G-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का कड़ा संदेश, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में उठाई भारतीय नाविकों की सुरक्षा की मांग

फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित G-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के दौरान वैश्विक मंच

Jun 17, 2026 - 16:40
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G-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का कड़ा संदेश, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में उठाई भारतीय नाविकों की सुरक्षा की मांग
G-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी का कड़ा संदेश, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में उठाई भारतीय नाविकों की सुरक्षा की मांग
  • पश्चिम एशिया के संघर्ष और समुद्री व्यापारिक संकट पर भारत का बड़ा रुख, होर्मुज जलडमरूमध्य में जान गंवाने वाले नागरिकों को लेकर जताई गहरी चिंता
  • वैश्विक मंच पर गूंजी भारत की आवाज, 'न्यू पार्टनरशिप' सत्र में पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को पूरी तरह सुरक्षित रखने का किया आह्वान

फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित G-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र के दौरान वैश्विक मंच पर एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय बैठक को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में चल रहे गहरे सैन्य और कूटनीतिक संकट पर भारत का आधिकारिक रुख बेहद मजबूती के साथ दुनिया के सामने रखा। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर उपस्थित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य वैश्विक नेताओं के सामने हाल ही में खाड़ी क्षेत्र में हुए हमलों का सीधा जिक्र किया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से भारत और उसके मित्र देशों को होने वाले मानवीय और आर्थिक नुकसान को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनयिक हलकों में एक नई बहस शुरू हो गई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की दिशा में हो रहे हालिया प्रयासों की सराहना तो की, लेकिन साथ ही इसके स्याह पहलुओं को भी सबके सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस लंबे समय से जारी संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया के जो देश भारत के पारंपरिक मित्र रहे हैं, उन्हें जान और माल दोनों का ही बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इस संघर्ष की आंच केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसने संपूर्ण वैश्विक व्यवस्था को प्रभावित किया है। भारत इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता का हमेशा से पक्षधर रहा है और वर्तमान में चल रही कूटनीतिक वार्ताओं का स्वागत करता है, परंतु इसके साथ ही उन बेगुनाह लोगों की सुरक्षा को लेकर भी प्रतिबद्ध है जो इस बड़े भू-राजनीतिक खेल का शिकार बन रहे हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक कच्चे तेल के व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। इस संकरे जलमार्ग में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि या प्रतिबंधों के चलते होने वाला गतिरोध पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए एक बहुत बड़ा खतरा पैदा कर देता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान संवेदनशील स्थिति की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में समुद्री व्यापार प्रभावित होने से न केवल व्यापारिक जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है, बल्कि इसके चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी भारी मंदी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। आपूर्ति श्रृंखला में आने वाले इस तरह के व्यवधानों की सबसे बड़ी मार विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ती है, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए पूरी तरह से इस समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। व्यापारिक मार्गों में असुरक्षा का यह माहौल अंतरराष्ट्रीय व्यापार के मूल सिद्धांतों को कमजोर करने का काम कर रहा है।

भाषण के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्से में प्रधानमंत्री मोदी ने उन भारतीय नाविकों और नागरिकों का जिक्र किया, जिन्होंने पिछले दिनों इस संघर्ष के दौरान अपनी जान गंवाई है। गौरतलब है कि ओमान के तट के पास अमेरिकी रक्षा बलों द्वारा की गई एक सैन्य कार्रवाई में एक वाणिज्यिक जहाज पर सवार तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद से भारत के भीतर इस घटना को लेकर काफी गहरा रोष देखा जा रहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति की उपस्थिति में इस मुद्दे को उठाना भारत की एक बेहद साहसिक और स्पष्ट विदेश नीति का परिचायक है। प्रधानमंत्री ने बेहद भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि इस पूरे गतिरोध के दौरान भारत के कई नागरिकों को असमय अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है, जो कि किसी भी सभ्य समाज और अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत पूरी तरह से चिंता का विषय है।

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक मंच से यह बात पूरी तरह साफ कर दी कि समुद्री व्यापार के माध्यम से पूरी दुनिया को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना किसी एक देश की नहीं, बल्कि संपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक जिम्मेदारी है। ये नाविक वैश्विक आपूर्ति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करते हैं, जो अत्यंत विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी दुनिया के कोने-कोने तक आवश्यक वस्तुएं पहुंचाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को दांव पर लगाकर किए जाने वाले किसी भी सैन्य या राजनीतिक फैसले को उचित नहीं ठहराया जा सकता। भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा और वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी भलाई के लिए आवाज उठाता रहेगा।

सत्र के अंत में प्रधानमंत्री ने G-7 के सदस्य देशों और अन्य आमंत्रित वैश्विक शक्तियों से एक साझा सुरक्षा तंत्र विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमें सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना होगा कि दुनिया के सभी प्रमुख समुद्री मार्ग पूरी तरह से सुरक्षित रहें और किसी भी देश के नाविक बिना किसी भय या असुरक्षा की भावना के अपना वैधानिक कार्य कर सकें। मुक्त और सुरक्षित नौवहन अंतरराष्ट्रीय कानून का एक बुनियादी हिस्सा है, जिसका सम्मान हर एक महाशक्ति को करना चाहिए। इस दिशा में एक मजबूत वैश्विक साझेदारी की आवश्यकता है जो यह गारंटी दे सके कि भविष्य में किसी भी वाणिज्यिक जहाज या उसके चालक दल को भू-राजनीतिक लड़ाइयों का मोहरा नहीं बनाया जाएगा।

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