देश के 19 राज्यों में मौसम विभाग का आंधी-तूफान और भारी बारिश का बड़ा अलर्ट, धूल भरी आंधियों से बदलेगा मौसम का मिजाज
भारतीय उपमहाद्वीप में मौसम के मिजाज में लगातार बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं, जिसने कृषि से लेकर आम जनजीवन
- दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ के असर से तापमान में गिरावट, भीषण गर्मी और लू से मिली बड़ी राहत
- धीमी पड़ी दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार लेकिन प्री-मानसून गतिविधियों ने पकड़ी गति, रेतीले बवंडर को लेकर प्रशासन मुस्तैद
भारतीय उपमहाद्वीप में मौसम के मिजाज में लगातार बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं, जिसने कृषि से लेकर आम जनजीवन तक को व्यापक रूप से प्रभावित किया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने देश के लगभग 19 राज्यों के लिए आंधी-तूफान, आकाशीय बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का एक नया अलर्ट जारी किया है। वर्तमान समय में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर पड़ी है और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मानसून के बादलों की सघनता देश के कुछ हिस्सों के ऊपर से अस्थाई रूप से कम हुई है, परंतु इसके बावजूद प्री-मानसून और चक्रवाती परिसंचरण की प्रणालियों ने देश के कई कोनों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। देश के 9 प्रमुख राज्यों में इस समय प्री-मानसून की झमाझम बारिश दर्ज की जा रही है, जिससे जून के महीने में होने वाली पारंपरिक तपिश से लोगों को काफी राहत मिली है। मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि आगामी 21 जून तक उत्तर भारत, पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत के विभिन्न अंचलों में मौसम का रुख इसी प्रकार आक्रामक और परिवर्तनशील बना रहेगा।
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने इस अप्रत्याशित बदलाव के पीछे मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय हुए एक नए और मध्यम तीव्रता वाले पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) को जिम्मेदार ठहराया है। इस विक्षोभ के कारण अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली ठंडी और नम हवाएं मैदानी इलाकों की बेहद गर्म हवाओं से टकरा रही हैं, जिसके चलते एक तीव्र मौसमी असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसी वायुमंडलीय दबाव और घर्षण की वजह से उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों, विशेष रूप से राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूल भरी तेज आंधियों और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। इस चक्रवाती तंत्र के सक्रिय होने से मैदानी राज्यों में जहां दिन के अधिकतम तापमान में चार से छह डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर अचानक आने वाले तूफानों के कारण जान-माल की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासनिक चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने विशेष रूप से पश्चिमी और पूर्वी राजस्थान के रेगिस्तानी और अर्ध-शुष्क इलाकों में अत्यधिक तीव्र गति से चलने वाले रेतीले बवंडर (Dust Storm) की चेतावनी जारी की है। इस दौरान हवाओं की रफ्तार 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे दृश्यता का स्तर शून्य के करीब होने की आशंका है। आम जनता को सलाह दी गई है कि वे ऐसे मौसम में यात्रा करने से पूरी तरह बचें और कच्चे ढांचों, पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण बिल्कुल न लें।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उसके आस-पास के सटे इलाकों यानी दिल्ली-एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद) में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह से बदल चुका है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान दिल्ली के प्राथमिक मौसम केंद्र सफदरजंग और पालम में धूल भरी तेज आंधियों के बाद गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम स्तर की बारिश दर्ज की गई है, जिसने पिछले कई हफ्तों से जारी भीषण लू (Heat Wave) के प्रकोप को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। आज भी दिल्ली-एनसीआर के आसमान में आंशिक रूप से लेकर घने बादल छाए रहने और दोपहर या शाम के समय 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज झोंके वाली हवाओं के साथ बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इस मौसमी बदलाव के कारण दिल्ली का अधिकतम तापमान जून के सामान्य औसत से काफी नीचे गिरकर 34 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच सिमट गया है, जबकि न्यूनतम तापमान भी 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने से रात के समय की उमस से भी नागरिकों को भारी राहत मिली है।
उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के क्षेत्रों में भी इस चक्रवाती परिसंचरण का व्यापक और गहरा असर देखने को मिल रहा है, जिसके चलते वहां मानसून और प्री-मानसून दोनों ही गतिविधियां एक साथ सक्रिय नजर आ रही हैं। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों जैसे मेरठ, आगरा और अलीगढ़ में जहां धूल भरी आंधियों और शुष्क हवाओं का दौर देखा जा रहा है, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के पटना, गया, समस्तीपुर, पूर्णिया और भागलपुर जैसे जिलों में भारी बारिश और भीषण वज्रपात (Lightning) को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रवेश के साथ ही वायुमंडल में नमी का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे गरज-चमक वाले बादलों का निर्माण तेजी से हो रहा है। प्रशासन ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों और मजदूरों को विशेष हिदायत दी है कि वे खेतों में काम करते समय बिजली कड़कने की स्थिति में तुरंत किसी पक्के मकान या सुरक्षित स्थान पर चले जाएं, क्योंकि इस मौसमी तंत्र में आकाशीय बिजली गिरने का खतरा सामान्य से कई गुना अधिक बढ़ जाता है।
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में मौसमी परिस्थितियां बिल्कुल अलग और अत्यधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मानसून पूरी तरह से अपने चरम पर है और इन पहाड़ी राज्यों में लगातार मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में 'भारी से बहुत भारी बारिश' (Heavy to Very Heavy Rainfall) की आशंका व्यक्त करते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। लगातार होने वाली इस मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि हो गई है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न होने का खतरा मंडराने लगा है। इसके अतिरिक्त, ऊंचाई वाले पहाड़ी रास्तों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन (Landslides) और बादल फटने जैसी आकस्मिक घटनाओं की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्राओं से बचने की कड़ा निर्देश दिया है।
मध्य और दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में भी बादलों की आवाजाही और छिटपुट से लेकर व्यापक स्तर पर बारिश होने का सिलसिला लगातार बना हुआ है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, विदर्भ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में आगामी दो से तीन दिनों के भीतर मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल बनी हुई हैं, जिससे इन क्षेत्रों में भी कृषि कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल, तटीय कर्नाटक और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में स्थानीय स्तर पर विकसित होने वाले बादलों के कारण गरज-चमक के साथ हल्की बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर में अल नीनो (El Nino) की कुछ बची हुई स्थितियों के प्रभाव स्वरूप मानसून की मुख्य धारा की गति अभी थोड़ी धीमी है, परंतु देश भर में फैले इस प्री-मानसून और चक्रवाती तंत्र ने फिलहाल देश के बड़े हिस्से को झुलसाने वाली सूखी गर्मी और गर्म हवाओं के थपेड़ों से पूरी तरह से सुरक्षित घेरे में ले लिया है।
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