नोएडा के महर्षि आश्रम में सौ करोड़ रुपये से अधिक का बड़ा जमीन घोटाला, सरकारी दावों के बीच बस गया पूरा अवैध शहर
जांच एजेंसियों के रडार पर इस समय वे तमाम बैंक खाते और वित्तीय लेनदेन हैं, जिनके जरिए इस सौ करोड़ से अधिक के अवैध साम्राज्य को खड़ा किया गया। जांच अधिकारियों को मजबूत संदेह है कि कागजों पर जो रकम दिखाई गई है, जमीन का वास्तविक जमीनी सौदा उससे
- भूमाफियाओं और रसूखदारों के गठजोड़ ने अवैध रूप से काटी कॉलोनियां, लंबे समय तक आंखें मूंदे सोया रहा स्थानीय प्रशासन
- प्रवर्तन निदेशालय और विशेष जांच दल ने कड़ा किया शिकंजा, वित्तीय हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया हुई तेज
उत्तर प्रदेश के सबसे आधुनिक और नियोजित शहरों में शुमार नोएडा से एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है। यहाँ भंगेल, सलारपुर और गेझा क्षेत्र में स्थित महर्षि आश्रम की हजारों बीघा बेशकीमती जमीन पर भूमाफियाओं और रसूखदारों ने अवैध कब्जा कर एक पूरा समानांतर शहर ही खड़ा कर दिया है। प्राथमिक जांच के अनुसार यह पूरा फर्जीवाड़ा सौ करोड़ रुपये से कहीं अधिक का आंका जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतना बड़ा अवैध निर्माण रातों-रात नहीं हुआ, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार प्रशासनिक नाक के नीचे चलता रहा, लेकिन संबंधित विकास प्राधिकरण इस पूरे मामले से पूरी तरह अनजान बनकर सोता रहा, जिससे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस महाघोटाले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो महर्षि आश्रम ट्रस्ट के पास इस क्षेत्र में लगभग 3500 बीघा जमीन मौजूद थी। पूर्व में आश्रम की धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियों को देखते हुए स्थानीय विकास प्राधिकरण ने इस भूमि का पूरी तरह से अधिग्रहण नहीं किया था, जिसका फायदा बाद में जमीन के धंधे से जुड़े आपराधिक तत्वों ने उठाया। वर्ष 2017 के बाद से इस विशाल भूभाग पर सुनियोजित तरीके से अवैध कॉलोनियां काटने का खेल शुरू हुआ। प्रभावशाली प्रॉपर्टी डीलरों और स्थानीय भूमाफियाओं ने आश्रम प्रबंधन के कुछ लोगों के साथ मिलकर खाली पड़ी जमीनों को चिन्हित किया और उन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर आम जनता को बेचना शुरू कर दिया।
इस अवैध बसावट की रफ्तार इतनी तेज थी कि वर्ष 2019 तक जहाँ केवल कच्चे रास्ते और खेत दिखाई देते थे, वहाँ देखते ही देखते कंक्रीट का एक बड़ा जंगल खड़ा हो गया। भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने न केवल अवैध रूप से प्लॉट बेचे, बल्कि नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर बहुमंजिला इमारतें, दुकानें और व्यावसायिक परिसर तक खड़े कर दिए। इस पूरे खेल में सबसे शातिर तरीका यह अपनाया गया कि मुख्य सरगनाओं ने अपने नाम रिकॉर्ड में आने से बचाने के लिए जमीन की रजिस्ट्री सीधे मूल संचालकों से सीधे अंतिम छोटे खरीदारों के पक्ष में करवा दी। इस वित्तीय चालाकी के कारण वास्तविक लेनदेन के मुख्य सूत्रधार कागजों पर नजर नहीं आए। इस विशाल भूमि घोटाले की गंभीरता को देखते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद पूरे मामले की तफ्तीश के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है, जो उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव की सीधी निगरानी में काम कर रहा है। इसके साथ ही, इस पूरे खेल में हुए भारी वित्तीय हेरफेर, काले धन के उपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंकाओं को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी अपनी जांच की रफ्तार को काफी तेज कर दिया है, जिससे कई सफेदपोशों पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
जांच एजेंसियों के रडार पर इस समय वे तमाम बैंक खाते और वित्तीय लेनदेन हैं, जिनके जरिए इस सौ करोड़ से अधिक के अवैध साम्राज्य को खड़ा किया गया। जांच अधिकारियों को मजबूत संदेह है कि कागजों पर जो रकम दिखाई गई है, जमीन का वास्तविक जमीनी सौदा उससे कई गुना अधिक मूल्य पर नकद में किया गया था। इस काले धन को ठिकाने लगाने के लिए कई शेल कंपनियों और फर्जी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का सहारा लिया गया। जैसे-जैसे जांच के पन्ने खुल रहे हैं, वैसे-वैसे यह बात भी साफ होती जा रही है कि बिना किसी मानचित्र स्वीकृति या लेआउट प्लान के इतनी बड़ी आबादी को बसाने के लिए बिजली, पानी और बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था कैसे कर दी गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। शहर के नियोजित विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले विभाग के अधिकारी इतने बड़े पैमाने पर हो रहे निर्माण कार्य, सड़कों के बनने, नालियों और सीवर लाइनों के बिछने के दौरान पूरी तरह मूकदर्शक बने रहे। हाल ही में जब यह मामला बड़े स्तर पर प्रशासनिक गलियारों और कानूनी मंचों पर गूंजा, तब जाकर नींद से जागे प्राधिकरण ने आनन-फानन में सलारपुर पुलिस चौकी के पीछे की करीब पचास से अधिक सोसायटियों को अवैध घोषित किया। इसके साथ ही लगभग 39 अवैध डेवलपर्स को ध्वस्तीकरण के नोटिस जारी कर खानापूर्ति करने का प्रयास किया गया है।
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