होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूद की गंध: अमेरिकी सेना ने ईरानी 'फास्ट बोट्स' को डुबोने का किया दावा।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), एक बार फिर भीषण सैन्य संघर्ष
- ऑपरेशन 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' का आगाज: वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच सीधी भिड़ंत
- मध्य पूर्व में युद्ध की भीषण आहट: मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच अमेरिकी नौसेना ने दिखाई आक्रामक ताकत
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), एक बार फिर भीषण सैन्य संघर्ष का अखाड़ा बन गया है। मई 2026 की शुरुआत के साथ ही खाड़ी क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है, जहाँ अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की छह छोटी सैन्य नौकाओं (Small Attack Boats) को नष्ट कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई तब की गई जब ईरानी नौकाओं ने जलडमरूमध्य से गुजर रहे वाणिज्यिक जहाजों और अमेरिकी सैन्य संपत्तियों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया था। इस सैन्य झड़प ने फरवरी 2026 से जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के संघर्ष को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है। यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा शुरू किए गए 'ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ईरान द्वारा लगाए गए समुद्री गतिरोध को तोड़कर वैश्विक व्यापार मार्ग को फिर से खोलना है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों द्वारा जारी विवरण के अनुसार, यह ऑपरेशन सोमवार सुबह तब शुरू हुआ जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इस क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां तेज कर दीं। संघर्ष के दौरान अमेरिकी सेना ने न केवल ईरानी नौकाओं को निशाना बनाया, बल्कि तेहरान की ओर से दागी गई कई क्रूज मिसाइलों और ड्रोनों को भी हवा में ही मार गिराया। अमेरिकी नौसेना के अपाचे (AH-64 Apache) और सीहॉक (MH-60 Seahawk) हेलीकॉप्टरों ने इस जवाबी कार्रवाई में मुख्य भूमिका निभाई। कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने पुष्टि की है कि ईरानी नौकाओं को तब नष्ट किया गया जब वे अमेरिकी सुरक्षा में चल रहे जहाजों के बेहद करीब पहुँच गई थीं। इस सैन्य कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब होर्मुज में ईरान के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए 'क्लिनिकल डिफेंसिव' रणनीति के बजाय सीधे सैन्य प्रहार की राह पर चल पड़ा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक और आर्थिक महत्ता ही इस पूरे विवाद की जड़ में है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरती है। फरवरी 2026 में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले शुरू किए थे, तब जवाब में ईरान ने इस जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया था। इसके बाद से ही वैश्विक ऊर्जा बाजार में हाहाकार मचा हुआ है और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। वर्तमान संघर्ष इसी ब्लॉकेड को हटाने की अमेरिका की कोशिश का नतीजा है। 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' के तहत अमेरिका ने अब करीब 15,000 सैनिकों, विनाशकारी युद्धपोतों और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम को इस क्षेत्र में तैनात कर दिया है, ताकि जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित बनाया जा सके। 4 मई 2026 को शुरू हुए इस अभियान के दौरान ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के तेल बंदरगाहों और अन्य बुनियादी ढांचों पर भी मिसाइल हमले किए हैं। फुजैराह बंदरगाह पर लगी आग और दक्षिण कोरियाई मालवाहक जहाज पर हुए रहस्यमयी विस्फोट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान इस युद्ध को पूरे क्षेत्र में फैलाने की तैयारी में है। अमेरिका ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके या उसके सहयोगियों के जहाजों के साथ कोई भी हस्तक्षेप किया गया, तो उसका जवाब अत्यंत बलपूर्वक दिया जाएगा।
संघर्ष के बीच दावों और प्रति-दावों का दौर भी तेज हो गया है। जहाँ एक ओर अमेरिका अपने ऑपरेशन को सफल बता रहा है और दो अमेरिकी जहाजों के सुरक्षित गुजरने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सैन्य कमांड का कहना है कि किसी भी विदेशी जहाज ने उनकी अनुमति के बिना सीमा पार नहीं की है और अमेरिकी दावे केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा हैं। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि होर्मुज की सुरक्षा पूरी तरह से उसके नियंत्रण में है और किसी भी 'आक्रामक विदेशी सेना' के प्रवेश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस विरोधाभासी स्थिति ने समुद्र में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के बीच डर व्याप्त है। इस सैन्य टकराव का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है। होर्मुज में तनाव बढ़ने की खबर आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5 प्रतिशत से अधिक उछलकर 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है या जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद रहता है, तो दुनिया भर में ईंधन का संकट गहरा सकता है और महंगाई दर बेकाबू हो सकती है। शिपिंग उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक दोनों देशों के बीच कोई ठोस संघर्ष विराम समझौता नहीं होता, तब तक वाणिज्यिक जहाजों के लिए यह रास्ता सुरक्षित नहीं होगा। वर्तमान में करीब 800 से अधिक मालवाहक जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जो सुरक्षा की गारंटी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
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