प्रोटीन की कमी से जूझ रहा है आपका शरीर ? जानें रोजाना कितना प्रोटीन जरूरी और कमी के 5 प्रमुख लक्षण।

प्रोटीन शरीर के लिए बिल्डिंग ब्लॉक्स की तरह काम करता है जो मांसपेशियों के निर्माण, हार्मोनल बैलेंस, सेल्स की मरम्मत और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने

Jan 13, 2026 - 12:59
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प्रोटीन की कमी से जूझ रहा है आपका शरीर ? जानें रोजाना कितना प्रोटीन जरूरी और कमी के 5 प्रमुख लक्षण।
प्रोटीन की कमी से जूझ रहा है आपका शरीर ? जानें रोजाना कितना प्रोटीन जरूरी और कमी के 5 प्रमुख लक्षण।

प्रोटीन शरीर के लिए बिल्डिंग ब्लॉक्स की तरह काम करता है जो मांसपेशियों के निर्माण, हार्मोनल बैलेंस, सेल्स की मरम्मत और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई लोग प्रोटीन को केवल जिम जाने वालों या एथलीट्स के लिए जरूरी मानते हैं लेकिन यह हर उम्र के व्यक्ति के लिए आवश्यक है। हालांकि जानकारी की कमी के कारण अक्सर लोगों में प्रोटीन की कमी हो जाती है जिससे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो सकती हैं। भारतीय परिप्रेक्ष्य में प्रोटीन की कमी काफी आम है क्योंकि औसत भारतीय आहार मुख्य रूप से अनाज आधारित होता है जिसमें प्रोटीन की मात्रा और गुणवत्ता कम होती है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और राष्ट्रीय पोषण संस्थान की 2020 की सिफारिशों के अनुसार स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रोटीन की अनुशंसित मात्रा 0.83 ग्राम प्रति किलोग्राम बॉडी वेट प्रति दिन है। यह पहले की 1 ग्राम प्रति किलोग्राम से कम है क्योंकि अब डायजेस्टिबल इंडिस्पेंसेबल अमीनो एसिड स्कोर आधारित नई प्रोटीन क्वालिटी इंडेक्स का उपयोग किया गया है। उदाहरण के लिए 60 किलोग्राम वजन वाले व्यक्ति को रोजाना करीब 50 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है जबकि 70 किलोग्राम वाले को लगभग 58 ग्राम। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी स्वस्थ वयस्कों के लिए 0.83 ग्राम प्रति किलोग्राम की सेफ लेवल ऑफ प्रोटीन सिफारिश करता है जो 97.5 प्रतिशत स्वस्थ वयस्कों की जरूरतों को पूरा करता है।

भारत में औसत प्रोटीन सेवन काफी कम है जो प्रति व्यक्ति प्रति दिन लगभग 47-63 ग्राम के बीच रहता है जबकि अनुशंसित स्तर से नीचे है। कई सर्वेक्षणों से पता चलता है कि 73 प्रतिशत भारतीयों में प्रोटीन की कमी है और 90 प्रतिशत से अधिक लोग रोजाना जरूरी मात्रा के बारे में अनजान हैं। अनाज आधारित आहार में 60 प्रतिशत प्रोटीन अनाज से आता है जो कम डायजेस्टिबिलिटी और क्वालिटी वाला होता है। इससे प्रोटीन की कमी का खतरा बढ़ जाता है विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां आहार मुख्य रूप से अनाज पर निर्भर होता है।

प्रोटीन की कमी के प्रमुख लक्षणों में मांसपेशियों की कमजोरी और वेस्टिंग शामिल है। प्रोटीन मांसपेशियों का मुख्य घटक होता है और कमी होने पर शरीर मांसपेशियों से प्रोटीन निकालकर अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए उपयोग करता है। इससे मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और मसल वेस्टिंग या सारकोपेनिया की स्थिति बन सकती है जो खासकर बुजुर्गों में आम है। इससे शारीरिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं और कमजोरी बढ़ जाती है।

दूसरा प्रमुख लक्षण एडीमा या सूजन है जो शरीर के विभिन्न हिस्सों जैसे पैरों, पैरों, पेट और हाथों में हो सकती है। प्रोटीन की कमी से ब्लड में एल्ब्यूमिन जैसे प्रोटीन कम हो जाते हैं जो फ्लूइड बैलेंस बनाए रखते हैं। इससे फ्लूइड टिश्यूज में जमा हो जाता है और सूजन हो जाती है। गंभीर कमी में क्वाशियोरकोर नामक स्थिति बन सकती है जिसमें पेट में सूजन प्रमुख होती है।

तीसरा लक्षण बालों और नाखूनों की समस्या है जिसमें बाल पतले, भंगुर और झड़ने लगते हैं जबकि नाखून कमजोर हो जाते हैं। प्रोटीन केराटिन का मुख्य घटक होता है जो बालों, नाखूनों और त्वचा की संरचना बनाता है। कमी होने पर बालों का विकास रुक जाता है और टेलोजन एफ्लुवियम जैसी स्थिति हो सकती है जिसमें अचानक बाल झड़ते हैं। त्वचा भी सूखी, फ्लेकी और कमजोर हो सकती है। चौथा लक्षण थकान और कमजोरी है। प्रोटीन एनर्जी प्रोडक्शन और मेटाबॉलिज्म में भूमिका निभाता है। कमी होने पर शरीर एनर्जी के लिए मांसपेशियों को ब्रेकडाउन करता है जिससे लगातार थकान, कमजोरी और एनर्जी लेवल कम रहता है। इससे दैनिक कार्यों में कठिनाई होती है और मूड भी प्रभावित हो सकता है क्योंकि न्यूरोट्रांसमीटर प्रोटीन से बने होते हैं।

पांचवां लक्षण कमजोर इम्यून सिस्टम है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। प्रोटीन एंटीबॉडीज और इम्यून सेल्स बनाता है जो शरीर को संक्रमण से बचाते हैं। कमी होने पर इम्यून फंक्शन कमजोर हो जाता है और बार-बार बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। घाव भरने में भी देरी होती है क्योंकि प्रोटीन टिश्यू रिपेयर के लिए जरूरी है। प्रोटीन की कमी को रोकने के लिए विविध स्रोतों से प्रोटीन लेना चाहिए जैसे दालें, अंडे, दूध, पनीर, मछली, चिकन और नट्स। भारतीय आहार में अनाज और दालों को 3:1 अनुपात में मिलाकर प्रोटीन क्वालिटी सुधार सकते हैं। सक्रिय व्यक्ति या बुजुर्गों को अधिक प्रोटीन की जरूरत हो सकती है। नियमित जांच से कमी का पता लगाया जा सकता है और समय पर सुधार किया जा सकता है।

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