पीएम किसान योजना: ई-केवाईसी और बैंक खाता आधार सीडिंग न होने पर रुक सकती है 23वीं किस्त, तुरंत पूरा करें यह जरूरी काम

भारत सरकार द्वारा देश के आर्थिक रूप से कमजोर और सीमांत किसानों को वित्तीय संबल प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई

Jun 16, 2026 - 11:48
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पीएम किसान योजना: ई-केवाईसी और बैंक खाता आधार सीडिंग न होने पर रुक सकती है 23वीं किस्त, तुरंत पूरा करें यह जरूरी काम
पीएम किसान योजना: ई-केवाईसी और बैंक खाता आधार सीडिंग न होने पर रुक सकती है 23वीं किस्त, तुरंत पूरा करें यह जरूरी काम
  • पीएम किसान सम्मान निधि की अगली किस्त का इंतजार कर रहे लाभार्थियों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी, इन गलतियों के कारण सूची से कट सकता है नाम
  • किसानों के खाते में ₹2,000 ट्रांसफर होने से पहले सरकार ने नियमों में किया बड़ा बदलाव, जानिए कैसे सुरक्षित करें अपनी आने वाली किस्त

भारत सरकार द्वारा देश के आर्थिक रूप से कमजोर और सीमांत किसानों को वित्तीय संबल प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जा रही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अगली किस्त को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत पंजीकृत करोड़ों किसानों को साल भर में तीन किस्तों के माध्यम से कुल छह हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। अब देश के तमाम लाभार्थी किसान अपनी अगली यानी 23वीं किस्त के दो हजार रुपये का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, इस बीच प्रशासनिक स्तर से यह स्पष्ट संकेत दे दिए गए हैं कि जिन भी किसानों के अनिवार्य दस्तावेज और तकनीकी प्रक्रियाएं अधूरी हैं, उन्हें इस बार किस्त का लाभ नहीं मिल सकेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि योजना में पारदर्शिता लाने और केवल पात्र व्यक्तियों तक ही इस सरकारी सहायता को पहुंचाने के लिए नियमों को बेहद सख्त कर दिया गया है। ऐसे में यदि किसी लाभार्थी ने समय रहते अपनी कागजी कार्रवाई दुरुस्त नहीं की, तो उनके खाते में आने वाली राशि को बीच में ही रोका जा सकता है।

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य खेती-किसानी से जुड़े रोजमर्रा के खर्चों जैसे बीज, खाद और कीटनाशक की खरीद में अन्नदाताओं की मदद करना है। लेकिन पिछले कुछ समय में देश के विभिन्न राज्यों से ऐसी शिकायतें सामने आई थीं जहां अपात्र लोग भी गलत तरीकों से इस योजना का अनुचित लाभ उठा रहे थे। इसी फर्जीवाड़े और विसंगतियों को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए प्रशासन ने एक बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। इसके तहत प्रत्येक पंजीकृत किसान के लिए अपने खाते का सत्यापन कराना पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया गया है। जिन लोगों ने शुरुआत में पंजीकरण कराते समय अपने दस्तावेजों को पूरी तरह से लिंक नहीं कराया था या जिनके बैंक विवरण में किसी भी प्रकार की त्रुटि है, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य व्यवस्था को दुरुस्त करना है ताकि वास्तविक और जरूरतमंद किसानों के हक पर कोई दूसरा व्यक्ति डाका न डाल सके। इसलिए, इस बार किस्त जारी होने से पहले डेटाबेस को पूरी तरह से खंगाला और साफ-सुथरा बनाया जा रहा है।

अगली किस्त को बिना किसी रुकावट के अपने बैंक खाते में प्राप्त करने के लिए सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम ई-केवाईसी की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करना है। सरकार ने काफी समय पहले ही इस प्रक्रिया को अनिवार्य घोषित कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद देश में अभी भी लाखों ऐसे किसान मौजूद हैं जिन्होंने इस तकनीकी सत्यापन को नजरअंदाज किया है। ई-केवाईसी कराने के मुख्य रूप से दो तरीके उपलब्ध हैं, जिन्हें किसान अपनी सुविधा के अनुसार चुन सकते हैं। पहला तरीका पूरी तरह से डिजिटल है, जिसके तहत किसान योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपने आधार कार्ड से लिंक मोबाइल नंबर पर प्राप्त होने वाले ओटीपी के जरिए खुद ही घर बैठे इस प्रक्रिया को पूरा कर सकते हैं। दूसरा तरीका उन किसानों के लिए है जिनके आधार कार्ड में मोबाइल नंबर दर्ज नहीं है या जिन्हें इंटरनेट का उपयोग करने में कठिनाई होती है। ऐसे किसान अपने नजदीकी सामान्य सेवा केंद्र यानी सीएससी पर जाकर बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैन के माध्यम से बेहद मामूली शुल्क देकर अपना ई-केवाईसी सत्यापन करवा सकते हैं। यदि आपने अभी तक अपना ई-केवाईसी और भूमि आलेखों का सत्यापन नहीं कराया है, तो इसे तुरंत पूरा करें। इन प्रक्रियाओं के बिना आपके बैंक खाते में अगली किस्त की ₹2,000 की राशि ट्रांसफर नहीं की जाएगी। किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता के लिए आप आधिकारिक हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।

ई-केवाईसी के साथ-साथ एक और बड़ी तकनीकी अड़चन जो किसानों की किस्त को रोक सकती है, वह है बैंक खाते का आधार कार्ड से लिंक न होना और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी का सक्रिय न होना। केंद्र सरकार द्वारा जारी की जाने वाली तमाम सरकारी योजनाओं की राशि अब पूरी तरह से आधार आधारित भुगतान प्रणाली के माध्यम से भेजी जाती है। इसका सीधा मतलब यह है कि पैसा उस बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है जो पूरी तरह से आधार से जुड़ा हुआ होता है। कई बार ऐसा देखा गया है कि किसानों के पास एक से अधिक बैंक खाते होते हैं और उनका वह खाता चालू नहीं होता जो आधार से लिंक है, अथवा बैंक के स्तर पर आधार सीडिंग की प्रक्रिया अधूरी रह जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए किसानों को तुरंत अपनी संबंधित बैंक शाखा में जाकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका खाता डीबीटी के लिए पूरी तरह से सक्षम है। यदि बैंक खाते और आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग या जन्मतिथि में थोड़ा सा भी अंतर है, तो उसे भी तुरंत सुधरवाना आवश्यक है अन्यथा सॉफ्टवेयर भुगतान को खारिज कर देगा।

तकनीकी और बैंकिंग औपचारिकताओं के अलावा, भूमि आलेखों का सत्यापन यानी लैंड सीडिंग एक और बेहद गंभीर विषय बन चुका है जिसके कारण बड़ी संख्या में लोगों के नाम लाभार्थी सूची से हटाए जा रहे हैं। भू-लेख अंकन की इस प्रक्रिया के तहत राज्य सरकार के राजस्व विभाग के अधिकारी यह जांच करते हैं कि जिस जमीन के आधार पर किसान इस योजना का लाभ ले रहा है, वह वास्तव में उसके नाम पर पंजीकृत है या नहीं। कई मामलों में जमीन की बिक्री होने या परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद भी पुराने डेटा के आधार पर ही किस्तें जा रही थीं। इस विसंगति को रोकने के लिए अब हर एक लाभार्थी के भूमि विवरण को डिजिटल रूप से सत्यापित किया जा रहा है। यदि किसी किसान के प्रोफाइल में लैंड सीडिंग के विकल्प के सामने 'नो' लिखा हुआ दिखाई दे रहा है, तो उन्हें तुरंत अपने क्षेत्र के पटवारी, लेखपाल या जिला कृषि कार्यालय में संपर्क करके अपने भूमि स्वामित्व के मूल दस्तावेज जमा करने होंगे ताकि पोर्टल पर उनका डेटा अपडेट किया जा सके।

सरकार ने लाभार्थियों की सहूलियत के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी स्थिति की स्वयं जांच करने की सुविधा भी प्रदान की है। कोई भी किसान इंटरनेट के माध्यम से पोर्टल पर जाकर 'नो योर स्टेटस' वाले विकल्प पर क्लिक करके अपनी वर्तमान स्थिति की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है। इस विकल्प में अपना पंजीकरण नंबर दर्ज करने के बाद एक विस्तृत विवरण खुलकर सामने आता है, जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि आपकी ई-केवाईसी, लैंड सीडिंग और आधार बैंक खाता सीडिंग की स्थिति क्या है। यदि इन तीनों ही विकल्पों के सामने हरे रंग का टिक मार्क और 'यस' लिखा हुआ है, तो किसान को पूरी तरह से निश्चिंत हो जाना चाहिए क्योंकि उनका भुगतान सुरक्षित है और समय आने पर राशि सीधे खाते में आ जाएगी। लेकिन यदि इनमें से किसी भी एक जगह पर लाल निशान या 'नो' लिखा हुआ है, तो इसका सीधा मतलब है कि आपकी आने वाली किस्त अटक जाएगी और आपको तुरंत उस विशिष्ट कमी को दूर करने के प्रयास शुरू कर देने चाहिए।

आगामी किस्त के सुचारू हस्तांतरण को लेकर प्रशासनिक मशीनरी भी पूरी तरह से सक्रिय मोड में आ चुकी है और ग्रामीण इलाकों में विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य उन दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे किसानों की मदद करना है जो इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। कृषि विभाग के समन्वय से आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों में मौके पर ही ई-केवाईसी की जा रही है और बैंक खातों को आधार से जोड़ने के फॉर्म भरे जा रहे हैं। यदि कोई किसान किसी भी कारणवश इन शिविरों का लाभ नहीं उठा पा रहा है, तो वह जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपनिदेशक कार्यालय में जाकर अपनी समस्या का लिखित समाधान पा सकता है। सरकार का पूरा प्रयास है कि योजना की गरिमा और नियम कायदे बने रहें और किसी भी वास्तविक हकदार किसान को प्रशासनिक जटिलताओं के कारण आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े, इसलिए समय रहते कदम उठाना ही समझदारी है।

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