कर्नाटक में क्रॉस वोटिंग के बाद भारतीय जनता पार्टी का बड़ा एक्शन, प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को केंद्रीय नेतृत्व ने दिल्ली किया तलब
बीवाई विजयेंद्र का दिल्ली का यह दौरा सांगठनिक और पारिवारिक दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद अग्निपरीक्षा वाला साबित होने जा रहा है क्योंकि वह कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सबसे कद्दावर लिंगायत नेता बीएस येदियुरप्पा के बेटे हैं। जब उन्हें कर्नाटक भाजपा की कमान सौंपी गई थी, तब केंद्रीय नेतृत्व ने उम्मीद जताई थी कि येदियुरप्पा परिवार का
- विधान परिषद और राज्यसभा चुनाव के दौरान पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले विधायकों पर गिरेगी गाज, आलाकमान बेहद सख्त
- येदियुरप्पा परिवार के नेतृत्व और सांगठनिक क्षमता पर खड़े हुए गंभीर सवाल, दक्षिण के इस महत्वपूर्ण राज्य में शुरू हुआ बड़ा सियासी संकट
दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य कर्नाटक में हाल ही में संपन्न हुए विधायी चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक बहुत बड़ा आंतरिक संकट उठ खड़ा हुआ है। प्रांतीय विधान परिषद और राज्यसभा की खाली सीटों के लिए मतदान प्रक्रिया के दौरान पार्टी के कुछ विधायकों द्वारा सरेआम क्रॉस वोटिंग किए जाने की घटना ने केंद्रीय आलाकमान को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। इस घोर अनुशासनहीनता और सांगठनिक विफलता को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व तुरंत बेहद आक्रामक और कड़े एक्शन मोड में आ गया है। इस पूरे राजनैतिक घटनाक्रम के तुरंत बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री के निर्देश पर कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को आपातकालीन बैठक के लिए तत्काल प्रभाव से देश की राजधानी दिल्ली तलब कर लिया गया है। इस औचक बुलावे के बाद से ही कर्नाटक से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में भारी हलचल मची हुई है।
इस पूरे राजनैतिक विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रांतीय चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी के दो वरिष्ठ और कद्दावर विधायकों ने पार्टी के आधिकारिक व्हिप और तय रणनीति का सरेआम उल्लंघन करते हुए विपक्षी दल कांग्रेस के उम्मीदवारों के पक्ष में अपना मत डाल दिया। मतदान की गोपनीयता और पार्टी के आंतरिक तालमेल की धज्जियां उड़ाने वाली इस क्रॉस वोटिंग की खबर जैसे ही राष्ट्रीय राजधानी में बैठे शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची, वहां हड़कंप मच गया। केंद्रीय नेतृत्व इस बात से सबसे ज्यादा नाराज है कि पूर्ण बहुमत और स्पष्ट रणनीति होने के बावजूद राज्य इकाई अपने विधायकों को एकजुट रखने और कांग्रेस के रणनीतिकारों के चक्रव्यूह को भेदने में पूरी तरह से विफल रही। बीवाई विजयेंद्र को दिल्ली बुलाए जाने का मुख्य उद्देश्य इस विफलता की विस्तृत रिपोर्ट लेना और क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों के खिलाफ तत्काल निलंबन या निष्कासन जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का खाका तैयार करना है।
बीवाई विजयेंद्र का दिल्ली का यह दौरा सांगठनिक और पारिवारिक दोनों ही दृष्टिकोण से बेहद अग्निपरीक्षा वाला साबित होने जा रहा है क्योंकि वह कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के सबसे कद्दावर लिंगायत नेता बीएस येदियुरप्पा के बेटे हैं। जब उन्हें कर्नाटक भाजपा की कमान सौंपी गई थी, तब केंद्रीय नेतृत्व ने उम्मीद जताई थी कि येदियुरप्पा परिवार का प्रभाव राज्य में पार्टी को नई ऊर्जा देगा और सभी गुटों को एक मंच पर लाने में सफल रहेगा। लेकिन इस क्रॉस वोटिंग की घटना ने प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनकी सांगठनिक क्षमता, राजनीतिक परिपक्वता और विधायकों पर उनकी पकड़ पर बहुत बड़े और गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। दिल्ली में होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान उन्हें केंद्रीय नेताओं के तीखे सवालों का सामना करना पड़ेगा और यह भी स्पष्ट करना होगा कि खुफिया तंत्र होने के बावजूद उन्हें अपने ही विधायकों की इस बगावती योजना की भनक समय रहते क्यों नहीं लग सकी।
कर्नाटक भाजपा के भीतर मचे इस घमासान का एक अन्य बड़ा कारण पार्टी की आंतरिक गुटबाजी और पुराने बनाम नए नेताओं के बीच चल रहा वर्चस्व का पुराना संघर्ष भी माना जा रहा है। राज्य इकाई में एक बहुत बड़ा धड़ा ऐसा है जो शुरुआत से ही येदियुरप्पा परिवार के हाथों में पूरी कमान सौंपे जाने और बीवाई विजयेंद्र को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के फैसले का दबे स्वर में विरोध करता रहा है। इस धड़े के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि पार्टी के भीतर वंशवाद को बढ़ावा देने से जमीनी और समर्पित कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट रहा है। इस आंतरिक असंतोष और असंतुलन का पूरा फायदा सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकारों ने उठाया, जिन्होंने असंतुष्ट विधायकों से सीधे संपर्क साधकर उन्हें अपने पाले में कर लिया। विधायकों की इस बगावत ने भाजपा के भीतर चल रही इस आंतरिक कलह को पूरी तरह से देश के सामने ला दिया है।
इस बड़े राजनैतिक घटनाक्रम के बाद कर्नाटक की सत्ता पर काबिज कांग्रेस पार्टी के हौसले पूरी तरह से बुलंद नजर आ रहे हैं और वह इसे राज्य में भाजपा के पतन की शुरुआत मान रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की रणनीतिक जोड़ी ने इस चुनाव में जिस तरह से भाजपा के अभेद्य किले में सेंध लगाई है, उसने दक्षिण भारत में कांग्रेस के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि भाजपा के कई अन्य विधायक भी वर्तमान प्रांतीय सरकार के कामकाज और नीतियों से काफी प्रभावित हैं और आने वाले समय में कुछ और बड़े चेहरे पाला बदल सकते हैं। इस मनोवैज्ञानिक बढ़त के कारण आगामी स्थानीय निकायों और अन्य चुनावों में कांग्रेस को एक बहुत बड़ा रणनीतिक फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे भाजपा के लिए राज्य में अपनी जमीन बचाना मुश्किल हो रहा है।
दिल्ली पहुंचे बीवाई विजयेंद्र ने पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय में वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों और संगठन महासचिव के साथ कई दौर की बंद कमरे में मैराथन बैठकें की हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष ने केंद्रीय आलाकमान के सामने अपना पक्ष रखते हुए इस पूरी घटना को पार्टी को बदनाम करने की एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने उन सभी परिस्थितियों और आंतरिक कारणों का विस्तृत ब्योरा केंद्रीय नेताओं के सामने रखा है, जिनकी वजह से यह दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई। इसके साथ ही उन्होंने बगावत करने वाले दोनों विधायकों के खिलाफ तुरंत कानूनी और वैधानिक कार्रवाई करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपने की अनुमति भी मांगी है। केंद्रीय नेतृत्व इस समय बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है ताकि कोई भी कार्रवाई करने से राज्य के बड़े सामाजिक समीकरणों और वोट बैंक पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े।
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