा टूटा, ISLAM पार्टी 35 सीटों पर कब्जा, AIMIM से समर्थन मांगने की अटकलें
महाराष्ट्र के मालेगांव में नगर निगम चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, जहां नई पार्टी 'ISLAM' (Indian Secular Largest Assembly of Maharashtra) ने सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरकर 35 सीटें जीतीं। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 21 सीटें हासिल कीं, लेकिन बहुमत से चूक गई 'ISLAM' पार्टी अब मेयर पद पर अपना दावा मजबूत कर रही है।
मालेगांव महानगरपालिका के चुनाव में कुल 84 सीटों के लिए मतदान हुआ था, जहां कोई भी पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी। ISLAM पार्टी, जो पूर्व विधायक असिफ शेख द्वारा गठित की गई है और अपनी पहली चुनावी लड़ाई में उतरी थी, ने 35 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा प्राप्त किया। यह पार्टी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ी थी, जिसे 5 या 6 सीटें मिलीं, जिससे गठबंधन की कुल संख्या 40-41 के आसपास पहुंच गई। बहुमत के लिए 43 सीटों की जरूरत है, लेकिन यह संख्या निकटतम है और बाहरी समर्थन से मेयर पद पर कब्जा संभव है।
AIMIM, जो पहले मालेगांव में मजबूत स्थिति रखती थी, इस बार 21 सीटें जीतकर दूसरे स्थान पर रही। पार्टी ने पिछले चुनावों की तुलना में सीटों में वृद्धि की, लेकिन ISLAM पार्टी ने मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाकर इसका प्रभाव कम कर दिया। AIMIM के विधायक मुफ्ती इस्माइल कासमी के प्रभाव के बावजूद पार्टी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई। कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा और उसे महज 3 सीटें मिलीं, जो पहले उसके दबदबे वाले क्षेत्र में बड़ा झटका है। शिवसेना को 18 सीटें मिलीं, जबकि भाजपा को केवल 2 सीटें हासिल हुईं।
चुनाव परिणामों से साफ है कि मालेगांव में सत्ता गठबंधन पर निर्भर करेगी। ISLAM पार्टी और समाजवादी पार्टी का सेक्युलर फ्रंट पहले से ही 40 सीटों के करीब है, जो मेयर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। यदि समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस की 3 सीटें जुड़ जाती हैं, तो ISLAM पार्टी का पहला मेयर बनना लगभग तय माना जा रहा है। AIMIM की भूमिका यहां किंगमेकर की हो सकती है, लेकिन अभी तक AIMIM से समर्थन मांगने या गठबंधन की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिणामों के बाद सत्ता समीकरण बनाने की गतिविधियां तेज हो गई हैं।
ISLAM पार्टी का मुख्य फोकस मालेगांव के पावरलूम उद्योग को बचाने, बुनकरों को बिजली-पानी जैसी सुविधाएं दिलाने पर रहा, जिसने स्थानीय मुद्दों पर वोट हासिल करने में मदद की। पार्टी ने खुद को स्थानीय विकल्प के रूप में पेश किया, जिससे AIMIM के पारंपरिक समर्थकों में भी विभाजन हुआ। कांग्रेस के लंबे समय से चले आ रहे प्रभाव का अंत हुआ, क्योंकि मतदाताओं ने स्थानीय और नई ताकत को प्राथमिकता दी। चुनाव में मुस्लिम बहुल वार्डों में यह बदलाव स्पष्ट दिखा।
परिणाम घोषित होने के बाद ISLAM पार्टी के नेता ने कहा कि सेक्युलर फ्रंट की 40 सीटें विकास के लिए जनादेश हैं। AIMIM ने राज्य स्तर पर कुल 114-126 सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी मजबूत की, लेकिन मालेगांव में दूसरे स्थान पर रहकर स्थानीय चुनौती का सामना किया। शिवसेना और अन्य दलों की सीटें कम होने से गठबंधन की संभावनाएं सीमित हैं। मेयर चुनाव जल्द होने की उम्मीद है, जहां बहुमत साबित करना होगा।
मालेगांव नगर निगम में यह चुनाव कांग्रेस के दबदबे का अंत और नई पार्टी के उदय का प्रतीक है। ISLAM पार्टी की सफलता स्थानीय मुद्दों और गठबंधन रणनीति पर आधारित रही। AIMIM की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट गठबंधन नहीं बना। सत्ता की दौड़ में बाहरी समर्थन निर्णायक होगा।
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