भाजपा विधायक ने पुलिस से कहा- अब काटो मेरा चालान, बिना हेलमेट बुलेट चलाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक शैली और सक्रियता के लिए पहचाने जाने वाले देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र के
- यातायात नियमों के उल्लंघन पर विधायक ने पेश की अनूठी मिसाल, खुद फेसबुक पोस्ट कर पुलिस से की चालान काटने की अपील
- कार्यकर्ता के आग्रह पर नई मोटरसाइकिल की सवारी करना विधायक को पड़ा भारी, गलती स्वीकार कर कानून के प्रति दिखाई प्रतिबद्धता
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी बेबाक शैली और सक्रियता के लिए पहचाने जाने वाले देवरिया सदर विधानसभा क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी इन दिनों सोशल मीडिया पर एक बेहद दिलचस्प और अनोखे मामले को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो इंटरनेट की दुनिया में बहुत तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें वह एक बुलेट मोटरसाइकिल की सवारी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वायरल वीडियो में यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि सत्ताधारी दल के विधायक होने के बावजूद उन्होंने दोपहिया वाहन चलाते समय सुरक्षा के सबसे महत्वपूर्ण मानक यानी हेलमेट का उपयोग नहीं किया था। वीडियो के बैकग्राउंड में विधायक का निजी सुरक्षा काफिला और उनकी पहचान बन चुकी काली रंग की फॉर्च्यूनर कार भी उनके पीछे-पीछे चलती हुई दिखाई दे रही है, जिसने इस पूरे दृश्य को और अधिक ध्यानाकर्षण योग्य बना दिया।
सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों को लेकर सरकार द्वारा चलाए जा रहे कड़े अभियानों के बीच एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि का इस तरह बिना हेलमेट वाहन चलाना जैसे ही सार्वजनिक हुआ, वैसे ही इस पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। यह वीडियो कथित तौर पर सुबह के समय का बताया जा रहा है जब विधायक अपने क्षेत्र में आम जनता और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करने के लिए निकले थे। आम तौर पर वीआईपी संस्कृति और रसूख के कारण ऐसे मामलों में नेता अक्सर बच निकलते हैं, लेकिन इस घटना में जैसे-जैसे दिन ढलता गया और वीडियो की पहुंच बढ़ती गई, वैसे-वैसे इस मामले ने एक नया और सकारात्मक मोड़ ले लिया। शाम होते-होते खुद विधायक ने इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया और इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसने इस पूरे विवाद की दिशा को ही बदल कर रख दिया।
विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने अपनी इस विधिक और नैतिक चूक को छिपाने या इस पर सफाई देने के बजाय बेहद ईमानदारी से अपनी गलती को स्वीकार करने का साहसिक मार्ग चुना। उन्होंने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने उस पूरी परिस्थिति का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया जिसके तहत उनसे यह यातायात नियम का उल्लंघन हुआ था। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि देवरिया के मेहड़ा पूरवा इलाके में उनके निजी आवास के समीप ही एक स्थानीय व्यवसायी प्रकाश यादव की चाय की दुकान स्थित है, जहां वह अक्सर सुबह के समय क्षेत्र के संभ्रांत नागरिकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और अपने शुभचिंतकों के साथ बैठकर स्थानीय समस्याओं और विकास कार्यों पर चर्चा करते हैं। इसी बैठकी के दौरान यह पूरी घटना घटित हुई थी।
फेसबुक पोस्ट में विधायक का स्पष्टीकरण
"बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी के एक समर्पित कार्यकर्ता और मेरे अनुज प्रमोद मणि ने मुझे अत्यंत उत्साह के साथ जानकारी दी कि उन्होंने एक नई बुलेट मोटरसाइकिल खरीदी है। उन्होंने मुझसे आग्रह किया कि मैं इस नई गाड़ी को चलाकर इसका शुभारंभ करूं। अत्यधिक आत्मीयता और उनके इस विशेष आग्रह को मैं चाहकर भी टाल नहीं सका और बिना हेलमेट के ही उनके साथ गाड़ी पर बैठ गया।"
अपनी सोशल मीडिया पोस्ट को आगे बढ़ाते हुए देवरिया सदर के विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने और कार्यकर्ता प्रमोद मणि ने बिना हेलमेट के उस नई मोटरसाइकिल को चाय की दुकान से लेकर उनके आवास तक चलाया। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के इस बात को स्वीकार किया कि भले ही दूरी बेहद कम थी और यह एक कार्यकर्ता की भावना से जुड़ा हुआ मामला था, लेकिन प्रशासनिक और विधिक दृष्टिकोण से यह पूरी तरह से गलत था। उन्होंने लिखा कि यातायात के नियमों का पालन करना और अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना हर नागरिक का कर्तव्य है और एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उनकी जिम्मेदारी और भी अधिक बढ़ जाती है। इस भूल का अहसास होते ही उन्होंने तत्काल एक ऐसा कदम उठाया जो भारतीय राजनीति में अमूमन देखने को नहीं मिलता है।
शलभ मणि त्रिपाठी ने देवरिया के स्थानीय पुलिस प्रशासन और विशेषकर यातायात पुलिस विभाग को खुद आगे बढ़कर यह कड़े निर्देश दिए कि कानून सबके लिए बराबर है, चाहे वह राज्य का कोई आम नागरिक हो या फिर सत्ताधारी दल का कोई प्रभावी विधायक। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि उनकी इस दृश्यमान त्रुटि के लिए मोटर वाहन अधिनियम के तहत जो भी निर्धारित कानूनी चालान बनता है, उसे तत्काल ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से काट दिया जाए और इसकी रसीद से उन्हें भी अवगत कराया जाए ताकि वह स्वयं अपनी जेब से इस जुर्माने की राशि का भुगतान कर सकें। विधायक के इस कदम ने न केवल प्रशासन को हैरत में डाल दिया बल्कि कानून व्यवस्था के क्रियान्वयन को लेकर एक नजीर भी पेश कर दी है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर और प्रशासनिक हल्कों में विधायक के इस व्यवहार की काफी सराहना की जा रही है। लोगों का मानना है कि अमूमन नेता अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए दबाव की राजनीति का सहारा लेते हैं, लेकिन खुद आगे बढ़कर अपना चालान कटवाने की बात कहना प्रशासनिक तंत्र को बिना किसी डर के काम करने की आजादी देता है। देवरिया पुलिस भी अब इस मामले में आवश्यक विधिक प्रक्रिया को पूरा करने में जुट गई है और जल्द ही इस यातायात उल्लंघन का आधिकारिक शमन शुल्क वसूला जाएगा। यह घटना इस बात का भी प्रमाण है कि डिजिटल युग में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, कैमरे की नजर से दूर नहीं है।
What's Your Reaction?







