G-7 शिखर सम्मेलन में खुद को 'बॉस' बताने वाले वायरल वीडियो पर अमेरिकी राष्ट्रपति की सफाई, कूटनीतिक हलकों में मची हलचल के बीच बयान को बताया महज एक मजाक
शिखर सम्मेलन की इस विशिष्ट घटना के समय वहां उपस्थित अन्य देशों के प्रतिनिधियों के चेहरे के हाव-भाव से भी यह साफ झलक रहा था कि वे इस तरह के अप्रत्याशित आचरण के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थे। कूटनीतिक मंचों पर आमतौर पर बेहद नपे-तुले शब्दों और गंभीर व्यवहार की अपेक्षा की जाती है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के प्र

- फ्रांस के एवियान में वैश्विक मंच पर हुई घटना पर डोनल्ड ट्रंप ने तोड़ी चुप्पी, महाशक्तियों के राष्ट्रध्यक्षों के सामने दिए अपने बयान पर दी बड़ी प्रतिक्रिया
- अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और चुटीला अंदाज: अमेरिकी राष्ट्रपति के अनौपचारिक आचरण ने वैश्विक मीडिया का ध्यान खींचा, आलोचनाओं के बाद घरेलू स्तर पर दी सफाई
संयुक्त राज्य अमेरिका के शीर्ष कार्यकारी अधिकारी डोनल्ड ट्रंप वैश्विक राजनीतिक पटल पर हमेशा से अपनी विशिष्ट और अपरंपरागत कार्यशैली के लिए जाने जाते रहे हैं। हाल ही में फ्रांस के एवियान शहर में आयोजित हुए प्रतिष्ठित सात महाशक्तियों के शिखर सम्मेलन के दौरान उनका एक विशेष व्यवहार और उससे जुड़ा दृश्य-श्रव्य साक्ष्य दुनिया भर के डिजिटल मंचों पर बड़ी तेजी से प्रसारित हुआ। इस वीडियो में वे वैश्विक समुदाय के सबसे प्रभावशाली और शक्तिशाली लोकतंत्रों के शासनाध्यक्षों के बीच खड़े होकर एक बेहद अनौपचारिक और आक्रामक मुद्रा में खुद को सर्वोच्च नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते दिखाई दे रहे थे। उनके इस दृष्टिकोण ने तुरंत ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया, जिससे कई मित्र देशों के कूटनीतिक गलियारों में असहजता की स्थिति पैदा हो गई थी।
इस व्यापक विवाद और दुनिया भर के समाचार माध्यमों में अपनी तीखी आलोचना होने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने वाशिंगटन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान इस विषय पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पूरे मामले पर अपनी कूटनीतिक चुप्पी को तोड़ते हुए स्पष्ट किया कि उस दृश्य में उनके द्वारा कही गई बातों को वैश्विक मीडिया और कूटनीतिज्ञों ने बहुत अधिक गंभीरता से ले लिया। उनका दावा है कि वह केवल एक अनौपचारिक और दोस्ताना माहौल में अन्य वैश्विक नेताओं के साथ परिहास कर रहे थे और उनका इरादा किसी भी देश की संप्रभुता या उनके समकक्षों के सम्मान को ठेस पहुँचाने का बिल्कुल नहीं था। इस कृत्य के पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा या कूटनीतिक वर्चस्व स्थापित करने की मंशा काम नहीं कर रही थी। G-7 देशों के नेताओं के सामूहिक चित्र सत्र के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने मुस्कुराते हुए अन्य राष्ट्रपतियों और प्रधानमंत्रियों की ओर इशारा करके खुद को मुख्य संचालक की संज्ञा दी थी, जिसे कूटनीतिक शिष्टाचार के विपरीत माना गया था।
शिखर सम्मेलन की इस विशिष्ट घटना के समय वहां उपस्थित अन्य देशों के प्रतिनिधियों के चेहरे के हाव-भाव से भी यह साफ झलक रहा था कि वे इस तरह के अप्रत्याशित आचरण के लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थे। कूटनीतिक मंचों पर आमतौर पर बेहद नपे-तुले शब्दों और गंभीर व्यवहार की अपेक्षा की जाती है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन के प्रमुख ने हमेशा की तरह इस बार भी अपनी लीक से हटकर काम करने की आदत का प्रदर्शन किया। उनके इस मजाकिया बयान के तुरंत बाद सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर कूटनीतिक मर्यादाओं को लेकर व्यापक स्तर पर चर्चा शुरू हो गई, जिसके बाद अमेरिकी विदेश विभाग को भी इस संदर्भ में अपने सहयोगी देशों को अनौपचारिक स्पष्टीकरण भेजने पर विवश होना पड़ा।
घरेलू स्तर पर भी विपक्षी राजनीतिक दलों ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस रवैये को देश की छवि को प्रभावित करने वाला बताया था। आलोचकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका के सहयोगियों के बीच यह संदेश जाता है कि वाशिंगटन अन्य लोकतांत्रिक देशों को अपने बराबर का भागीदार मानने के बजाय खुद को एक अधिनायकवादी की तरह प्रस्तुत करना चाहता है। इस राजनीतिक दबाव को देखते हुए ही राष्ट्रपति को सार्वजनिक मंच से यह कहना पड़ा कि वैश्विक नेताओं के साथ उनके संबंध बेहद घनिष्ठ हैं और वे आपस में इस तरह के हल्के-फुल्के मजाक अक्सर करते रहते हैं, जिन्हें वैश्विक मंच पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए G-7 संगठन के मूल ढांचे और उसके उद्देश्यों पर भी ध्यान देना आवश्यक है। यह समूह दुनिया की सात सबसे बड़ी उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक मंच है, जहाँ वैश्विक आर्थिक स्थिरता, सुरक्षा चुनौतियों और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों पर सामूहिक रूप से नीतियां बनाई जाती हैं। इस मंच पर सभी सदस्य देशों को समान संप्रभुता और अधिकार प्राप्त हैं, भले ही उनकी सैन्य या आर्थिक क्षमता कितनी भी भिन्न क्यों न हो। ऐसी स्थिति में किसी एक देश के प्रमुख द्वारा खुद को सबसे बड़ा बताना, कूटनीतिक रूप से अन्य देशों के स्वाभिमान को चुनौती देने जैसा प्रतीत होता है, यही कारण है कि इस वीडियो ने इतनी बड़ी सुर्खियां बटोरीं।
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