पीएम मोदी और पुतिन की फोन पर विस्तृत बातचीत: यूक्रेन युद्ध, द्विपक्षीय संबंध और भारत यात्रा का निमंत्रण।
International: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अगस्त 2025 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण बातचीत की। इस दौरान....
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अगस्त 2025 को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ फोन पर एक विस्तृत और महत्वपूर्ण बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने यूक्रेन-रूस युद्ध, भारत-रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को इस साल के अंत में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आने का निमंत्रण भी दिया। यह बातचीत ऐसे समय में हुई, जब हाल ही में अमेरिका ने भारत के रूसी तेल आयात को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की है। इस फोन कॉल ने भारत-रूस के बीच मजबूत संबंधों को और रेखांकित किया, साथ ही भारत की शांतिपूर्ण कूटनीति की नीति को भी सामने लाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा की। उन्होंने लिखा, “मेरे मित्र राष्ट्रपति पुतिन के साथ आज फोन पर बहुत अच्छी और विस्तृत बातचीत हुई। मैंने उन्हें यूक्रेन के ताजा घटनाक्रम साझा करने के लिए धन्यवाद दिया। हमने अपने द्विपक्षीय एजेंडे की प्रगति की समीक्षा की और भारत-रूस विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मैं राष्ट्रपति पुतिन को इस साल के अंत में भारत में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के लिए आमंत्रित करता हूं।” इस बयान से स्पष्ट है कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच गहरे और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम है।
इस फोन कॉल में यूक्रेन-रूस युद्ध एक प्रमुख मुद्दा रहा। राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन में चल रहे युद्ध की ताजा स्थिति के बारे में जानकारी दी। जवाब में, मोदी ने भारत की उस सुसंगत नीति को दोहराया, जिसमें युद्ध को खत्म करने के लिए शांति और कूटनीति के माध्यम से समाधान की वकालत की गई है। भारत ने शुरू से ही इस युद्ध में तटस्थ रुख अपनाया है और दोनों पक्षों से बातचीत के जरिए शांति स्थापित करने की अपील की है। इस बातचीत में भी मोदी ने इस नीति को दोहराते हुए युद्ध को जल्द खत्म करने और शांति बहाली की जरूरत पर जोर दिया।
यह फोन कॉल ऐसे समय में हुई, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ रहा है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत के रूसी तेल आयात को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी, जिसके बाद भारत से रूस के साथ तेल व्यापार बंद करने की मांग की गई थी। भारत ने इस कदम को “अनुचित, अन्यायपूर्ण और अव्यवहारिक” बताते हुए इसका विरोध किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत का तेल आयात बाजार आधारित है और इसका उद्देश्य 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। कई अन्य देश भी अपने राष्ट्रीय हितों के लिए ऐसा करते हैं।” इस पृष्ठभूमि में, मोदी और पुतिन की बातचीत ने भारत-रूस के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक संदेश दिया।
दोनों नेताओं ने भारत-रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति की भी समीक्षा की। भारत और रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी लंबे समय से एक मजबूत आधार रही है। इस साझेदारी में व्यापार, रक्षा, ऊर्जा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाया है, जिसमें एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद और भारत में इसके रखरखाव सुविधाओं की स्थापना जैसे मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा, दोनों देश ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक-दूसरे का समर्थन करते हैं। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने इन क्षेत्रों में प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और भविष्य में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को इस साल के अंत में भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे पुतिन ने स्वीकार कर लिया। यह यात्रा 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए होगी, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले मोदी ने पिछले साल जुलाई में 22वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन और अक्टूबर में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए रूस का दौरा किया था। पुतिन की आखिरी भारत यात्रा दिसंबर 2021 में हुई थी। इस बार की यात्रा से व्यापार, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।
यह बातचीत 7 अगस्त को रूस में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और रूस के सुरक्षा परिषद सचिव सर्गेई शोइगु के बीच हुई मुलाकात के ठीक एक दिन बाद हुई। इस मुलाकात में भी दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई थी। डोवाल ने पुतिन से भी मुलाकात की थी और भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा की थी। इस मुलाकात में पुतिन की भारत यात्रा की तारीखों पर भी विचार-विमर्श हुआ, हालांकि अभी इसकी अंतिम तारीख तय नहीं हुई है।
इस फोन कॉल का समय भी वैश्विक परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है। हाल ही में, पुतिन ने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको, कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के नेताओं के साथ भी फोन पर बात की थी, जिसमें उन्होंने यूक्रेन युद्ध और अमेरिका के साथ शांति वार्ता की संभावनाओं पर चर्चा की। पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत स्टीव विटकॉफ के साथ भी मुलाकात की थी, जिसमें यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए शांति वार्ता की बात हुई थी। इन सभी घटनाक्रमों के बीच, भारत की भूमिका एक तटस्थ और शांतिप्रिय देश के रूप में उभर रही है, जो सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखते हुए शांति की वकालत करता है।
भारत और रूस के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। सोवियत संघ के समय से ही दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और विज्ञान जैसे क्षेत्रों में गहरा सहयोग किया है। आज भी रूस भारत का एक प्रमुख रक्षा साझेदार है, और दोनों देश कई संयुक्त परियोजनाओं में शामिल हैं। इसके अलावा, भारत रूस से कच्चा तेल आयात करता है, जो उसकी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा पूरा करता है। हाल के वर्षों में, दोनों देशों ने व्यापार को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें रूबल-रुपये में व्यापार और मुक्त व्यापार समझौते जैसे प्रयास शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर इस बातचीत को लेकर लोगों ने मिली-जुली प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने भारत की तटस्थ नीति और शांति की वकालत की सराहना की, तो कुछ ने इसे भारत की रूस के साथ गहरी दोस्ती का प्रतीक बताया। एक यूजर ने एक्स पर लिखा, “मोदी जी की कूटनीति भारत को वैश्विक मंच पर एक जिम्मेदार देश के रूप में पेश करती है।” हालांकि, कुछ लोगों ने भारत के रूसी तेल आयात और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जताई।
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