उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप का भयंकर प्रकोप, राज्य के 29 जिलों में प्रशासन ने जारी किया हीटवेव का येलो और ऑरेंज अलर्ट

गर्मी की इस भयंकर मार का सीधा और प्रतिकूल असर राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और आम नागरिकों की शारीरिक कार्यक्षमता पर पड़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों के आपातकालीन वार्डों में हीट स्ट्रोक (लू लगना), डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी), तेज बुखार, उल्टी-दस्त

Jun 18, 2026 - 22:53
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उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप का भयंकर प्रकोप, राज्य के 29 जिलों में प्रशासन ने जारी किया हीटवेव का येलो और ऑरेंज अलर्ट
उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप का भयंकर प्रकोप, राज्य के 29 जिलों में प्रशासन ने जारी किया हीटवेव का येलो और ऑरेंज अलर्ट

  • प्रयागराज देश और सूबे में सबसे गर्म शहर के रूप में दर्ज, तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
  • पछुआ हवाओं और तीखी सौर विकिरण के कारण मैदानी इलाकों में लू के थपेड़ों का सितम जारी, लोगों को घरों में ही सुरक्षित रहने की सलाह

उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और सूरज की तीखी किरणों ने आम जनजीवन को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। सूबे के मैदानी और पठारी इलाकों में सुबह की शुरुआत होते ही तेज धूप का ऐसा सितम शुरू हो जाता है कि दोपहर आते-आते सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। इस बार जून के महीने में मौसम के मिजाज में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर बना हुआ है। उत्तर प्रदेश सरकार के राहत आयुक्त कार्यालय और प्रांतीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मौसम के इस जानलेवा रूप को देखते हुए पूरे राज्य में प्रशासनिक मशीनरी को सतर्क रहने के आदेश दिए हैं। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के इस दौर ने न केवल इंसानों बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी पानी और छांव का एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है, जिससे निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।

मौसम विज्ञानियों द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों और पूर्वानुमानों के आधार पर राज्य के कुल 29 प्रमुख जिलों में भीषण लू यानी हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों की सूची में प्रयागराज, वाराणसी, बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, फतेहपुर, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, सुल्तानपुर, हमीरपुर और झांसी जैसे संवेदनशील क्षेत्र प्रमुखता से शामिल हैं। इन इलाकों में दिन के समय चलने वाली गर्म पछुआ हवाएं, जिन्हें स्थानीय भाषा में 'लू' कहा जाता है, इतनी तीव्र हैं कि वे सीधे तौर पर त्वचा को झुलसा रही हैं। इन सभी 29 जिलों में जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था दुरुस्त रखें और मुख्य बाजारों तथा चौराहों पर लोगों को धूप से बचने के लिए छांव का इंतजाम सुनिश्चित कराएं।

हीटवेव घोषित होने के कड़े वैज्ञानिक राय

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के तय मानकों के अनुसार, मैदानी इलाकों में जब किसी मैदानी मौसम केंद्र का अधिकतम तापमान कम से कम 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तक पहुंच जाता है, और यह तापमान उस क्षेत्र के सामान्य औसत तापमान से 4.5 डिग्री सेल्सियस से लेकर 6.4 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा दर्ज किया जाता है, तो उस स्थिति को आधिकारिक रूप से 'हीटवेव' यानी लू का चलना घोषित कर दिया जाता है। यदि यह अंतर 6.4 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर निकल जाता है, तो उसे 'सीवियर हीटवेव' (गंभीर लू) की श्रेणी में रखा जाता है।

इस भीषण गर्मी के दौर में संगम नगरी प्रयागराज पूरे देश और उत्तर प्रदेश में सबसे गर्म स्थान के रूप में रिकॉर्ड किया गया है, जहां लगातार दूसरे दिन भी अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर गया। प्रयागराज में इस अत्यधिक तापमान के साथ-साथ हवा में उमस यानी आर्द्रता का स्तर भी 46 प्रतिशत से लेकर 89 प्रतिशत के बीच उतार-चढ़ाव भरा बना हुआ है, जिसके कारण थर्मल इंडेक्स (गर्मी का वास्तविक अहसास) 50 डिग्री सेल्सियस के आसपास महसूस हो रहा है। जिले में कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई, परंतु इस नाममात्र की बारिश ने हवा में वाष्पीकरण को बढ़ाकर उमस को और अधिक जानलेवा बना दिया है, जिससे लोग पसीने और चिपचिपी गर्मी से बेहाल हैं।

गर्मी की इस भयंकर मार का सीधा और प्रतिकूल असर राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और आम नागरिकों की शारीरिक कार्यक्षमता पर पड़ रहा है। सरकारी और निजी अस्पतालों के आपातकालीन वार्डों में हीट स्ट्रोक (लू लगना), डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी), तेज बुखार, उल्टी-दस्त और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में 40 प्रतिशत तक का भारी उछाल देखा गया है। चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशालय ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को आदेश जारी किए हैं कि अस्पतालों में 'हीटवेव वार्ड' आरक्षित किए जाएं, जहां चौबीसों घंटे बिजली की आपूर्ति, ओआरएस के पैकेट, जीवन रक्षक दवाएं और आईवी फ्लूइड्स का पर्याप्त स्टॉक हर समय उपलब्ध रहे, ताकि किसी भी गंभीर मरीज को तुरंत राहत दी जा सके।

मौसम की इस उग्र स्थिति के पीछे मुख्य कारण वायुमंडल में किसी सक्रिय और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) का न होना और अरब सागर व बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी युक्त हवाओं का मैदानी इलाकों में आकर स्थिर हो जाना है। इसके साथ ही, आसमान पूरी तरह से साफ होने के कारण सौर विकिरण सीधे तौर पर धरती की सतह को गर्म कर रही है, और कंक्रीट के जंगलों में तब्दील हो चुके आधुनिक शहर इस गर्मी को सोखकर रात के समय भी तापमान को नीचे गिरने नहीं दे रहे हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों जैसे आगरा, अलीगढ़ और मथुरा में धूल भरी आंधियों और गरज-चमक की संभावनाएं तो बन रही हैं, लेकिन वे इस दीर्घकालिक और तीव्र गर्मी से कोई स्थायी राहत देने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रही हैं।

विद्युत बुनियादी ढांचे पर भी इस भीषण गर्मी ने भारी दबाव बना दिया है, क्योंकि घरों और दफ्तरों में एयर कंडीशनर और कूलरों का इस्तेमाल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिससे बिजली की मांग अपनी चरम सीमा पर है। कई जिलों में ट्रांसफार्मर ओवरहीटिंग के कारण जल रहे हैं, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर घंटों तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जो इस गर्मी में लोगों की परेशानी को दोगुना कर रहा है। कृषि क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, यदि यह भीषण गर्मी और लू का दौर कुछ और दिनों तक इसी तरह जारी रहा, तो इससे खेतों में खड़ी गन्ने और अगेती धान की फसलों की सिंचाई की लागत बहुत बढ़ जाएगी और भूजल स्तर में भी भारी गिरावट आने की पूरी आशंका है।

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