समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल पर शिवपाल सिंह यादव का तीखा हमला: 'वह दोबारा विधायक नहीं बन पाएंगी'। 

Political: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद तब सामने आया, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी से....

Aug 16, 2025 - 12:39
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समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल पर शिवपाल सिंह यादव का तीखा हमला: 'वह दोबारा विधायक नहीं बन पाएंगी'। 
समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल पर शिवपाल सिंह यादव का तीखा हमला: 'वह दोबारा विधायक नहीं बन पाएंगी'। 

उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद तब सामने आया, जब समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल पर तीखा हमला बोला। इटावा में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए शिवपाल ने कहा कि पूजा पाल का हाल वही होगा, जो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता केशव प्रसाद मौर्य का हुआ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पूजा पाल अब कभी विधायक का चुनाव नहीं जीत पाएंगी। यह बयान तब आया, जब एक दिन पहले, 14 अगस्त 2025 को, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूजा पाल को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पूजा पाल, जो कौशाम्बी के चैल विधानसभा क्षेत्र से सपा की विधायक थीं, ने 13 अगस्त 2025 को उत्तर प्रदेश विधानसभा में आयोजित 24 घंटे के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपराध विरोधी नीतियों की तारीफ की थी। इस सत्र में, जो 'विजन डॉक्यूमेंट 2047' पर चर्चा के लिए आयोजित किया गया था, पूजा पाल ने कहा था कि योगी आदित्यनाथ ने उनके पति, बसपा विधायक राजू पाल के हत्यारे, माफिया-राजनेता अतीक अहमद को मिट्टी में मिलाने का काम किया। उन्होंने कहा, "सबको पता है कि मेरे पति की हत्या किसने की थी। मुख्यमंत्री ने मेरी बात सुनी, जब कोई और सुनने को तैयार नहीं था। उनकी जीरो टॉलरेंस नीति ने अतीक जैसे अपराधियों का खात्मा किया।" इस बयान ने समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को नाराज कर दिया, क्योंकि यह सपा और भाजपा के बीच कटु राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के खिलाफ था।

पूजा पाल की यह तारीफ उनके निजी अनुभवों से प्रेरित थी। पूजा पाल की कहानी दुख और संघर्ष से भरी है। प्रयागराज के कटघर इलाके में एक गरीब परिवार में जन्मीं पूजा ने अपने पिता के टायर पंचर ठीक करने के काम में मदद की और पढ़ाई के साथ-साथ छोटे-मोटे काम किए। अस्पताल में काम करते समय उनकी मुलाकात बसपा के उभरते नेता राजू पाल से हुई। दोनों में प्रेम हुआ, और 16 जनवरी 2005 को उनकी शादी हुई। लेकिन मात्र नौ दिन बाद, 25 जनवरी 2005 को, राजू पाल की प्रयागराज में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्या का आरोप अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ पर लगा, जो राजू पाल की इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा सीट पर जीत के बाद बदले की भावना से प्रेरित थे। इस त्रासदी के बाद पूजा पाल ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पति की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया। बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें राजू पाल की सीट पर उपचुनाव के लिए टिकट दिया, लेकिन वह हार गईं। फिर भी, उन्होंने हार नहीं मानी और 2007 और 2012 में इलाहाबाद पश्चिम से बसपा के टिकट पर जीत हासिल की। 2017 में वह भाजपा के सिद्धार्थ नाथ सिंह से हार गईं। इसके बाद, 2018 में बसपा से निष्कासित होने पर वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुईं और 2022 में अखिलेश यादव के समर्थन से चैल सीट से विधायक चुनी गईं। पूजा पाल का यह निष्कासन सपा के लिए एक और विवादास्पद कदम है। 14 अगस्त 2025 को, अखिलेश यादव ने एक पत्र जारी कर पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित करने की घोषणा की, जिसमें कहा गया कि उन्होंने बार-बार पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया और चेतावनियों के बावजूद अपनी हरकतों को नहीं रोका। यह निष्कासन पूजा पाल के उस बयान के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें उन्होंने योगी सरकार की तारीफ की थी। इससे पहले, फरवरी 2024 में पूजा पाल ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की थी, जिसके लिए सपा ने उन्हें तब निष्कासित नहीं किया था। लेकिन इस बार उनके बयान को पार्टी ने अनुशासनहीनता माना और तत्काल कार्रवाई की।

शिवपाल सिंह यादव का बयान इस मामले को और गर्म कर गया। इटावा में उन्होंने कहा, "पूजा पाल ने पार्टी अनुशासन का पालन नहीं किया। जो हाल केशव प्रसाद मौर्य का हुआ, वही उनका होगा। वह अब कभी विधायक नहीं बन पाएंगी।" शिवपाल का इशारा केशव प्रसाद मौर्य की घटती राजनीतिक ताकत की ओर था, जो कभी उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रमुख चेहरों में से एक थे, लेकिन हाल के वर्षों में उनकी स्थिति कमजोर हुई है। शिवपाल ने यह भी कहा कि पूजा पाल की हरकतें पार्टी के लिए नुकसानदायक थीं और उनकी निष्कासन जरूरी थी।

इस बयान पर प्रतिक्रियाएं मिश्रित रही हैं। भाजपा नेताओं ने पूजा पाल का समर्थन किया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर पूजा पाल का निष्कासन सपा की "संकीर्ण मानसिकता" को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पूजा पाल ने केवल अपने पति के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए योगी आदित्यनाथ की तारीफ की थी, और यह निष्कासन सपा की "महिला विरोधी" नीति को दिखाता है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी सपा पर हमला बोला और कहा कि सपा पिछड़ा वर्ग विरोधी है। उन्होंने पूजा पाल को एक पीड़ित महिला के रूप में समर्थन दिया, जो अपने पति की हत्या के बाद न्याय की लड़ाई लड़ रही थी। पूजा पाल ने अपने निष्कासन के बाद मीडिया से बात करते हुए अपने बयान पर कायम रहने की बात कही। उन्होंने कहा, "मैं प्रयागराज की उन महिलाओं की आवाज हूं, जिन्होंने अपराधियों के कारण अपने प्रियजनों को खोया है। मैं पहले एक पीड़ित पत्नी हूं, फिर विधायक। मैंने वही कहा, जो मैंने वर्षों से महसूस किया। अतीक अहमद ने मेरे पति की हत्या की थी, और योगी सरकार ने मुझे न्याय दिलाया।" उन्होंने यह भी कहा कि वह सपा की नीतियों के खिलाफ नहीं थीं, बल्कि केवल अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और न्याय की बात कर रही थीं।

इस घटना ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई सवाल खड़े किए हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पूजा पाल का निष्कासन सपा के लिए नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि वह पाल समुदाय से आती हैं, जो पूर्वांचल में एक महत्वपूर्ण वोट बैंक है। सपा ने पहले भी इस समुदाय को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की थी, और पूजा पाल को 2022 में टिकट देना इसी रणनीति का हिस्सा था। हालांकि, सपा के पास अब श्यामलाल पाल जैसे अन्य पाल समुदाय के नेता हैं, जिसके कारण पार्टी ने यह कदम उठाया। सोशल मीडिया पर भी इस मामले ने खूब चर्चा बटोरी। एक एक्स पोस्ट में एक यूजर ने लिखा कि पूजा पाल की तारीफ केवल उनके निजी अनुभव पर आधारित थी, और सपा का यह कदम उनकी भावनाओं का अपमान है। एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि क्या सपा अपराध के खिलाफ कार्रवाई का समर्थन नहीं करती। हालांकि, सपा समर्थकों ने पूजा पाल के निष्कासन का समर्थन किया और कहा कि विपक्षी दल के नेता की तारीफ करना अनुशासनहीनता है।

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