हास्पिटल से गायब हुई तीन दिन की बच्ची, सस्पेंस से भरपूर मलयालम थ्रिलर, पिता पर भी पुलिस का शक, निविन पॉली की फिल्म बनी मस्ट वॉच ओटीटी पर रिलीज
फिल्म का नाम बेबी गर्ल है जिसे अरुण वर्मा ने निर्देशित किया है। पटकथा बॉबी और संजय ने लिखी है। मुख्य भूमिका में निविन पॉली हैं जो अस्पताल में अटेंडेंट सनल मैथ्यू का किरदार
मलयालम भाषा की एक नई सस्पेंस थ्रिलर फिल्म में तीन दिन की नवजात बच्ची अस्पताल से अगवा हो जाती है। यह घटना तिरुवनंतपुरम के एक अस्पताल में क्रिसमस ईव पर घटित होती है। फिल्म में बच्ची के गायब होने के बाद जांच शुरू होती है जिसमें कई संदिग्ध सामने आते हैं। पुलिस जांच के दौरान बच्ची के पिता पर भी शक जाता है।
फिल्म का नाम बेबी गर्ल है जिसे अरुण वर्मा ने निर्देशित किया है। पटकथा बॉबी और संजय ने लिखी है। मुख्य भूमिका में निविन पॉली हैं जो अस्पताल में अटेंडेंट सनल मैथ्यू का किरदार निभाते हैं। सनल पर लापरवाही का आरोप लगता है और वह जांच में मुख्य संदिग्ध बन जाता है। कहानी की शुरुआत अस्पताल में कोड पिंक अलर्ट से होती है जो नवजात के गायब होने पर जारी किया जाता है। बच्ची की मां और परिवार परेशान हो जाते हैं। पुलिस जांच शुरू करती है जिसमें अस्पताल स्टाफ, अटेंडेंट और अन्य लोगों से पूछताछ की जाती है। सनल को काम पर देर से आने के कारण संदेह होता है। वह अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए खुद जांच में शामिल होता है। फिल्म में बच्ची की तलाश की प्रक्रिया दिखाई गई है जिसमें भावनात्मक पहलू भी जुड़े हैं। दो माताओं की कहानी और भाई-बहन के रिश्ते को भी फिल्म में जगह दी गई है।
निविन पॉली के अलावा लिजोमोल जोस और संगीत प्रताप महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फिल्म में सस्पेंस बनाए रखने के लिए कई ट्विस्ट दिए गए हैं। जांच के दौरान सच धीरे-धीरे सामने आता है। फिल्म थियेट्रिकल रिलीज के लगभग २० दिनों बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हुई। यह दर्शकों को बांधे रखने वाली कहानी के लिए जानी जा रही है। नवजात के अगवा की घटना पर आधारित होने से भावुकता और रोमांच दोनों मौजूद हैं। पुलिस जांच में पिता पर शक का पहलू फिल्म को और रोचक बनाता है। परिवार के सदस्यों और अस्पताल स्टाफ के बीच के संबंधों को दिखाया गया है। सनल की जिंदगी इस घटना से उलट-पुलट हो जाती है।
फिल्म में अस्पताल की सेटिंग का इस्तेमाल सस्पेंस बढ़ाने के लिए किया गया है। बच्ची के गायब होने का तरीका रहस्यमय है जिसमें एक व्यक्ति पर्दे में बच्ची को ले जाता है। जांच टीम कई संभावनाओं पर विचार करती है। भावनात्मक स्तर पर फिल्म दो माताओं के दर्द को दर्शाती है। एक तरफ बच्ची की जैविक मां का संघर्ष है तो दूसरी तरफ अन्य किरदारों की भावनाएं जुड़ी हैं। फिल्म की स्क्रिप्ट में कई लेयर्स हैं जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखते हैं। निर्देशक ने थ्रिलर और ड्रामा का संतुलन बनाने की कोशिश की है। यह फिल्म साउथ इंडियन सिनेमा की थ्रिलर श्रेणी में हाल की रिलीज में शामिल है। ओटीटी पर उपलब्ध होने से व्यापक दर्शकों तक पहुंची है। कहानी में बच्ची की सेफ्टी और सच का पता लगना मुख्य है। कई ट्विस्ट के बाद क्लाइमेक्स में रहस्य खुलता है।
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