गर्भवती महिला जा रही थी अस्पताल, ट्रैफिक पुलिस ने एक न सुनी और फिर हुआ कुछ ऐसा...

दूसरी तरफ, मौके पर मौजूद यातायात पुलिस के अधिकारियों का अपना एक अलग पक्ष है। सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि संबंधित युवक बिना हेलमेट के और तेज गति से वाहन चला रहा था, जिससे सड़क पर चल रहे अन्य राहगीरों की सुरक्षा को खतरा हो सकता था। कूटनीतिक रूप से जब उसे रुकने का इशारा किया गया, तो उसने स

Jun 20, 2026 - 12:31
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गर्भवती महिला जा रही थी अस्पताल, ट्रैफिक पुलिस ने एक न सुनी और फिर हुआ कुछ ऐसा...
गर्भवती महिला जा रही थी अस्पताल, ट्रैफिक पुलिस ने एक न सुनी और फिर हुआ कुछ ऐसा...
  • स्वास्थ्य आपातकाल के बीच संवेदनहीनता की पराकाष्ठा- गर्भवती महिला को चिकित्सक के पास ले जा रहे युवक को बीच राह रोका, प्रशासनिक अमले के रुख पर उठे गंभीर सवाल
  • कानून व्यवस्था बनाम मानवीय संवेदना: चेकिंग अभियान के नाम पर दुर्व्यवहार के आरोपों से घिरा समस्तीपुर पुलिस तंत्र, वरिष्ठ अधिकारियों ने दिए निष्पक्ष जांच के आदेश

बिहार राज्य के समस्तीपुर जिले से कानून प्रवर्तन अधिकारियों की संवेदनहीनता और कथित बदसलूकी का एक बेहद विचलित करने वाला मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय चौक-चौराहों पर चलाए जा रहे नियमित वाहन जांच अभियान के दौरान एक आम नागरिक और ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी बहस हो गई। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। दृश्य-श्रव्य साक्ष्यों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह एक लाचार युवक पुलिसिया रवैये से तंग आकर रोते-बिलखते हुए अपनी आपबीती बयां कर रहा है। घटना के बाद से ही स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा बलों की इस कथित बर्बरता को लेकर गहरा असंतोष और आक्रोश पनप रहा है।

पीड़ित युवक द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब वह अपने परिवार की एक गर्भवती महिला सदस्य, जो कि रिश्ते में उसकी भाभी लगती हैं, को अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण आपातकालीन स्थिति में चिकित्सक के पास ले जा रहा था। अस्पताल पहुंचने की जल्दी में जब वह समस्तीपुर के एक प्रमुख मार्ग से गुजर रहा था, तभी वहां तैनात यातायात जांच दल ने उसे रोक लिया। युवक ने पुलिस कर्मियों को महिला की नाजुक स्थिति का हवाला देते हुए तुरंत जाने देने की गुहार लगाई। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उसकी एक न सुनी और नियमानुसार दस्तावेजों की जांच और चालान काटने की प्रक्रिया पर अड़ गए। इस जिद के कारण स्वास्थ्य आपातकाल से जूझ रही महिला को काफी समय तक बीच सड़क पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। चिकित्सा जांच के लिए जा रही महिला अत्यंत दर्द से तड़प रही थी, लेकिन कूटनीतिक रूप से नियमों का हवाला देकर वाहन को रोके रखने से उसकी स्थिति और अधिक बिगड़ गई, जो किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं है।

डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध वीडियो में युवक चिल्लाते हुए पुलिसकर्मियों की संवेदनहीनता को कैमरे के सामने ला रहा है। उसका दावा है कि पुलिस विभाग के कर्मचारियों ने न केवल उसकी गाड़ी की चाबी जबरन निकाल ली, बल्कि उसके साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज भी की। युवक का कहना है कि एक तरफ सरकार जननी सुरक्षा और मातृ स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर तैनात सरकारी मुलाजिम एक गर्भवती महिला की जान को जोखिम में डालने से भी बाज नहीं आते। इस दौरान सड़क पर तमाशबीनों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे यातायात भी पूरी तरह बाधित हो गया। इस मामले के टूल पकड़ने और वीडियो के उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मच गया है। समस्तीपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने इस पूरे वाकये का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की आंतरिक विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। जिला पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि किसी भी नागरिक के साथ दुर्व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच की कमान एक वरिष्ठ पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है, जिन्हें घटना स्थल पर मौजूद सभी प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो की सत्यता की जांच कर तीन दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

यह पहली बार नहीं है जब राज्य के भीतर यातायात जांच के नाम पर आम जनता को इस तरह की प्रताड़ना का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी कई जिलों से पुलिसिया हनक और संवेदनहीनता के मामले सामने आते रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस बल को मानवीय संवेदनाओं और संकट की स्थिति में विवेकपूर्ण निर्णय लेने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिए जाने की आवश्यकता को बल दिया है। नागरिकों का मानना है कि नियम कायदे जनता की सुरक्षा के लिए होते हैं, न कि किसी की जान को आफत में डालने के लिए। विशेष परिस्थितियों में एम्बुलेंस या बीमार व्यक्तियों को ले जा रहे वाहनों को प्राथमिकता देना प्राथमिक कूटनीतिक प्रोटोकॉल का हिस्सा होना चाहिए। दूसरी तरफ, मौके पर मौजूद यातायात पुलिस के अधिकारियों का अपना एक अलग पक्ष है। सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि संबंधित युवक बिना हेलमेट के और तेज गति से वाहन चला रहा था, जिससे सड़क पर चल रहे अन्य राहगीरों की सुरक्षा को खतरा हो सकता था। कूटनीतिक रूप से जब उसे रुकने का इशारा किया गया, तो उसने सहयोग करने के बजाय पुलिसकर्मियों के साथ उलझना शुरू कर दिया और सरकारी कार्य में बाधा डालने का प्रयास किया। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि वाहन चालक के पास गाड़ी के वैध बीमा और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कागजात भी मौके पर उपलब्ध नहीं थे, जिसके कारण वैधानिक जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जा रही थी।

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